Sunday, March, 15,2026

तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य मानवता का विकास होना चाहिए: देवनानी

बीकानेर: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में भले ही तकनीक प्रमुख भूमिका निभाती हो, लेकिन इसका अंतिम उद्देश्य मानवता का विकास होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल मशीनी ज्ञान पर निर्भर रहने के बजाय मौलिक चिंतन और मानवीय संवेदनाओं को विकसित करने का आह्वान किया। देवनानी शुक्रवार को बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग और जोधपुर आईआईटी केऔर तकनीकी चतुर्थ वीक्षा निदेशक डॉ. अविनाश अग्रवाल ने देवनानी को शिक्षा और समाज के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। देवनानी पहले स्पीकर है, जिन्हें स्पीकर रहते मानद उपाधि मिली है। समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के संदेश का भी वाचन किया गया। इस मौके पर खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत सहित कई गणमान्य लोग, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

विद्यार्थी नया सोचे, नया करे

दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को बधाई देते हुए देवनानी ने कहा कि हर विद्यार्थी नया सोचे, नया करे और नवाचार के माध्यम से समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए मानवता के कल्याण के लिए कार्य करे। उन्होंने तकनीकी संस्थानों को शोध और सामुदायिक भागीदारी पर अधिक ध्यान देने का सुझाव भी दिया।

23 विद्यार्थियों को दिए स्वर्ण पदक

समारोह में कुल 3380 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गई। इनमें 2588 बीटेक, 483 एमबीए, 242 एमसीए, 42 एमटेक, 12 बी डिजाइन, 4 बीआर्क तथा 9 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 23 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 166 को मेरिट प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा भारत

समारोह में आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश अग्रवाल ने कहा कि दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रही है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और क्वांटम तकनीक जैसी नई तकनीकें तेजी से बदलाव ला रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

शिक्षा का उद्देश्य सूचनाएं एकत्र करना नहीं, बल्कि चरित्र का निर्माण करना है

देवनानी ने ऋग्वेद के मंत्र 'आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें विश्व भर के श्रेष्ठ विचारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने ऋषि कणाद, आर्यभट्ट और कौटिल्य जैसे विद्वानों का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि कौशल विकास और व्यावहारिक ज्ञान ही 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने का सबसे बड़ा मंत्र है। देवनानी ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबों से सूचनाएं एकत्र करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मिक शक्ति का विकास है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण कराते हुए कहा कि शिक्षा वह है, जो मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाए और उसमें आत्मविश्वास जगाए।

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