Saturday, July, 25,2026

ACB ने मांगी सुबोध और महेश के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति

जयपुर: जल जीवन मिशन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल और पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी है। दोनों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किए जाने के बाद एसीबी ने यह प्रक्रिया शुरू की है। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद ही अदालत में मामले की आगे की सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इस बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले में एसीबी की जांच में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, नियमों के उल्लंघन और निजी व्यक्तियों व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी ने मामले में कई आरोपियों के खिलाफ पहले ही न्यायालय में चालान पेश कर रखा है।

रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (पीएचईडी) सुबोध अग्रवाल के खिलाफ एसीबी ने कोर्ट में करीब 17,500 पन्नों का विस्तृत चालान पेश किया था। जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्रों के आधार पर करीब 979.27 करोड़ रुपए के टेंडर प्राप्त किए गए। जांच में विभागीय अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के तथ्य सामने आने का दावा किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ निविदाओं में नियमों के विपरीत शर्तें शामिल की गई, जिससे टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई और राज्य को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।

महेश जोशी और संजय बड़ाया के खिलाफ भी पेश किया चालान

मामले में एसीबी ने पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी और निजी व्यक्ति संजय बड़ाया के खिलाफ भी विशेष अदालत में चालान पेश किया है। यह चालान करीब 3,000 पन्नों का बताया गया है। जांच में एसीबी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, विभागीय अधिकारियों, संवेदकों और निजी व्यक्तियों के बीच मिलीभगत से 50 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले मेजर प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में नियमों के विपरीत शर्ते शामिल की गई। एसीबी के अनुसार, साइट विजिट प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता के कारण बोलीदाताओं की पहचान उजागर हुई, जिससे टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई और कई मामलों में असामान्य रूप से अधिक टेंडर प्रीमियम प्राप्त हुए।

पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ पेश हो चुका है चालान

इस मामले में एसीबी पूर्व में दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, निरिल कुमार, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डी. के. गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी और मुकेश पाठक सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी है। मामले में कई आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं, अरुण श्रीवास्तव को राजस्थान हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है और जितेंद्र शर्मा सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर हैं। मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हैं।

क्या होती है अभियोजन स्वीकृति और क्यों है जरूरी ?

किसी लोकसेवक के खिलाफ अदालत में चालान पेश करने के बाद अभियोजन स्वीकृति लेना कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सरकारी कर्मचारी या पद पर रहते हुए कार्य करने वाले लोकसेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सक्षम सरकार या अधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार के समय महेश जोशी मंत्री और सुबोध अग्रवाल वरिष्ठ लोकसेवक के पद पर थे, इसलिए उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए अभियोजन स्वीकृति आवश्यक है।

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