Tuesday, April, 28,2026

बोर्ड 36 बीघा पर कब्जा लेने की कार्रवाई करेगा शुरू

जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ ने श्रीराम कॉलोनी-वी प्रकरण में राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने बोर्ड की याचिका स्वीकार कर ली और सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ बोर्ड अब वर्ष 1991 में अधिग्रहित 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि में से लगभग 36 बीघा जमीन पर कब्जा लेने का अधिकारी हो गया है। बाजार मूल्य के अनुसार यह जमीन 2200 करोड़ रुपए से अधिक की है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की ओर से ग्राम चैनपुरा और दुर्गापुरा की 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि का अधिग्रहण वर्ष 1989 में शुरू होकर 1991 में कब्जा प्राप्ति और 1993 में अवार्ड पारित होने के साथ पूर्ण हुआ था। यह पूरी प्रक्रिया कानून सम्मत है। इसलिए यह भूमि बोर्ड की अधिग्रहित संपत्ति है और बोर्ड इस पर आगे की कार्रवाई करने के लिए पूर्ण रूप से अधिकृत है।

सहकारी समिति का 1981 का विक्रय अनुबंध प्रारंभसे ही शून्य

न्यायालय ने जवाहरपुरी गृह निर्माण सहकारी समिति द्वारा वर्ष 1981 में किए गए कथित विक्रय अनुबंध को "ab initio void" (प्रारंभ से ही अवैध और शून्य) घोषित किया। इस आधार पर समिति या उसके किसी भी सदस्य का भूमि पर कोई अधिकार या नियमितीकरण का दावा मान्य नहीं होगा। पांच भूखंडधारकों (इंदुबाला जैन, ज्योति देवी, राधेश्याम, सुरेश चंद्र पाल और रामकिशन) द्वारा दायर याचिकाओं के दावे भी खारिज हो गए हैं।

35 वर्षों की कानूनी लड़ाई

राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने 2 सितंबर 1989 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। 4 जनवरी 1991 को अर्जेसी क्लॉज के तहत अधिसूचना जारी हुई और बोर्ड को कब्जा सौंप दिया गया। 30 जुलाई 1993 को अवार्ड पारित कर मुआवजा तय किया गया, जिसे खातेदारों ने स्वीकार नहीं किया। बोर्ड ने 17 अगस्त 1993 को पूरी राशि सिविल जज, जयपुर के कोर्ट में जमा करा दी। इसके बावजूद जवाहरपुरी गृह निर्माण सहकारी समिति ने 1981 के कथित विक्रय अनुबंध के आधार पर दावा किया। जेडीए ने 1995 में श्रीराम विहार-बी योजना अनुमोदित की, लेकिन बाद में निरस्त कर दिया। पांच सदस्यों ने निर्माण शुरू किया, जिस पर बोर्ड ने आपत्ति जताई। उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में लंबी लड़ाई चली। सुप्रीम कोर्ट ने 2018-19 में कुछ निर्देश दिए, लेकिन बोर्ड को नई याचिका दायर करने की छूट दी। जुलाई 2019 में दायर याचिका संख्या 155776/2019 पर अब निर्णायक फैसला आ गया है।

खातेदारों को मुआवजा लेने की पूरी छूट

तत्कालीन खातेदारों को न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वे बोर्ड द्वारा सिविल न्यायालय में जमा किए गए मुआवजे (7 करोड़ 79 लाख 8 हजार 841 रुपए) को प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि राज्य सरकार कोई अतिरिक्त मुआवजा देती है तो उसे स्वीकार करने का भी उन्हें अधिकार होगा।

अब आगे क्याः बोर्ड भूमि पर कब्जे की कार्रवाई कर सकता है शुरू

कानून विशेषज्ञों की माने तो लगभग 36 बीघा भूमि (6) बीघा सड़क वाले हिस्से को छोड़कर) अब हाउसिंग बोर्ड के कब्जे में आ जाएगी। बोर्ड इस जमीन को आवासीय और वाणिज्यिक भूखंडों के रूप में विक्रय कर सकता है। इससे बाजार भाव के अनुसार 2200 करोड़ रुपए से अधिक राजस्व की संभावना है। अदालत का लिखित आदेश प्राप्त कर बोर्ड के अधिकारी आगामी दिनों में हाउसिंग बोर्ड को भूमि पर कब्जा लेने और विकास कार्य शुरू करने के लिए बोर्ड की ओर से प्रमुख कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। इसकी शुरुआत सबसे पहले तत्काल उच्च न्यायालय में कैविएट दायर करने से हो सकती है।

भूमि पर कब्जा लेने के लिए बोर्ड को उठाने होंगे ये पांच प्रमुख कदम

  • उच्च न्यायालय में कैविएट दायर करनाः बोर्ड को तत्काल उच्च न्यायालय में कैविएट दायर करनी चाहिए, ताकि यदि कोई पक्षकार अपील दायर करता है तो बोर्ड को सुनवाई का पूरा अवसर मिल सके।
  • बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई: तत्काल प्रभाव से पूरे क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की व्यापक कार्रवाई शुरू की जाए। इसमें जेडीए की प्रवर्तन शाखा और स्थानीय पुलिस का सहयोग लिया जाए।
  • योजना संशोधित कर नीलामी प्रक्रिया शुरू करनाः भूमि की वर्तमान स्थिति के अनुसार आवासीय योजना को संशोधित किया जाए। चयनित आवासीय एवं वाणिज्यिक भूखंडों की नीलामी शीघ्र शुरू कर भूमि का उपयोग प्रारंभकिया जाए।
  • भूमि की सुरक्षा और अवसंरचना विकासः अतिक्रमण हटाने के साथ ही भूमि की चारदीवारी या तारबंदी कर सुरक्षा तय की जाए। आस-पास के क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़क अवसंरचना का विकास किया जाए।
  • जेडीए से 6 बीघा भूमि का मूल्य वसूलनाः राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को जेडीए से उस 6 बीघा भूमि का मूल्य भी वसूल करने की कार्रवाई करनी चाहिए, जिसका उपयोग जेडीए ने बोर्ड की अनुमति के बिना बी-टू बाईपास सड़क निर्माण के लिए किया था।

 

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