Monday, August, 03,2026

मानसून की सुस्ती से सूखे जलाशय, प्यासे पड़े बांध

जयपुर: मानसून का पहला महीना बीत चुका है, लेकिन राजस्थान के बांधों की तस्वीर उम्मीदों के उलट नजर आ रही है। जुलाई में प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश के बावजूद अधिकांश जलाशय अब भी प्यासे हैं। राज्य के 693 बांधों में कुल जलभराव क्षमता का केवल 47.87% पानी ही पहुंच पाया है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 75.55% था यानी महज एक साल में जलभराव में करीब 28% की गिरावट दर्ज हुई है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगस्त में भी सामान्य से कम बारिश और सामान्य से अधिक गर्मी की आशंका जताई है। ऐसे में पेयजल, सिंचाई और भूजल पुनर्भरण को लेकर चिंता गहराने लगी है। राज्य के सभी बांधों की कुल जल भंडारण क्षमता 13,029.09 एमसीयूएम है, लेकिन इनमें फिलहाल केवल 6,237.46 एमसीयूएम पानी उपलब्ध है। यदि अगस्त में भी मानसून ने साथ नहीं दिया तो आने वाले महीनों में कई जिलों में पानी का संकट गहरा सकता है।

बीसलपुर में इनफ्लो शून्य

राजधानी जयपुर सहित अजमेर और टोक के लोगों की प्यास बुझाने वाला बीसलपुर बांध इस बार सबसे अधिक चिंता का कारण बना हुआ है। 1095.84 एमसीयूएम क्षमता वाले इस बांध में फिलहाल 718.87 एमसीयूएम (65.60%) पानी है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 1056.05 एमसीयूएम तक पहुंच गया था। 31 जुलाई को बांथ में इनफ्लो शून्य दर्ज किया गया यानी बांध में नया पानी भी नहीं पहुंचा।

जयपुर क्षेत्र के बांध भी नहीं दे रहे राहत

राजधानी जयपुर क्षेत्र के जलाशयों की स्थिति भी ज्यादा संतोषजनक नहीं है। जयपुर जल संसाधन जोन के 186 बांधों में औसत जलभराव केवल 48.05% है, जबकि पिछले वर्ष यह 77.06% था। शहर का ऐतिहासिक रामगढ़ बांध पूरी तरह सूखा पड़ा है। वहीं छापरवाड़ा बांध में मात्र 14.57% तथा कालाख सागर में केवल 2.01% पानी बचा है। हालांकि कनोता बांध और दौसा का मोरेल बांध पूरी क्षमता तक भरे हुए हैं, लेकिन राजधानी क्षेत्र की बढ़ती जल जरूरतों के मुकाबले यह राहत बेहद सीमित मानी जा रही है।

हर तीसरा बांध खाली, केवल 13 हुए लबालब

प्रदेश के जलाशयों की समग्र तस्वीर भी चिंताजनक है। 693 बांधों में से 253 पूरी तरह खाली पड़े हैं। इनमें 62 बड़े एवं मध्यम तथा 191 छोटे बांध शामिल हैं। दूसरी ओर केवल 13 बांथ ही पूरी क्षमता तक भर पाए हैं, जबकि 427 बांध आंशिक रूप से भरे हैं। इससे स्पष्ट है कि मानसून की बारिश का बड़ा हिस्सा अभी जलाशयों तक नहीं पहुंच पाया है और अधिकांश कैचमेंट क्षेत्रों में पर्याप्त बहाव नहीं बन सका।

बड़े बांध भी उम्मीद से पीछे

प्रदेश के 23 प्रमुख बांथों में औसत जलभराव 57.72 प्रतिशत है। इनमें कोटा बैराज (96.43%), जवाहर सागर (70.28%), राणा प्रताप सागर (66.89%) और सोम-कमला-अंबा (67.99%) अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं। इसके विपरीत जवाई (27.16%), इसरदा (31.24%), सरदारसमंद (31.26%) और परवती बांध (35.97%) अब भी सामान्य स्तर से काफी पीछे चल रहे हैं।

जुलाई ने भी तोड़ी उम्मीदें

मानसून का पहला महीना भी राजस्थान के लिए उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। पूरे जुलाई में 31 दिनों में से 6 दिन प्रदेश में बारिश नहीं हुई। महीनेभर में कुल 139 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जबकि सामान्य औसत 205.89 मिमी है। यानी जुलाई में करीब 32.5% कम बारिश हुई। वर्ष 2016 के बाद जुलाई का यह सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है।

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