Sunday, May, 10,2026

ऊर्जा क्रांति में राजस्थान ने रचा इतिहास

जयपुर: फर्स्ट इंडिया मीडिया ग्रुप के सीईओ एवं मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा ने राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रशासनिक फोकस के कारण राजस्थान आज 'भारत की सोलर कैपिटल' बनकर उभरा है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर का स्वागत करते हुए पवन अरोड़ा ने कहा कि राजस्थान का ऊर्जा विभाग अब केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

उन्होंने कहा कि चुनौतियां ही उपलब्धियों को जन्म देती हैं और कर्जा विभाग ने घाटे में चल रहे क्षेत्र को विकास और नवाचार के मॉडल में बदल दिया है। राजस्थान की अक्षय ऊर्जा उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अरोड़ा ने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 59 हजार मेगावाट स्थापित विद्युत क्षमता है, जिसमें से करीब 48 हजार मेगावाट अक्षय ऊर्जा तथा लगभग 41 हजार मेगावाट केवल सौर ऊर्जा से प्राप्त हो रही है।

उन्होंने कहा कि चुनौतियां हो उपलब्धियों को जन्म देती हैं और ऊर्जा विभाग ने घाटे में चल रहे क्षेत्र को विकास और नवाचार के मॉडल में बदल दिया है। राजस्थान की अक्षय ऊर्जा उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अरोड़ा ने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 59 हजार मेगावाट स्थापित विद्युत क्षमता है, जिसमें से करीब 48 हजार मेगावाट अक्षय ऊर्जा तथा लगभग 41 हजार मेगावाट केवल सौर ऊर्जा से प्राप्त हो रही है।

उन्होंने कहा कि देश के अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों में राजस्थान की हिस्सेदारी लगभग 25-27% है और भारत के विजन-2047 के तहत 1800 गोगावाट सौर ऊर्जा लक्ष्य में भी राज्य की अहम भूमिका रहेगी। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राजस्थान में 13 हजार करोड़ यूनिट से अधिक हरित ऊर्जा का उत्पादन हुआ है। पोएम कुसुम योजना का जिक्र करते हुए अरोड़ा ने कहा कि इस योजना के तहत राजस्थान देश का अग्रणी राज्य बन चुका है, जहां लगभग 1750 संयंत्रों से करीब 4 गीगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा कि अनदाता अब कर्जादात्ता बन चुका है।

ऊर्जा विभाग मुख्यमंत्री की प्राथमिकता... किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराना 'बड़ी उपलब्धि'

पवन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की निरंतर मॉनिटरिंग और बजटीय सहयोग से ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। सीएम ने पिछले साल कहा था कि यह उनके लिए पानी-बिजली का साल है। मुख्यमंत्री इसकी निरंतर समीक्षा बैठकें करते हैं और यह उनका प्रिय विषय है। ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री का विजन और निरंतर मॉनिटरिंग के सार्थक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। अरोड़ा ने प्रमुख ऊर्जा निवेश प्रस्तावों की समीक्षा में वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषकर आईएएस आरती डोगरा की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की। किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराना 'बड़ी उपलब्धि' बताते हुए उन्होंने कहा कि 24 जिलों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है, जिससे रात में सिंचाई की मजबूरी कम हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि जो विद्युत वितरण कंपनियां पहले भारी घाटे में थीं, वे अब बेहतर राजस्व और वित्तीय स्थिरता की ओर बढ़ रही है। स्मार्ट मीटरिंग सुधारों पर पवन अरोड़ा ने बताया कि राजस्थान में सरकारी क्षेत्र में करीब 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और सरकारी विभागों में प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग पूरी तरह लागू हो चुकी है, जिससे अग्रिय राजस्व संग्रह में सुधार हुआ है। पेट्रोल-डीजल जैसी अन्य सेवाओं के दाम बढ़ने के बावजूद कुछ जिलों में बिजली दरों में 65 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी की गई है तथा कई क्षेत्रों में दरें स्थिर रखी गई हैं।

एनर्जी पॉलिसी-2024 ने अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को बनाया आसान

पवन अरोड़ा ने अक्षय ऊर्जा योजनाओं से लाभान्वित महिलाओं की भी सराहना की, विशेष रूप से पप्पू देवी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सौर ऊर्जा के माध्यम से महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बनकर उभरी हैं। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांसवाड़ा दौरे के दौरान उनसे संवाद किया था, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली। नीतिगत सुधारों पर बोलते हुए अरोड़ा ने कहा कि राजस्थान इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी-2024 ने अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं और सोलर पाकों की स्थापना को आसान बनाया है। राइजिंग राजस्थान निवेश शिखर सम्मेलन के तहत ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े 1.93 लाख करोड़ रुपए के एमओयू हुए हैं। अरोड़ा ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान का ऊर्जा क्षेत्र इस बात का उदाहरण बन गया है कि स्पष्ट दृष्टि, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप किस प्रकार किसी विभाग को राज्य की विकास शक्ति में बदल सकती है।

अन्नदाता अब बन चुका है ऊर्जादाता

 समिट में तीन पैनल चर्चाए आयोजित की गईं, जिनमें से एक पूरी तरह ऊर्जा उत्पादन करने वाले किसानों पर केंद्रित रही। पहली पैनल चर्चा का विषय था 'पावरिंग द फ्यूचरः इनोवेशन एंड चैलेंजेज इन रिन्यूएबल-नॉन रिन्यूएबल एनर्जी।' इसमे देवेंद्र श्रृंगी, आरके शर्मा, सुरेश मीणा, योगेंद्र माथुर और बीएस मीणा ने भाग लिया। चर्चा में बताया गया कि पीएम कुसुम योजना किसानों की आय बढ़ाने के साथ राजस्थान को अक्षय ऊर्जा क्रियान्वयन में अग्रणी बना रही है। दूसरी चर्चा 'अन्नदाता से ऊर्जादाला तक का सफर' विषय पर हुई। इसमें किसान बलवीर सिंह यादव, पप्पू देवी, रामचंद्र सिंह और धर्मेंद्र यादव ने अपने अनुभव साझा किए।

किसानों ने बताया कि आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी है, जिससे जयपुर के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत खत्म हो गई है और अक्षय ऊर्जा उत्पादन से उनकी आय करीब दस गुना बढ़ी है। तीसरी पैनल चर्चा' ग्रीन पावर, गोल्डन फ्यूचरः राजस्थान लीडिंग इंडिया' रिन्यूएबल इकॉनमी' विषय पर हुई। इसमें मनीष गुप्ता, हरेद्र सैनी और रजनीश शर्मा ने भाग लिया। चर्चा में राजस्थान को अक्षय ऊर्जा निवेश, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी स्टोरेज के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने तथा उद्योग और सरकार के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

 

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