Wednesday, July, 01,2026

जनरल धीरज सेठः नए दौर के लिए मोदी सरकार की Strategic Choice


भारतीय सेना के 31वें में जनरल धीरज सेठ थल सेनाध्यक्ष के रूप की नियुक्ति केवल सेना में नेतृत्व परिवर्तन भर नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस शासन-शैली का भी प्रतिबिंब है, जिसमें रणनीतिक महत्व के निर्णयों में योग्यता, अनुभव और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। पिछले एक दशक में सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले सीमा अवसंरचना को सुदृढ़ करने, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण जैसे कदम इसी सोच को दर्शाते हैं। जनरल सेठ का चयन भी इसी दृष्टिकोण का स्वाभाविक विस्तार है।

माना जा रहा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उनकी पेशेवर दक्षता, व्यापक सैन्य अनुभव और नेतृत्व क्षमता से लंबे समय से प्रभावित रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जनरल सेठ और रक्षा मंत्री के बीच बेहतर कार्य-संबंध रहे हैं तथा उनकी रणनीतिक सोच और नेतृत्व पर रक्षा मंत्री के विश्वास ने उन्हें थल सेनाध्यक्ष बनाए जाने में अहम भूमिका निभाई।

जनरल सेठ ऐसे समय भारतीय सेना की कमान संभाल रहे हैं, जब सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं, सैन्य तकनीक में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहे हैं और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इसके साथ ही सेना को संवेदनशील सीमाओं पर पूरी तरह सतर्क रहना है और भविष्य के युद्धों को आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार भी करना है। ऐसे संक्रमणकाल में सेना का नेतृत्व ऐसे अधिकारी के हाथों में होना आवश्यक है, जिसके पास युद्धक्षेत्र का व्यापक अनुभव होने के साथ-साथ संस्थागत सुधारों की स्पष्ट समझ भी हो। जनरल सेठ ने अपने लंबे सैन्य जीवन में इन दोनों गुणों का परिचय दिया है।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र जनरल धीरज सेठ दिसंबर, 1986 में बख्तरबंद कोर (आर्मर्ड कॉप्स) में कमीशन प्राप्त कर सेना में शामिल हुए थे। लगभग चार दशक के अपने सैन्य जीवन में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। अग्रिम मोर्चे को लड़ाकू टुकड़ियों का नेतृत्व करने से लेकर आतंकवाद-रोधी अभियानों की कमान संभालने और सेना के महत्वपूर्ण कमांडों का नेतृत्व करने तक उन्होंने व्यापक अनुभव अर्जित किया है।

ऑपरेशनल असाइनमेंट्स को जिम्मेदारियों के अलावा जनरल सेठ ने सेना की भविष्य की रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रणनीतिक योजना निर्माण और क्षमता विकास के क्षेत्र में उनकी भूमिका ने सेना के आधुनिकीकरण तथा नई सैन्य तकनीकों और बदलते युद्ध सिद्धांतों के अनुरूप स्वयं को ढालने की प्रक्रिया को गति दी है। उन्होंने भारत और विदेशों के प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों से उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है, जिससे उनकी रणनीतिक दृष्टि और अधिक व्यापक हुई है।

जनरल सेठ का परिवार भी राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक रहा है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ ने सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद कई राज्यों के राज्यपाल के रूप में भी देश की सेवा की। उनके भाई भारतीय नौसेना में रियर एडमिरल के पद पर कार्यरत हैं। राष्ट्रसेवा की यह परंपरा जनरल सेठ के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उनकी नियुक्ति ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लगभग तीन दशक बाद आर्मर्ड कॉप्स का कोई अधिकारी थल सेनाध्यक्ष बना है। साथ ही, वे गार्डनर्स हॉर्स रेजिमेंट को उस गौरवशाली परंपरा को भी आगे बढ़ाते हैं, जिसने भारतीय सेना को सवांधिक थल सेनाध्यक्ष दिए हैं।

सशस्त्र बलों में शीर्ष नेतृत्व की नियुक्तियां अक्सर किसी सरकार की रणनीतिक सोच का संकेत देती हैं। जनरल धीरज सेठ को चुनकर मोदी सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह सिद्ध क्षमता, संस्थागत अनुभव और संतुलित नेतृत्व को प्राथमिकता देती है। ऐसे समय में जब भारत तेजी से बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य का सामना कर रहा है, यह निर्णय योग्यता और निरंतरता में सरकार के विश्वास को दर्शाता है।

भारत जब सैन्य आधुनिकीकरण और रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के नए दौर में प्रवेश कर रहा है, तब जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस कार्यशैली का प्रतीक प्रतीत होती है, जिसमें सही समय पर सही व्यक्ति को सही जिम्मेदारी सौंपकर देश की दीर्घकालिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा जाता है।

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