Sunday, May, 10,2026

JDA व प्रशासन के बीच 'फुटबॉल' बने 90ए आवेदक

जयपुर: राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90ए के तहत भू-रूपांतरण करा चुके बड़ी संख्या में आवेदक इन दिनों जेडीए और जिला प्रशासन के बीच 'फुटबॉल' बने हुए हैं। हालत यह है कि आवेदकों को अपने प्रकरणों की अग्रिम कार्रवाई के लिए लगातार जेडीए और संबंधित तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एक तरफ जेडीए अधिकारियों का कहना है कि संबंधित प्रकरणों का रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है, इसलिए वे भवन मानचित्र अनुमोदन, ले-आउट प्लान स्वीकृति और पट्टा जारी करने जैसी आगे की कार्रवाई नहीं कर सकते। वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन का तर्क है कि संबंधित क्षेत्र अब जेडीए के अधिकार क्षेत्र में शामिल हो चुके हैं, इसलिए वे इन मामलों में कोई कार्रवाई करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

दरअसल, नगरीय विकास विभाग ने 3 अक्टूबर 2025 को अधिसूचना जारी कर जेडीए के क्षेत्राधिकार में 679 नए गांव शामिल किए थे। इनमें 47 गांव विभिन्न नगरपालिकाओं के तथा 13 तहसीलों के 632 गांव शामिल हैं। इन गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे भूखंड और जमीनें हैं, जिनमें पहले ही जिला प्रशासन की ओर से धारा 90ए के तहत भू-रूपांतरण की कार्रवाई की जा चुकी थी, लेकिन जेडीए रीजन में शामिल होने के बाद इन प्रकरणों में आगे की कार्रवाई जैसे भवन मानचित्र अनुमोदन, ले-आउट प्लान मंजूरी और पट्टा जारी करना-अब जेडीए के माध्यम से किया जाना तय हुआ। यहीं से विवाद और प्रशासनिक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।

रिकॉर्ड नहीं मिलने से JDA ने खड़े किए हाथ

जेडीए अधिकारियों का कहना है कि जिन प्रकरणों में पहले जिला प्रशासन स्तर पर 90ए की कार्रवाई की गई थी, उनका मूल रिकॉर्ड अभी तक संबंधित तहसीलों से जेडीए को हस्तांतरित नहीं किया गया है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण जेडीए आगे की वैधानिक कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, जेडीए के विभिन्न जोन उपायुक्तों ने संबंधित तहसील कार्यालयों को दो से तीन बार पत्र लिखकर रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया, लेकिन अधिकांश मामलों में अब तक रिकॉर्ड हस्तांतरित नहीं किया गया। इसका खामियाजा सीधे तौर पर आम आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है।

संयुक्त परिपत्र के बाद भी नहीं सुलझी स्थिति

नए शामिल क्षेत्रों में 90ए, भवन मानचित्र अनुमोदन, ले-आउट प्लान स्वीकृति और पट्टा जारी करने को लेकर पहले स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसके बाद नगरीय विकास विभाग, राजस्व विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने संयुक्त रूप से परिपत्र जारी कर जिम्मेदारियां स्पष्ट करने का प्रयास किया। 1 जनवरी 2026 को तीनों विभागों के सचिवों के हस्ताक्षर से जारी संयुक्त परिपत्र में स्पष्ट किया गया कि जिन मामलों में जिला प्रशासन पहले ही भू-रूपांतरण की कार्रवाई कर चुका है, उन मामलों में आगे की कार्रवाई संबंधित निकाय या प्राधिकरण करेंगे। यानी जेडीए क्षेत्र में आने वाले मामलों में भवन मानचित्र अनुमोदन, ले-आउट प्लान स्वीकृति और पट्टा जारी करने जैसी प्रक्रिया जेडीए के माध्यम से की जानी है। परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि आगे की कार्रवाई राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी-2024 और मॉडल राजस्थान भवन विनियम-2025 के तहत की जाएगी। बावजूद इसके, रिकॉर्ड हस्तांतरण नहीं होने से व्यवस्था जमीन पर लागू नहीं हो पा रही है।

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