Tuesday, September, 01,2026

टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा-कांग्रेस में घमासान

जयपुर: जयपुर नगर निगम चुनाव में सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन भाजपा और कांग्रेस ने प्रत्याशियों के नामों पर आखिरी समय तक सस्पेंस बनाए रखा। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही दोनों दलों की सूचियां सामने आईं और टिकट वितरण को लेकर नाराजगी, विरोध और बगावत खुलकर सामने आ गई। भाजपा ने सुबह 10.46 बजे 145 प्रत्याशियों की सूची जारी की, जबकि कांग्रेस ने नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम 5.11 बजे सभी 150 वार्डों के प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक किए। अब दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट से नाराज दावेदारों और निर्दलीय मैदान में उतर चुके बागियों को साधने की है। नामांकन के बाद चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ होने लगी है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी का समय है। ऐसे में दोनों दल अगले तीन दिन में नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाकर वोटों के संभावित बिखराव को रोकने की कोशिश करेंगे। एक सितंबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा होगी। 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी होगी और 4 सितंबर को चुनाव चिह्नों का आवंटन किया जाएगा।

वार्ड 76 ने खोल दी भारतीय जनता पार्टी के टिकट वितरण की परत

भाजपा की सूची सामने आते ही वार्ड 76 का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। पार्टी ने यहां पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट को प्रत्याशी बनाया, जबकि इससे पहले मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ ने कुलदीप मिश्रा को पार्टी का सिंबल दे दिया था। मिश्रा सिंबल के आधार पर नामांकन भी दाखिल कर चुके थे। बाद में सिंबल वापस लेकर कर्णावट को अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया। सराफ ने कहा कि पहले मिश्रा का नाम तय हुआ था, इसलिए सिंबल दिया गया था। बाद में पार्टी ने प्रत्याशी बदल दिया। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक सौरभ सारस्वत ने कहा कि पार्टी को सिंबल बदलने का अधिकार है। इस घटनाक्रम ने टिकट वितरण की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।

निवर्तमान मेयर कुसुम यादव का टिकट कटा, पूर्व मेयर ज्योति मैदान में

भाजपा ने निवर्तमान मेयर कुसुम यादव को टिकट नहीं दिया। उनकी जगह प्रदेश उपाध्यक्ष रहे सुनील कोठारी को बार्ड 112 से मैदान में उतारा गया है। वहीं, पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को वार्ड 110 से टिकट दिया गया है। कांग्रेस के टिकट पर जयपुर की महापौर रह चुकीं खंडेलवाल बाद में भाजपा में शामिल हुई थीं। उनके मैदान में उतरने से किशनपोल क्षेत्र का मुकाबला हाई प्रोफाइल हो गया है।

महापौर की कुर्सी का खेल भी शुरू

नगर निगम चुनाव में मुकाबला केवल 150 पार्षदों की सीटों तक सीमित नहीं है। टिकटों की घोषणा के साथ ही महापौर पद को लेकर भी राजनीतिक समीकरण बनने लगे है। भाजपा में सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, विमल अग्रवाल, विमल कटियार, ज्योति खंडेलवाल और शैलेन्द्र भार्गव जैसे नामों की चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में वैश्य वर्ग से महापौर बनाए जाने की अटकलें भी है। कांग्रेस में विनय प्रताप भौपर, धर्मसिंह सिंघानिया, राजीव चौधरी, विनीत कूलवाल और सुनीता मेठी जैसे नाम संभावित दावेदारों के तौर पर चर्चा में हैं। कांग्रेस की सूची में महिलाओं व मुस्लिम प्रत्याशियों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।

परिवार और राजनीतिक रिश्तों पर भी भरोसा

भाजपा की सूची में राजनीतिक परिवारों और संगठन से जुड़े लोगों को भी जगह मिली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ओएसडी आनंद शर्मा की पत्नी प्रतिभा शर्मा को वार्ड 87 से टिकट दिया गया है। मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ के निजी सहायक नटवर लाल कुमावत को वार्ड 83 से प्रत्याशी बनाया गया है। पूर्व पार्षद रामकिशोर सोयल की पत्नी सहित कई पूर्व पार्षदों के परिवारों को भी टिकट मिला है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए कुछ नेताओं को टिकट देकर पार्टी ने नए राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है।

भाजपा ने आठ मुस्लिम चेहरों पर खेला दांव

भाजपा ने जयपुर में आठ मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इनमें वार्ड 19 से शहनवाज अंसारी, 109 से जाकिर खान कायमखानी, 113 से फरीदुद्दीन 'जैकी, 117 से शब्बो जहां, 128 से माजिद पठान, 136 से मिजाना मिर्जा, 137 से रहीस मंसूरी और 146 से अफसाना शामिल हैं। फरीदुद्दीन जैकी लंबे समय से भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे में सक्रिय रहे हैं। पार्टी के इस कदम को मुस्लिम बहुल इलाकों में राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। नामांकन के अंतिम दिन जयपुर में चुनावी रंग चरम पर नजर आया। प्रत्याशी समर्थकों के साथ नामांकन केंद्रों पर पहुंचे। कहीं ढोल-नगाड़े बजे तो कहीं फूल-मालाओं से प्रत्याशियों का स्वागत हुआ।

टिकट कटते ही बगावत के सुर

विद्याधर नगर क्षेत्र में वार्ड 5 से टिकट की दावेदारी कर रहे देवेंद्र सिंह निठारवाल ने टिकट नहीं मिलने के बाद बगावत का मोर्चा खोल दिया। वार्ड 15 में भी टिकट को लेकर असंतोष सामने आया। संगठन में लंबे समय से सक्रिय दिनेश कांवट भी नामांकन के दौरान समर्थकों के साथ नजर आए। वहीं, वार्ड 149 की दावेदार अंजली गौतम टिकट नहीं मिलने के बाद आरओ कार्यालय में भावुक हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की जगह 'जी हजूरी' करने वालों को महत्व दिया जा रहा है। ऐसे विरोध भाजपा के लिए आने वाले दिनों में चुनौती बन सकते हैं।

अब भाजपा का 'डैमेज कंट्रोल', रात से शुरू होगी मान-मनुहारः

नामांकन खत्म होने के साथ भाजपा ने अब बागियों और नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की रणनीति तेज कर दी है। पार्टी स्तर पर नाराज दावेदारों से संपर्क कर उन्हें एकजुट करने की कवायद शुरू होगी। जो नेता आसानी से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें भविष्य में संगठन और सत्ता में संभावनाओं का भरोसा देकर साथ लाने की कोशिश की जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी चुनावी रणनीति में सक्रिय है। सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, मंत्रियों, प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों, संभाग प्रभारियों और अन्य प्रमुख नेताओं से जुड़े। पार्टी के दावित्ववान कार्यकर्ताओं को भी वीसी से जोड़ा गया। भाजपा का लक्ष्य साफ है-टिकट वितरण से पैदा हुए असंतोष को जल्द से जल्द नियंत्रित करना और चुनावी मैदान में पार्टी को एकजुट रखना।

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