Monday, April, 06,2026

द्रव्यवती नदी के बफर जोन पर असमंजस, JDA को 'राह' की तलाश

जयपुर: द्रव्यवती नदी को लेकर विकास की दिशा फिलहाल असमंजस में फंसी हुई है। नदी के दोनों किनारों पर कितनी दूरी तक निर्माण और अन्य गतिविधियों की अनुमति दी जाए, इसको लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के अधिकारी खुद दुविधा में हैं। यही कारण है कि जेडीए ने अब राज्य सरकार से स्पष्ट मार्गदर्शन मांगा है, ताकि नियोजित विकास को आगे बढ़ाया जा सके। करीब 48 किलोमीटर लंबी द्रव्यवती नदी भूतेश्वर महादेव से लेकर ढूंढ नदी तक बहती है। इस पूरे क्षेत्र में नदी के दोनों तरफ बड़ी पैमाने पर सरकारी और निजी भूमि स्थित है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन जमीनों पर विकास की अनुमति देने से पहले कितना बफर जोन तय किया जाए। अलग-अलग नियमों, नीतियों और कानूनी राय के चलते स्थिति पूरी तरह उलझी हुई है।

विधिक राय भी भिन्न-भिन्न

जेडीए के अधिकारियों के अनुसार टाउनशिप पॉलिसी, मास्टर प्लान 2025 और जोनल डवलपमेंट प्लान में बफर जोन को लेकर अलग-अलग प्रावधान हैं। इतना ही नहीं, समय-समय पर दी गई विधिक राय भी एक-दूसरे से भिन्न हैं। ऐसे में यह तय करना मुश्किल हो गया है कि आखिर किस नियम को आधार बनाया जाए।

कितनी दूरी पर हो विकास ? अलग-अलग नियम

  • जोनल डवलपमेंट प्लानः 30 मीटर बफर जोन
  • टाउनशिप पॉलिसी: 9 मीटर या अधिक (स्थिति अनुसार)
  • विधिक राय (2022): 150 फीट दूरी पर विकास संभव
  • विधिक राय (2025): 75 मीटर दूरी के बाद अनुमति
  • अन्य रायः पैरापेट दीवार से 30 मीटर दूरी जरूरी

समीक्षा बैठक में भी उठा था मुद्दा

हाल ही में जेडीए में आयोजित समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता के समक्ष यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। अधिकारियों ने बताया कि जब तक बफर जोन की स्पष्ट सीमा तय नहीं होती, तब तक किसी भी परियोजना को अंतिम मंजूरी देना जोखिम भरा है। मौजूदा स्थिति की बात करें तो मास्टर प्लान 2025 में नदी की न्यूनतम चौड़ाई 150 फीट रखने का प्रावधान है, जबकि अधिकतम चौड़ाई मौके की स्थिति या राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार तय की जानी है। वहीं हाई कोर्ट में भी इस मामले को लेकर सुनवाई जारी है और अंतरिम आदेश के तहत 150 से 210 फीट तक चौड़ाई रखने की बात कही गई है।

क्यों जरूरी है स्पष्ट मार्गदर्शन ?

  • विकास परियोजनाएं रुकी हुई हैं।
  • निवेश और प्लानिंग प्रभावित।
  • कानूनी विवाद की आशंका।
  • राजस्व प्राप्ति में देरी।
  • शहरी विकास की गति थीमी।

नदी के किनारे नई सुविधाएं विकसित करने की योजना

जेडीए की भवन मानचित्र समिति ने 26 फरवरी 2026 की बैठक में नदी के बाहरी किनारे से न्यूनतम 30 मीटर का बफर जोन रखना उचित माना है। इस सिफारिश को भी सरकार के पास भेजे गए प्रस्ताव में शामिल किया गया है। दरअसल, जेडीए नदी के किनारे रिक्रिएशनल गतिविधियों जैसे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, एम्यूजमेंट पार्क आदि विकसित करना चाहता है। इससे शहर के लोगों को नई सुविधाएं मिलेंगी।

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