Sunday, May, 10,2026

RGHS में बदलाव की तैयारी, कर्मचारी संगठनों का विरोध

जयपुर: राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) को कैशलेस इंश्योरेंस मॉडल पर शिफ्ट करने की तैयारी को लेकर सचिवालय में चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ की अध्यक्षता में कर्मचारी संगठनों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक बेनतीजा रही और अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। बैठक में अधिकारियों की ओर से RGHS में आ रही परेशानियों और गड़बड़ियों को दूर करने के लिए इसे 'मा' योजना अथवा सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों के मेडिक्लेम मॉडल से जोड़ने का प्रस्ताव कर्मचारियों के सामने रखा गया।

सरकार का तर्क है कि इससे अस्पतालों के भुगतान में देरी की समस्या दूर होगी और क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया तेज होगी। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और स्पष्ट कहा कि RGHS के मूल स्वरूप से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा तथा निजी बीमा कंपनियों की 'घुसपैठ' का व्यापक विरोध किया जाएगा। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि निजी बीमा कंपनियों को शामिल नहीं कर सरकारी इंश्योरेंस कंपनी के मेडिक्लेम मॉडल से योजना को जोड़ा जाएगा, लेकिन कर्मचारियों ने इस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया।

निजी अस्पतालों में तीसरे दिन भी नहीं मिला इलाज, डॉक्टर्स ने निकाली रैली

वहीं दूसरी तरफ डॉ. सोनदेव बंसल प्रकरण को लेकर निजी चिकित्सकों का आंदोलन शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। जयपुर के अधिकांश निजी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे मरीजों को 'भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बड़ी संख्या में मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचे। शनिवार को चिकित्सकों ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज के आरडी हॉस्टल से त्रिमूर्ति सर्किल होते हुए जेएमए हॉल तक रैली निकाली। इसके बाद जयपुर मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की आपात बैठक आयोजित हुई, जिसमें आंदोलन को और तेज करने तथा प्रदेशव्यापी हड़ताल की तैयारी पर चर्चा की गई। चिकित्सकों का आरोप है कि राजस्थान हाई कोर्ट में डॉ. बंसल की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान वकीलों के एक समूह ने हंगामा कर न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाई तथा चिकित्सकों और उनके परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार किया। IMA सचिव डॉ. अनुराग तोमर और IMA राजस्थान के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि जब तक चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन बहिष्कार जारी रहेगा।

सरकार का तर्कः 600 करोड़ से 4300 करोड़ पहुंचा बजट

बैठक में सरकार की ओर से बताया गया कि पहले करीब 600 करोड़ की योजना अब बढ़कर लगभग 4300 करोड़ रुपए की हो चुकी है। बढ़ते वित्तीय भार को देखते हुए व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई गई। सरकार ने फिलहाल ओपीडी के बजाय केवल आईपीडी में इलाज सुविधा देने का प्रस्ताव भी स्खा, लेकिन कर्मचारी नेताओं ने इसे सिरे से खारिज कर दिया, क्योंकि मेडिक्लेम मॉडल या 'मा' योजना में ओपीडी की सुविधा नहीं है, जबकि RGHS में यह सुविधा उपलब्ध है।

योजना को निजी हाथों में देने का विरोध

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि RGHS योजना में निजी बीमा कंपनियों का प्रवेश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन योजना में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन योजना को निजी हाथों में देने का विरोध करेंगे। बैठक में कर्मचारी पक्ष की ओर से आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ, जिसमें संरक्षक कुलदीप यादव, उपाध्यक्ष अजयवीर सिंह, कजोड़मल मीणा, महिपाल सिहाग समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वहीं सरकार की ओर से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़, प्रमुख सचिव वित्त वैभव गालरिया, राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल, एसीईओ डॉ. निधि पटेल, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

पेंशनर्स समाज भी एक्शन मोड में

RGHS में निजी अस्पतालों द्वारा इलाज नहीं दिए जाने और चिकित्सा सुविधाएं बाधित होने के मुद्दे पर राजस्थान पेंशनर समाज भी आक्रामक रुख में में आ गया है। राजस्थान पेंशनर समाज के प्रदेशाध्यक्ष शंकर सिंह मनोहर ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी मुख्य सचिव और चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव से विस्तृत चर्चा हो चुकी है तथा ज्ञापन के माध्यम से पेंशनर्स का पक्ष सरकार के सामने रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 11 मई तक RGHS में चिकित्सा सुविधाएं सुचारू नहीं हुई तो 13 मई से प्रदेशभर में जिला स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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