Monday, March, 16,2026

दो से अधिक संतान वाले भी अब लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव

जयपुर: राजस्थान विधानसभा ने सोमवार को बहस के बाद राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन के साथ ही पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव लड़ने के लिए लागू दो बच्चों की बाध्यता समाप्त हो गई है। अब दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति भी वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति, जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव लड़ सकेंगे। यह संशोधन राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 19 में किया गया है।

करीब 31 वर्ष पहले तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार ने तेजी से बढ़ती जनसंख्या दर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता लागू की थी। पंचायतीराज संशोधन विधेयक को 5 मार्च को विधानसभा में पेश किया गया था। पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि अब महिलाओं में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता बढ़ने से जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है, इसलिए यह नियम अप्रासंगिक हो गया था। विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।

संशोधन से बड़ा बदलाव

इस संशोधन के बाद पंचायतीराज राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब तक जो नेता दो से अधिक बच्चों के कारण चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाते थे, उन्हें दोबारा मौका मिलेगा। इससे आने वाले पंचायत चुनावों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और स्थानीय राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।

आज होगा शहरी निकाय में भी संशोधन

राज्य सरकार मंगलवार को शहरी निकाय चुनावों में भी दो बच्चों की बाध्यता समाप्त करने के लिए राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक को सदन में पारित कराने की तैयारी में है। यदि यह विधेयक भी पारित हो जाता है तो पंचायतों के साथ-साथ नगर निकायों के चुनावों में भी दो बच्चों की बाध्यता समाप्त हो जाएगी।

सरकार शेखावत का कर रही अपमानः डोटासरा

विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से बनाए गए दो बच्चों के कानून को खत्म कर उनका अपमान कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत नहीं रह गई है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं को चुनाव लड़ाने के लिए सरकार जल्दबाजी में यह संशोधन बिल लेकर आई है।

अजमेर में आयुर्वेद-योग विवि का रास्ता साफ

राजस्थान विधानसभा ने सोमवार को राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक-2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही अजमेर में 38 वर्ष बाद दूसरे राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह विश्वविद्यालय स्थापित होना उनका सपना साकार होने जैसा है। उपमुख्यमंत्री एवं आयुर्वेद मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि यह विश्वविद्यालय आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई मजबूती देगा।

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