Saturday, April, 05,2025

भाजपा, विहिप ने मंदिरों को वक्फ बोर्ड से बाहर निकालने की उठाई मांग

जयपुर सरकार के वक्फ की संपत्तियों को लेकर करवाए सर्वे में 69 मंदिरों के होने की जानकारी के बाद भाजपा और विहिप नेताओं ने इन संपत्तियों को वक्फ से बाहर करने की मांग उठाई हैं। भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य और विहिप के जयपुर प्रांत संगठन मंत्री राधेश्याम गौतम ने कहा कि ऐसी वक्फ की संपत्तियां जहां मंदिर है, उन्हें वक्फ से बाहर निकाली जानी चाहिए। इधर कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रफीक खान ने सरकार के सर्वे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जो भी निर्णय किया जाए, वो 1956 के रवेन्यू रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए।

 कई वर्षों से मंदिर, मठ आदि को बचाने के लिए निरंतर आवाज उठाता रहा हूं। भारतीय सनातन संस्कृति, मंदिर, मठ और इनकी भूमि को बचाना अपनी संस्कृति और परम्पराओं का बचना है। मुगलकाल में मंदिर तोड़े ही गए थे। कांग्रेस काल में भी ऐसा ही हुआ कि मंदिर, मठ, बावड़ियां, कुएं और सार्वजनिक चौक पर किसी न किसी बोर्ड, एक समुदाय के लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। इसलिए उन स्थानों का सर्वे होना चाहिए। जहां पर मंदिर, मठ, प्राचीन बावड़िया, कुएं और सार्वजनिक चौकों पर कब्जे कर लिए हैं, उन्हें निरस्त करते हुए फिर से वहां उन्हीं का विकास किया जाना चाहिए।     -

बालमुकुंदाचार्य महाराज, विधायक
वक्फ बोर्ड के पास किसी भी संपत्ति की ऑनर शिप नहीं होती है। 1956 में फ्रस्ट सेटलमेंट के तहत राजस्व रिकॉर्ड तैयार किया गया था, उसी के आधार पर संपत्तियों के रिकॉर्ड तैयार किए गए थे। किसी भी तरह की संपत्ति का मामला हो, फैसला राजस्व रिकॉर्ड के हिसाब से होना चाहिए।

 
रफीक खान, कांग्रेस विधायक दल सचेतक

ऐसे मंदिरों की पूरी जानकारी एकत्रित कर सरकार को अगर लोकसभा या न्यायालय में जाने की जरूरत पड़े तो जाना चाहिए। देश में ऐसे बोर्ड के नियम-कानूनों में समय-समय पर बदलाव व सुधार की जरूरत है। इसे भी करना आवश्यक है। वक्फ बोर्ड में जगह-जगह से नियम-कानूनों में सुधार की मांगें की जा रही है, सरकार जो प्रस्ताव लाई है वह न्यायोचित है। 

राधेश्याम गौतम, मंत्री जयपुर प्रांत, विहिप
देवस्थान विभाग या वक्फ बोर्ड की स्थिति लगभग समान है। दानदाताओं द्वारा दी गई जमीनों से इनकी अहमियत आंकी जाती है। जयपुर की एमआई रोड को राजा ने मिर्जा इस्माइल को दिया था। टोंक नवाब को दी जमीन उन्होंने वक्फ बोर्ड को दे दी। कहने का तात्पर्य है कि ये जमीनें राजा महाराजाओं की ओर से किसी व्यक्ति विशेष को दी गई जमीनें हैं। इससे हम इनकार नहीं कर सकते हैं। उस जमाने में जो जमीनें दान कर दी गई। कम से कम उनका टाइटल देखकर काम होना चाहिए। अब हो रहा है उसमें केवल वोट और धर्म की राजनीति है। 
 

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