Sunday, June, 14,2026

मदरसा बोर्ड सचिव ने चेयरमैन के खिलाफ FIR लिखाई कोर्ट स्टे से काबिज चेयरमैन ने CS से की शिकायत

जयपुर: राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स में टकराव और परस्पर आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है। आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन टकराव का एक ताजा मामला रोचक व गंभीर है। मामला मदरसा बोर्ड के राजनीतिक चेयरमैन एम.डी. चोपदार और बोर्ड के सचिव आरएएस अधिकारी चेतन चौहान के टकराव का है।

यह टकराव इस चरम तक जा पहुंचा है कि सचिव चौहान ने चेयरमैन के खिलाफ दो दिन पहले 18 मई को बजाज नगर थाने में बाकायदा एफआईआर (नं. 162/2025) दर्ज करवाई है। इसमें लिखा है- "एम.डी. चोपदार के उकसाने के बाद बोर्ड के समस्त कर्मचारीगण द्वारा प्रार्थी के साथ अहसयोग करते हुए कार्यालय में नकारात्मक माहौल बनाया हुआ है, जिससे प्रार्थी के साथ अप्रिय घटना हो सकती है। चेयरमैन अपने निजी सचिव गोविंद भारद्वाज को मेरे खिलाफ आगे किए हुए हैं। कार्यालय में कानून व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल संभावना है, अतः आवश्यक कार्रवाई करें।" उधर, चेयरमैन चोपदार ने 13 मई को मुख्य सचिव को चेतन चौहान के खिलाफ शिकायती पत्र लिखा है- "सचिव चेतन चौहान समस्त वित्तीय लेनदेन अपने स्तर पर कर रहे हैं। कर्मचारियों को बिना कारण परेशान करते हैं, जिससे समस्त कर्मचारी मानसिक रूप से परेशान हैं। चेयरमैन से बिना पूछे जिलों में शिक्षा अनुदेशकों का समायोजन कर रहे हैं।" गंभीर बात तो यह है कि चेयरमैन चोपदार ने मीडिया में सचिव चौहान के खिलाफ यहां तक कह दिया है कि "सचिव की मानसिक हालत बिल्कुल खराब है। चाकू व हाकी लेकर दफ्तर में आते हैं और जान का खतरा है।

सचिव महिला कर्मचारियों को देर रात तक ऑफिस में रुकने का दबाव बनाते हैं।" उधर, सचिव चौहान ने भी कई तथ्य उजागर किए हैं- पिछली सरकार में प्रदेशभर के 3699 मदरसों के 5220 शिक्षा अनुदेशकों तथा लगभग 350 अन्य कर्मियों को बोर्ड में नियुक्तियां दी गई थीं। चेयरमैन को नियुक्ति आदेश जारी करने की पावर नहीं है। फिर भी 2023 के विधानसभा चुनावों से पूर्व चेयरमैन ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर नियुक्ति आदेश जारी कर दिए। जांच में कई खामियां अब सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि पिछली कांग्रेस सरकार ने जनवरी 2023 में एम.डी. चोपदार को बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया था, लेकिन भाजपा सरकार ने जून 2024 में इन्हें पद से हटा दिया था। इस पर चोपदार हाई कोर्ट से स्टे ले आए और इसी स्टे के तहत पुनः कुर्सी पर आज भी काबिज हैं। 2010 बैच के आरएएस अधिकारी चेतन चौहान को सरकार ने सितंबर 2024 में बोर्ड का सचिव नियुक्त किया था। जानकारों के अनुसार, दरअसल पहले दिन से ही सचिव की चेयरमैन के साथ पटरी नहीं बैठी। चौहान ने बोर्ड में प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करने की मुहिम छेड़ दी। हाल ही 10 मई को भी सचिव ने 17 कर्मचारियों को रूल 17 सीसीए के नोटिस थमाए हैं। साथ ही चेयरमैन के निजी सचिव गोविंद भारद्वाज के खिलाफ तो बजाज नगर थाने में 1 और 18 मई को दो-दो एफआईआर दर्ज करवाई हैं। बोर्ड के कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व अल्पसंख्यक विभाग के सचिव को चेतन चौहान के खिलाफ लंबे-लंबे शिकायती पत्र लिखे हैं। 14 वर्ष की सर्विस में चेतन अब तक एक बार सस्पेंड और 3 बार एपीओ हो चुके हैं। कुल मिलाकर मदरसा बोर्ड में हालात गंभीर व चिंताजनक हैं। नौबत कानून-व्यवस्था बिगड़ने तक की आ गई है।

पोकरण एसडीएम व तहसीलदार को नहीं मिली हाई कोर्ट से राहत

जैसलमेर कलेक्टर के खिलाफ शिकायतें करने वाले पोकरण के एसडीएम प्रभजोत सिंह गिल और पोकरण के तहसीलदार विश्व प्रकाश चारण को हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को कोर्ट ने दोनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। सरकार ने 10 दिन पहले प्रभजोत का ट्रांसफर नागौर और विश्व प्रकाश का बारां कर दिया था। अपने ट्रांसफर के खिलाफ ये अधिकारी सीधे हाई कोर्ट जा पहुंचे थे।

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