Monday, September, 07,2026

पार्षद की कुर्सी से विधानसभा तक... निकायों ने दिए दिग्गज

जयपुर: सियासत में बड़ी छलांग लगाने से पहले कई नेताओं ने राजनीति की शुरुआत छोटे सदन से की। किसी ने पार्षद बनकर जनता के बीच अपनी पहचान बनाई तो किसी ने महापौर या सभापति की जिम्मेदारी संभालकर राजनीतिक जमीन मजबूत की। यही वजह है कि राजस्थान की राजनीति में आज भी ऐसे कई विधायक और सांसद हैं, जिनकी सियासी पारी की शुरुआत नगर निकाय से हुई थी। प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव के बीच एक बार फिर यह सवाल अहम हो गया है कि क्या पार्षद का चुनाव राजनीतिक सफर की पहली और सबसे मजबूत पाठशाला है?

प्रदेश के 309 नगर निकायों के 10 हजार से ज्यादा वार्डों में चुनावी मुकाबला है। नामांकन वापसी के बाद प्रचार जोर पकड़ चुका है और करीब 38 हजार से ज्यादा प्रत्याशी पार्षद बनने की दौड़ में हैं। चुनाव परिणाम 14 अगस्त को सामने आएंगे। हालांकि, निकाय चुनाव के मैदान में उतरने वाले इन हजारों चेहरों में से कुछ भविष्य में विधानसभा और संसद तक पहुंचें, इसकी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

जयपुर-उदयपुर बने सियासी नर्सरी

राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े 20 से ज्यादा ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने पार्षद से राजनीतिक सफर शुरू कर विधायक या सांसद तक का मुकाम हासिल किया। जयपुर और उदयपुर नगर निगम इस मामले में सबसे आगे रहे हैं। जयपुर नगर निगम के पार्षद रहे मोहनलाल गुप्ता, सुरेंद्र पारीक, अशोक परनामी, अशोक लाहोटी और मानसिंह विधानसभा पहुंचे। इनमें मोहनलाल गुप्ता जयपुर नगर निगम के पहले महापौर भी रहे और किशनपोल से तीन बार विधायक बने। अशोक परनामी आदर्श नगर से दो बार विधायक रहे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी बने, जबकि अशोक लाहोटी सांगानेर से विधायक रहे, ज्योति खंडेलवाल ने महापौर रहने के बाद लोकसभा चुनाव लड़ा।

दूसरे निकायों से भी विधानसभा तक पहुंचे

अन्य निकायों से भी कई नेताओं ने विधानसभा तक का सफर तय किया। अजमेर की अनिता भदेल पार्षद और सभापति रहने के बाद लगातार पांच बार विधायक चुनी गईं। भरतपुर के विजय बंसल, बीकानेर के गोपाल जोशी और हनुमानगढ़ के गणेश राज बंसल ने भी पार्षद से विधायक तक का सफर तय किया। कांग्रेस में पुष्पा शर्मा, मनीषा पंवार और अमित चाचान जैसे नेता भी निकाय की राजनीति से विधानसभा पहुंचे। पार्षद रहते नेता जनता की रोजमर्रा की समस्याओं से सीधे रूबरू होता है और सदन में मुद्दे उठाने का व्यावहारिक अनुभव हासिल करता है।

उदयपुर से भी निकले बड़े चेहरे

  • भानु कुमार शास्त्रीः उदयपुर नगर परिषद में पार्षद रहे। बाद में उदयपुर से विधायक और सांसद बने।
  • किरण माहेश्वरीः उदयपुर नगर परिषद की सभापति रहीं। बाद में राजसमंद से तीन बार विधायक और मंत्री बनीं। सांसद भी रहीं।
  • फूल सिंह मीणाः उदयपुर नगर परिषद में पार्षद रहे। उदयपुर ग्रामीण से 2013, 2018 और 2023 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए।
  • ताराचंद जैनः उदयपुर नगर परिषद में पार्षद रहे। 2023 में उदयपुर शहर से भाजपा विधायक चुने गए।
  • त्रिलोक पूर्वियाः उदयपुर नगर परिषद में पार्षद रहे। 1998 में उदयपुर शहर से कांग्रेस के विधायक चुने गए।

 

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