Thursday, June, 18,2026

प्रभारी सचिवों को 25 दिनों में 4 बार अपने जिलों में जाना होगा

जयपुर: राज्य सरकार ने फील्ड-प्रशासन में जिला प्रभारी सचिवों की भूमिका और जिम्मेदारी काफी बढ़ा दी है। अब उन्हें सरकार के हर कार्यक्रम, अभियान और उत्सव की मॉनिटरिंग के लिए महीने में कई-कई बार अपने जिलों में जाना पड़ रहा है और आवश्यकतानुसार रात्रि विश्राम भी करना पड़ रहा है। प्रशासनिक सुधार विभाग के ताजा आदेशानुसार 16 जून से 10 जुलाई के बीच 25 दिनों में सभी प्रभारी सचिवों को अलग-अलग संदर्भमें चार बार अपने-अपने जिलों में जाना होगा।

प्रशासनिक सुधार विभाग की आज्ञा में अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) दिनेश कुमार ने सभी प्रभारी सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी दौरा रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में संपर्क पोर्टल पर अपलोड करेंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब प्रभारी सचिवों को 25 दिन की अल्प अवधि में चार-चार बार जिलों में भेजा जा रहा है। जानकारों के अनुसार शहरी और ग्रामीण शिविरों की सफलता के लिए सरकार का यह प्रयोग कारगर साबित हो सकता है। सचिवों की निरंतर मौजूदगी निश्चिततः स्थानीय प्रशासन को सक्रिय करेगी। गौरतलब है कि राजस्थान में व्यवस्था की सुदृढ़ प्रशासनिक निगरानी के उद्देश्य से वर्ष 2001  में प्रभारी जिला सचिव प्रणाली लागू की गई थी। शुरुआत में इसका मुख्य उद्देश्य सूखा व अकाल राहत कार्यों की निगरानी और बजट घोषणाओं की मॉनिटरिंग करना ही था। तब यह व्यवस्था केवल संकट प्रबंधन और बड़ी योजनाओं तक ही सीमित थी, लेकिन बाद में हर सरकार ने इसे प्रशासनिक ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया। यह माना गया है कि शासन सचिव व प्रमुख शासन सचिव स्तर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की फील्ड में मौजूदगी उपयोगी व लाभकारी होगी, हालांकि उन्हें अपने सचिवालय स्थित कार्यालयी कार्य और फील्ड वर्क में तारतम्य बैठाने के लिए मशक्कत करनी होगी।

  • 16 अथवा 17 जून को ग्रामीण और शहरी सेवा शिविरों के निरीक्षण के लिए एक दिवसीय दौरा।
  • 21 जून को योग दिवस कार्यक्रम में भाग लेना होगा। ग्रामीण व शहरी शिविरों का पुनः निरीक्षण तथा जिन जिलों में नीट का आयोजन होना है, वहां मॉनिटरिंग करनी होगी।
  • 1 अथवा 2 जुलाई को शिविरों के निरीक्षण के लिए एक दिवसीय दौरा।
  • 9 अथवा 10 जुलाई को शिविरों का निरीक्षण तथा समीक्षा बैठक के लिए एक दिवसीय दौरा।

प्रभारी सचिवों की मीटिंग में पुलिस अधिकारी क्यों नहीं?

प्रभारी सचिव जब जिलों में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं तो उसमें पुलिस का कोई भी छोटा-बडा अधिकारी नहीं आता है। जानकारों के अनुसार प्रत्यक्ष रूप से नहीं, लेकिन परोक्ष रूप से इन बैठकों में पुलिस की मौजूदगी व्यवहारिक व उपयोगी है। प्रोटोकॉल के लिहाज से भी यह उचित है। गौरतलब है कि बैठकों में आईएफएस अधिकारी मौजूद होते हैं। इस संबंध में कलेक्टर की ड्यूटी सबसे कठिन होती है। प्रभारी सचिव की हर बैठक में और पूरे समय उसे मौजूद रहना होता है। इसी दौरान जयपुर से भी कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो जाती है। तब कलेक्टर को दोहरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। प्रभारी सचिव के साथ कलेक्टर को प्रोटोकॉल की औपचारिकताएं भी पूरी करनी होती हैं।

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