Monday, March, 16,2026

जांच ने खोली 'पोल'... सिस्टम अब भी 'गोल'

जयपुर: राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में 5 अक्टूबर की रात 11:30 बजे जैसे ही ट्रोमा सेंटर ICU में स्टोर रूम से जलने की बदबू और आग की लपटें दिखाई दी, परिजनों ने तत्काल स्टाफ को सूचना दी, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सरकारी अस्पतालों की तैयारियों और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

दिसंबर में सरकार को सौंपी जा चुकी है हाई-लेवल जांच कमेटी की 31 पन्नों की रिपोर्ट बताती है कि लापरवाही की परतें एक-एक कर खुलती गईं। छह जिंदगियां बुझ गई, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, परिजनों ने रात 11:30 बजे स्टाफ को बताया कि ICU के स्टोर रूम में आग लगी है। एक वार्ड बॉय मौके पर पहुंचा, लेकिन स्टोर पर ताला लगा देखकर लौट गया। आग बढ़ती रही और धुआं ICU में भरता गया। इसी बीच ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग कर्मी उदयसिंह अपना ड्यूटी प्वाइंट छोड़कर रात 11:48 बजे काला बैग लेकर बाहर निकल गया। नर्सिंग कर्मी योगेश कुमार भी CCTV में बाहर जाते दिखाई दिए। अंदर परिजन अपने मरीजों को धुएं और आग के बीच घसीट-घसीटकर बाहर निकालने की जद्दोजहद करते रहे। कमेटी ने इसे 'काफी गंभीर प्रवृत्ति की लापरवाही' माना है। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि पहली शिकायत पर गंभीरता नहीं बरती गई और जब आग बेकाबू हुई तो मरीजों को बचाने की बजाय स्टाफ ने ड्यूटी पॉइंट छोड़ दिया।

रिपोर्ट दिसंबर में सौंप दी गई, कार्रवाई शून्य

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दिसंबर में रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई तो अब तक एक भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर डालकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा या निर्माण और प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी? छह जिंदगियां चली गई। परिजन आज भी पूछ रहे है, क्या उनकी चीखें सिर्फ रिपोर्ट के पन्नों में दबकर रह जाएंगी या जवाबदेही तय होगी?

नियमों की खुली अनदेखी

  • जांच रिपोर्ट ने सिर्फ उस रात की घटनाओं को ही नहीं, बल्कि ICU के निर्माण और संचालन की खामियों को भी उजागर किया है।
  • ICU में केवल एक एंट्री-एग्जिट, कोई अलग फायर सेफ्टी एग्जिट नहीं।
  • 12 बेड वाले ICU में बेड्स के बीच 3.5 मीटर की जगह के बजाय महज 1-1.5 मीटर दूरी।
  • अग्निरोधी पदों की जगह एल्युमिनियम पार्टीशन।
  • प्रति बेड क्षेत्रफल 15.52वर्ग मीटर, जबकि IPHS मानकों के अनुसार 25-30 वर्ग मीटर आवश्यक।
  • आने-जाने का रास्ता एक ही दिशा में, स्प्रिंग-लोडेड फ्लैप डोर तक नहीं।
  • कमेटी ने सवाल उठाया है कि देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों में गिने जाने वाले एसएमएस में यदि NHM और IPHS गाइडलाइंस की अनदेखी होगी तो जवाबदेह कौन है? एल्युमिनियम पार्टीशन लगाने का निर्णय किस स्तर पर हुआ?

सिस्टम पर सवाल, मंत्री पर दबाव

रिपोर्ट दो महीने से फाइलों में दबी है। सूत्रों के अनुसार इसे दिसंबर में ही सौंप दिया गया था। प्रशासन का दावा है, 'प्रक्रिया जारी है।' लेकिन सवाल कायम है, इतनी बड़ी लापरवाही पर अब तक कोई निलंबन या विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं? क्या चिकित्सा मंत्री
गजेंद्र सिंह खींवसर रिपोर्ट पर सख्त कार्रवाई करेंगे या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा? चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि रिपोर्ट मिल चुकी है और शीघ्र अवलोकन कर कार्रवाई की जाएगी।

जिम्मेदारों की सूची खुली, अब भी 'एक्शन' का इंतजार

  • तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान की अध्यक्षता वाली कमेटी ने एक-एक नाम लेकर जिम्मेदारी तय की है।
  • मेसर्स एस. के. इलेक्ट्रिकल-फायर डिटेक्शन और फायर फाइटिंग का पूरा ठेका। डिटेक्शन सिस्टम फेल, फायर फाइटिंग सिस्टम काम नहीं किया। कमेटी ने इसे 'आपराधिक कृत्य' माना।
  • ICU वास्तुकार (PWD)-निर्माण SOP के खिलाफ। सिर्फ एक रास्ता, कोई फायर एग्जिट नहीं।
  • दीनदयाल अग्रवाल, नर्सिंग इंचार्ज इमरजेंसी में स्टोर की चाबी तक उपलब्ध नहीं। सूचना तंत्र फेल।
  • उदयसिंह, योगेश कुमार और नर्सिंग स्टाफ आग की सूचना मिलने के बावजूद अग्निशमन या उच्चाधिकारियो को सूचित नहीं किया। ड्यूटी छोड़कर बाहर चले गए।
  • गंगालाल, नर्सिंग अधीक्षक फायर सेफ्टी फर्म की मॉनिटरिंग नहीं की, गलत प्रमाण-पत्र जारी किए।
  • मुकेश सिंघल, XEN (विद्युत), PWD- शॉर्ट सर्किट से आग लगी। बार-बार सूचना के बावजूद विद्युत सिस्टम अपडेट नहीं किया।
  • गोपाल कृष्ण दशोरा, अस्पताल अभियंता, एसएमएस- बिजली उपकरणों की मरम्मत और अग्निशमन प्रणाली के रखरखाव में विफल।
  • अशोक सिंघल, XEN (सिविल), PWD- सीपेज रोकने के लिए पत्रों के बावजूद कार्रवाई नहीं। निरीक्षण में जगह-जगह पानी का रिसाव मिला।
  • तत्कालीन अधीक्षक/नोडल अधिकारी- मॉनिटरिंग पूरी तरह विफल। घटना के तुरंत बाद हटाए गए।
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