Monday, September, 07,2026

बिना पैसे नहीं होते कामः गहलोत हॉर्स ट्रेडिंग उनके होती थी: राठौड़

जयपुर: राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव के बीच सियासी पारा चढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के रोड शो से लेकर सरकार के काम काज, भ्रष्टाचार, पट्टों और विकास कार्यों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए तो वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने पलटवार करते हुए गहलोत के कार्यकाल और कांग्रेस की चुनावी राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप से साफ है कि निकाय चुनाव अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि सरकार के ढाई साल के काम काज पर भी जनमत का मुकाबला बनते जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री का रोड शो उपलब्धि नहीं, सबसे बड़ी नाकामीः अशोक गहलोत

गहलोत ने कहा कि यह पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम चुनावों में रोड शो कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री को रोड शो करने की जरूरत क्यों पड़ी। गहलोत ने इसे सरकार की उपलब्धि के बजाय सबसे बड़ी नाकामी बताते हुए कहा कि इससे जनता में सरकार के प्रति आक्रोश का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने टूटी सड़कों, खराब सीवरेज और विकास कार्य ठप होने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि बिना पैसे दिए कोई काम नहीं हो रहा और विकास पूरी तरह ठप है। उन्होंने अन्नपूर्णा जैसी योजनाएं बंद करने और पेंशन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने पर भी सरकार को घेरा। गहलोत ने कहा कि निकाय चुनाव में जनता सरकार को जवाब देगी।

12 लाख पट्टों का दावा, सरकार से पूछा हिसाब

गहलोत ने अपनी सरकार के 'प्रशासन शहरों के संग' अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में 12 लाख पट्टे बांटे गए थे। उन्होंने मौजूदा सरकार से पूछा कि ढाई-पौने तीन साल में कितने पट्टे दिए गए। गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार जनता के आक्रोश से घबराकर चुनावों में केंद्रीय और दूसरे राज्यों के नेताओं को उतार रही है। उन्होंने जनता से भाजपा को वोट की चोट देने की अपील की।

राठौड़ का पलटवार- 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' पर कांग्रेस को घेरा

राठौड़ ने निकाय चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग के गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की दिशा में आगे बढ़ रही है। राजस्थान में पहली बार निकाय चुनाव एक साथ कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कभी कहा था कि 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' कोई नहीं करा सकता, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे करके दिखाया है।

सरकार ने सदन में रखा रिपोर्ट कार्ड

भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार के ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड मांग रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री सदन में सरकार का रिपोर्ट कार्ड रख चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट कार्ड पर सदन में बहस से कांग्रेस भाग गई थी। राठौड़ ने कहा कि भाजपा सरकार हर साल अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखती है।

कांग्रेस ने चुनावों के बहाने जनता को लंबे समय तक उलझाए रखा

राठौड़ ने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार के दौरान बार-बार चुनाव कराकर लंबे समय तक आचार संहिता लागू रखी गई। 2019-20 में 49 नगर निकायों के चुनाव में 34 दिन, पंच-सरपंच चुनाव में 36 दिन, 3,848 ग्राम पंचायतों के चुनाव में 25 दिन, छह नगर निगमों के चुनाव में 22 दिन और 21 जिलों में जिला परिषद पंचायत समिति चुनाव में 49 दिन आचार संहिता रही। 2021 में 90 नगर निकायों के चुनाव में भी 27 दिन आचार संहिता लागू रही। काग्रेस जनता को चुनावों में उलझाती है, जबकि भाजपा जनता को सुलझाती है।

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