Wednesday, July, 01,2026

कॉमन सुविधाओं के संचालन को लेकर प्रमोटर और RWA आमने-सामने

जयपुर: राजधानी के सबसे चर्चित आवासीय प्रोजेक्ट 'ज्वैल ऑफ इंडिया' में कॉमन एरिया और सुविधाओं के नियंत्रण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जेएलएन मार्ग स्थित इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट में प्रमोटर कंपनी सनसिटी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक वरुण अग्रवाल और ज्वैल ऑफ इंडिया फेज-प्रथम रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) आमने- सामने हैं। मामला इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इस प्रोजेक्ट में भारतीय प्रशासनिक सेवा (LAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) समेत कई वरिष्ठ वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारियों के भी अपार्टमेंट हैं। ऐसे में विवाद ने पूरे प्रोजेक्ट की साख और प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद की मूल वजह प्रोजेक्ट की कॉमन सुविधाओं, क्लब, कॉमन एरिया और उनके प्रबंधन व नियंत्रण को लेकर है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट (फेज-1 और फेज-2) की सभी साझा सुविधाओं का प्रबंधन एक ही एसोसिएशन के पास होना चाहिए, जबकि प्रमोटर कंपनी का कहना है. कि फेज-1 की एसोसिएशन को दोनों फेज की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा सकती।

रेरा ने RWA के पक्ष में दिया बड़ा आदेश

इस विवाद पर राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथोरिटी (RERA) ने पिछले महीने के अंत में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। रेरा की अध्यक्ष वीनू गुप्ता ने प्रमोटर कंपनी सनसिटी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिए कि 30 दिनों के भीतर दोनों फेज के कॉमन एरिया और कॉमन सुविधाओं का प्रबंधन एवं नियंत्रण रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को सौंपा जाए। परियोजना से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज भी एसोसिएशन को हस्तांतरित किए जाएं। मेंटेनेस फंड का ब्याज सहित पूरा लेखा-जोखा भी RWA को उपलब्ध कराया जाए।

रेरा में किन धाराओं का दिया गया था हवाला ?

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी याचिका में रेरा अधिनियम की धारा 11(4) तथा थारा 17 का हवाला देते हुए कहा था कि प्रमोटर कानूनन कॉमन एरिया और सुविधाओं का नियंत्रण एसोसिएशन को सौंपने के लिए बाध्य है। सुनवाई के दौरान एसोसिएशन के अधिवक्ता मितेश राठौड़ ने तर्क दिया कि प्रमोटर ने रेरा कानून के स्पष्ट प्रावधानों की अवहेलना की है और अब तक कॉमन सुविधाओं का हस्तांतरण नहीं किया।

प्रमोटर का पक्षः अपील करना हमारा कानूनी अधिकार

सनसिटी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निर्देशक करुण अग्रवाल का कहना है कि हमारी तरफ से सकारात्मक बातचीत जारी है। अपीलीय अधिकरण में अपील करना हमारा कानूनी अधिकार है। हमारा मानना है कि फेज-1 की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को दोनों फेज की कॉमन सुविधाओं की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। सुविधाओं का हस्तांतरण किस प्रक्रिया से हो, इसी मुद्दे को लेकर हमने अपील की है। मामला बायलीज और प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

30 दिन पूरे, फिर भी नहीं हुआ आदेश का पालन

रेरा के आदेश को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन एसोसिएशन का आरोप है कि अब तक न तो कॉमन सुविधाओं का हस्तांतरण हुआ है और ना ही आवस्यक दस्तावेज और मेंटेनेस फंड का विवरण उपलब्ध कराया गया है।

प्रमोटर ने REAT का दरवाजा खटखटाया

रेरा के आदेश को चुनौती देते हुए प्रमोटर कंपनी के निदेशक वरुण अग्रवाल ने रियल एस्टेट अपीलीय अधिकरण में अपील दायर कर दी है। वहीं संभावित एकपक्षीय आदेश से बचने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने अधिकरण में कैविएट भी दाखिल कर दी है।

प्रोजेक्ट के लिए एक ही एसोसिएशन जरूरी: RWA

ज्वैल ऑफ इंडिया फेज-प्रथम रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सक्सेना का कहना है कि रेरा के आदेश के 30 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक कॉमन सुविधाओं का हस्तांतरण नहीं किया गया। अपार्टमेट वासियों के हित में पूरे प्रोजेक्ट की एक ही रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन होनी चाहिए। यहां दीनों फेज के बीच कोई सार्वजनिक सड़क नहीं है और अधिकांश सुविधाएं साझा है। भविष्य में दो अलग-अलग एसोसिएशन होने से कई प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी समस्याएं पैदा होंगी। अब हमने रेरा में याचिका दायर की थी, तब दूसरे फेज में आवंटन भी नहीं हुआ था।

वैधता और उसके क्रियान्वयन पर होगी सुनवाई

अब पूरा मामला रियल एस्टेट अपीलीय अधिकरण के समक्ष है, जहां रेरा के आदेश की वैधता और उसके क्रियान्वयन पर सुनवाई होगी। ज्वैल ऑफ इंडिया में चल रहा यह भारी विवाद फिलहाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन जिस तरह से विवाद गहराया हुआ है उसको देखते हुए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अधिकरण के फैसले के खिलाफ कोई पक्ष आगे हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट नहीं आएगा और यह विवाद और आगे नहीं बढ़ेगा।

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