Sunday, April, 26,2026

सिस्टम की जंग में फंसा नेशनल हाईवे...

जयपुर: नेशनल हाईवे-48 का अचरोल हिस्सा आज सड़क नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का निंदा दस्तावेज बन चुका है। छह लेन का हाई-स्पीड कॉरिडोर यहां आकर अव्यवस्था, अतिक्रमण और अनियंत्रित ट्रैफिक के बीच दम तोड़ता नजर आता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन JDA की, सड़क NHAI की और नियंत्रण पुलिस का है तो आखिर जिम्मेदार कौन है? और इसी सवाल को और गहरा करती है जयपुर पुलिस की 'लेन सिस्टम' नीति। सीकर और अजमेर रोड पर इसकी मौजूदगी दिखती है, लेकिन दिल्ली रोड, जहां अचरोल आता है, वहां यह सिस्टम जैसे लागू ही नहीं हुआ। यानी नियम हैं, लेकिन जगह देखकर लागू किए जा रहे हैं।

लेन सिस्टम नियम या दिखावा ?

जयपुर पुलिस ने हाल ही में हाईवे पर लैन सिस्टम लागू किया। दावा था कि इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और ट्रैफिक अनुशासित होगा, लेकिन हकीकत में यह 'आधा-अधूरा प्रयोग' बनकर रह गया। सीकर रोड और अजमेर रोड पर पुलिस की मौजूदगी और नियंत्रण दिखता है, लेकिन दिल्ली रोड पूरी तरह इस दायरे से बाहर है।

सड़क का उपयोग, मुद्दे पर चुप्पी

अचरोल जयपुर ग्रामीण लोकसभा और आमेर विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां के जनप्रतिनिधि इस सड़क का नियमित उपयोग करते हैं। इसके बावजूद न तो कोई अतिक्रमण हटाओ अभियान चला, ना ही ट्रैफिक सुधार के लिए कोई ठोस पहल दिखी। यह चुप्पी सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि जवाबदेही से बचने का संकेत भी मानी जा रही है।

समन्वय की कमीः कोई जिम्मेदार नहीं

इस पूरे मामले में JDA, NHAI, पुलिस और जिला प्रशासन चारों की भूमिका है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन सभी के बीच समन्वय लगभग शून्य है। परिणाम यह है कि हर एजेंसी अपने हिस्से की जिम्मेदारी से बचती है और समस्या 'सिस्टम गैप' में फंसकर और बड़ी हो जाती है।

NHAI: नियम तय, लेकिन पालन गायब

NH-48 का निर्माण और स्सारखाव NHAI के जिम्मे है। राइट ऑफ वे (ROW) के तहत 60-60 मीटर तक निर्माण प्रतिबंधित है, जिसे कई मामलों में 75 मीटर तक माना गया है, लेकिन अचरोल में यह नियम पूरी तरह ध्वस्त नजर आते हैं। सड़क के किनारे निर्माण, सर्विस लेन का खत्म होना और अनाधिकृत मीडियन कट सब कुछ खुलेआम हो रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि यह सब लंबे समय से हो रहा है, यानी निगरानी या तो नहीं है या जानबूझाकर नजर अंदाज की जा रही है।

शहर तक सीमित सोच, हाईवे बेसहारा

जेडीए ने ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड बनाया, लेकिन उसकी सक्रियता जयपुर शहर तक सीमित रखी गई। सवाल यह है कि जब सीमा अचरोल तक जाती है, तो ट्रैफिक मैनेजमेंट शहर की सीमा पर क्यों रुक जाता है? हाईवे पर न तो कोई स्मार्ट मॉनिटरिंग है, ना ही ट्रैफिक फ्लो को कंट्रोल करने का कोई सिस्टम।

तय करनी ही होगी अब जवाबदेही

अचरोल का NH-48 अब सिर्फ एक खराब सड़क नहीं, बल्कि सिस्टम की परीक्षा बन चुका है। जब तक JDA अतिक्रमण पर सख्ती नहीं दिखाएगा, NHAI अपने नियम लागू नहीं करेगा, पुलिस समान रूप से प्रवर्तन नहीं करेगी और जनप्रतिनिधि दबाव नहीं बनाएंगे, तब तक हालात नहीं बदलेंगे। यह हाईवे अब फैसले की मांग कर रहा है-कौन जिम्मेदार है, और कौन जिम्मेदारी लेगा?

कागजों में नियंत्रण, जमीन पर कब्जे

अचरोल क्षेत्र JDA के नियोजन क्षेत्र में आता है। कानून इसे भूमि उपयोग नियंत्रण, अतिक्रमण हटाने और विकास प्रबंधन की पूरी ताकत देता है, लेकिन जमीनी सच्चाई बिल्कुल उलट है। हाईवे के किनारे होटल, ढाबे, दुकानों और गोदामों का अनियंत्रित फैलाव साफ दिखता है। सर्विस लेन, जो लोकल ट्रैफिक के लिए होनी चाहिए, कई जगह गायब है या कब्जे में है।

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