Friday, August, 07,2026

आंतरिक सुरक्षा के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार बने रहेंगे गोविंद मोहन

जयपुर: भारत सरकार ने अपने निपुण, कर्मठ और भरोसे वाले गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। देशभर की सीनियर ब्यूरोक्रेसी के लिए यह एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। अब वे 22 अगस्त, 2027 तक केंद्र में गृह विभाग की कमान यथावत संभालते रहेंगे। एक्सटेंशन बढ़ाने से संबंधित आदेश केंद्रीय DOPT ने बुधवार को जारी किया। उन्हें 23 अगस्त 2024 को केंद्र में गृह विभाग की कमान सौंपी गई थी।

गोविंद मोहन के कार्यकाल बढ़ाए जाने से राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में प्रसन्नता की लहर है। वर्ष 2003 से 2005 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बतौर सचिव 27 महीने का उनका राजस्थान में अल्प प्रवास यहां की ब्यूरोक्रेसी के लिए यादगार बन गया है। छोटे से कार्यकाल में उन्हें तब राज्य के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता था। पहली बार मुख्यमंत्री बनीं वसुंधरा राजे सरकार के शुरुआती प्रशासनिक ढांचे को मजबूती देने में तब गोविंद मोहन ने अहम भूमिका निभाई थी।

अभी जुलाई में नई दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद के पास हुए छात्र-विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी बतौर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन में मुख्य भूमिका निभाई। सरकार की ओर से उन्हें राजनीतिक संवाद और कानून व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा सौंपा गया था। इस क्रम में गृह मंत्री अमित शाह के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया और खुफिया ब्यूरो (IB) के प्रमुख के साथ मिलकर दिल्ली की सुरक्षा-स्थिति पर नजर रखी।

सरकार के सबसे भरोसे के और जिम्मेदार प्रतिनिधि के तौर पर संकट के उन दिनों में गोविंद मोहन ने राजनीतिक नेतृत्व व प्रदर्शनकारियों के बीच मध्यस्थता और बातचीत के प्रयासों में हिस्सा लिया। इस समूचे घटनाक्रम के दौरान केंद्र के सत्ता गलियारों में गोविंद मोहन को जिस तरह तरजीह मिली, उससे संकेत मिल गए थे कि केंद्र सरकार उन्हें 28 अगस्त को रिटायर करने वाली नहीं है।

दरअसल, बात केवल जुलाई के ताजा छात्र-विपक्ष के आंदोलन प्रदर्शन की ही नहीं है। पिछले दो वर्षों में बतौर गृह सचिव और गृह मंत्रालय (MHA) के वरिष्ठतम अधिकारी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा के मामलों को संभाला है। गृह सचिव का पद संभालते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण ढंग से विधानसभा चुनाव कराने की थी। उन्होंने सुरक्षा बलों की तैनाती, खुफिया तंत्र के समन्वय और घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति की सीधी निगरानी की। उन्होंने देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने का काम किया। इस क्रम में पूर्वोत्तर में उग्रवाद पर नियंत्रण और छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को खत्म करना उल्लेखनीय है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले ऑनलाइन अपराधों के खिलाफ 'नेशनल डायलाग' की शुरुआत की।

देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अवैध घुसपैठ की रोकथाम के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य एजेंसियों से मिलकर सीमा पर चौकसी को चाक चौबंद करने के क्रम में नीतिगत फैसले लिए। स्पष्ट है कामों और उपलब्धियों की ऐसी पृष्ठभूमि वाले गोविंद मोहन की गृह मंत्रालय को अभी बहुत जरूरत है। देश के मौजूदा हालात और कानून व्यवस्थाओं की जो जानकारी और अनुभव गोविंद मोहन को है, उसके दृष्टिगत उनका विकल्प अभी खोजा ही नहीं जा सकता है। ऐसे में उनका कार्यकाल एक साल बढ़ाया जाना समयानुकूल फैसला है।

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