Monday, March, 16,2026

जीरो-नेगेटिव अंक प्राप्त अभ्यर्थी कैसे हो सकता है उपयुक्त

जयपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 में न्यूनतम कटऑफ न रखने और कुछ श्रेणियों में 0.0033 अंक पर चयन होने के मामले में गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि शून्य या नकारात्मक अंक प्राप्त अभ्यर्थी को सरकारी पद पर उपयुक्त कैसे माना जा सकता है।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह टिप्पणी विनोद कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने प्रमुख कार्मिक सचिव से शपथ पत्र दाखिल कर ऐसी स्थिति उत्पन्न होने के कारण तथा सुधार के उपाय बताने को कहा है। याचिकाकर्ता विनोद कुमार ने ओबीसी वर्ग में पूर्व सैनिक श्रेणी से आवेदन किया था। लिखित परीक्षा में उनके 0.65 अंक आए, लेकिन परिणाम में उन्हें चयन से बाहर कर दिया गया। अधिवक्ता हरेंद्र नील ने अदालत को बताया कि भर्ती विज्ञप्ति और सेवा नियमों में न्यूनतम अंक निर्धारित नहीं थे। उनकी श्रेणी में कटऑफ 0.0033 रही, जबकि सैकड़ों पद खाली हैं। ऐसे में नकारात्मक अंक वाले अभ्यर्थी को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए, क्योंकि जीरो और माइनस अंक में योग्यता का कोई अंतर नहीं है।

53 हजार 749 पदों पर हुई थी भर्ती

दरअसल, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने 53 हजार 749 पदों के लिए यह भर्ती निकाली थी। परीक्षा 19 से 21 सितंबर 2025 तक हुई, जिसमें 21 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। परिणाम 16 जनवरी को जारी हुआ। इस प्रक्रिया में आरक्षित श्रेणियों में बेहद कम कटऑफ आने से विवाद खड़ा हुआ।

विभागों द्वारा जिम्मेदारी टालने पर नाराजगी

सुनवाई में प्रशासनिक सुधार विभाग ने कहा कि उनका दायित्व केवल सफल अभ्यर्थियों को विभाग आवंटित करना है। नियम बनाने और न्यूनतम योग्यता तय करने का कार्य कार्मिक विभाग व कर्मचारी चयन बोर्ड का है। इस पर कोर्ट ने असंतोष जताया कि विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। अदालत ने कहा कि संबंधित विभाग के प्रमुख शासन सचिव का शपथ पत्र मांगा गया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अंतिम मौका देते हुए दो सप्ताह में उचित शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए, अन्यथा सख्त कार्रवाई होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को आरक्षित श्रेणियों में भी न्यूनतम मानक सुनिश्चित करने होंगे, ताकि सार्वजनिक सेवा की गुणवत्ता बनी रहे। मामले में अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।

सरकारी सेवा में बेसिक स्टैंडर्ड जरूरी

कोर्ट ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी का पद होने पर भी सरकारी सेवा में बेसिक स्टैंडर्ड जरूरी है। अभ्यर्थी को बुनियादी कर्तव्य संतोषजनक ढंग से निभाने में सक्षम होना चाहिए। अदालत ने दो संभावनाएं जताई- या तो परीक्षा स्तर अनावश्यक रूप से कठिन था या मानक जानबूझकर इतने नीचे रखे गए कि योग्यता का महत्व ही समाप्त हो गया। दोनों स्थितियां अस्वीकार्य हैं। सरकार ने न्यूनतम अंक न रखने का कोई ठोस कारण नहीं बताया।

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