Monday, March, 16,2026

अब राजस्थान में हाईवे किनारे से नहीं हटेंगी शराब की दुकानें

नई दिल्ली/जयपुर: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित शराब की दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने के राजस्थान हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य सरकार और 1,102 शराब लाइसेंस धारकों को बड़ी राहत मिली है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को राजस्थान सरकार एवं विभिन्न लाइसेंस धारकों की विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) पर सुनवाई की। ये याचिकाएं 24 नवंबर, 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी। पीठ ने स्पष्ट किया कि आगे की सुनवाई तब होगी, जब पक्षकार अपने काउंटर एफिडेविट और रीजॉइंडर दाखिल कर देंगे। तब तक हाई कोर्ट का आदेश पूरी तरह स्थगित रहेगा। इस फैसले से नगर निगम, नगरपालिका और अन्य शहरी क्षेत्रों से गुजरने वाले राजमागों पर स्थित 1,102 शराब दुकानों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होगी।

राज्य सरकार की मजबूत दलीलें

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने 500 मीटर की कठोर दूरी सीमा को पुनः लागू कर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लंघन किया है। उन्होंने स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के. बालू मामले के बाद जारी स्पष्टीकरणों (31 मार्च 2017, 11 जुलाई, 2017 और 23 फरवरी, 2018) का हवाला दिया, जिनमें शहरी क्षेत्रों में दूरी सीमा को कुछ मामलों में 220 मीटर तक कम किया गया था। सरकार ने जोर दिया कि हाई कोर्ट अनुच्छेद 141 के तहत बाध्यकारी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को नजरअंदाज नहीं कर सकता और न ही राज्य के विवेकाधिकार में अनुचित हस्तक्षेप कर सकता है।

लाइसेंस धारकों का पक्षः रोजगार और व्यावसायिक हित

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और नवीन पाहवा ने दलील दी कि शहरी क्षेत्रों की दुकानों को ग्रामीण क्षेत्रों की तरह नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही शहरी क्षेत्रों में छूट का प्रावधान किया था, जिसे हाई कोर्ट ने अनदेखा किया। उन्होंने कहा कि अचानक स्थानांतरण से हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित होगा और भारी आर्थिक नुकसान होगा। रोहतगी ने अनुच्छेद 19 (1) (g) के तहत व्यावसायिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए तर्क दिया कि शहरी इलाकों में बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन के कारण पूर्ण प्रतिबंध अनुचित है।

हाई कोर्ट का मूल आदेश

24 नवंबर, 2025 को जोधपुर पीठ (जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित) ने कन्हैया लाल सोनी व अन्य की याचिकाओं पर फैसला देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी में स्थित सभी शराब दुकानों को हटाया या स्थानांतरित किया जाए, भले ही वे शहरी क्षेत्र में हों। हाई कोर्ट ने 'राजस्व से बड़ी है जनता की जान' का सिद्धांत दोहराते हुए सड़क सुरक्षा और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार को प्राथमिकता दी थी। दुर्घटना आंकड़ों का हवाला देते हुए कोर्ट ने दो महीने की मोहलत दी थी।

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