Tuesday, April, 28,2026

2200 करोड़ की जमीन पर कब्जे में देरी, अब ASG से ली गई राय

जयपुर: बी-2 बाईपास स्थित बहुचर्चित श्रीराम कॉलोनी प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से राजस्थान आवासन मंडल के पक्ष में फैसला दिए जाने के बावजूद अब तक जमीन पर कब्जा लेने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। करीब 2200 करोड़ रुपए की बाजार कीमत वाली इस बहुमूल्य जमीन को लेकर मंडल की निष्क्रियता अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी जमीनी कार्रवाई शून्य

हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मौके पर न तो आवासन मंडल की संपत्ति दर्शाने वाले बोर्ड लगाए गए हैं और ना ही अवैध कब्जों को हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया है। इससे यह संदेश जा रहा है कि मंडल इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है, जबकि कानूनी स्थिति पूरी तरह उसके पक्ष में है। आवासन मंडल द्वारा कोर्ट में कैविएट भी दायर की जा चुकी है, ताकि भविष्य में किसी संभावित अपील की स्थिति में उसका पक्ष पहले सुना जा सके। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई का अभाव साफ नजर आ रहा है।

नोटिस के बाद कार्रवाई का तर्क, विशेषज्ञों ने बताया कमजोर

आवासन मंडल के आयुक्त अरविंद पोसवाल का कहना है कि पहले कब्जाधारियों को नोटिस दिए जाएंगे, उसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी। हालांकि प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञ इस तर्क को कमजोर मानते हैं। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के मामलों में व्यक्तिगत नोटिस अनिवार्य नहीं होता। अत्यंत आवश्यक स्थिति में केवल दो दिन का सार्वजनिक नोटिस जारी कर भी कार्रवाई की जा सकती है। खास बात यह भी है कि मौके पर अधिकांश प्लॉट्स पर केवल बाउंड्रीवॉल बनी हुई है और स्थायी रहवास नहीं है। ऐसे में आवासन मंडल के लिए कब्जा लेना अपेक्षाकृत आसान और विवाद रहित माना जा रहा है।

आवासन मंडल की धीमी रफ्तार

इसी संदर्भ में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) का उदाहरण सामने आ रहा है, जो इसी प्रक्रिया के तहत तेजी से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है। ऐसे में आवासन मंडल की धीमी कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कहीं प्रशासनिक ढिलाई या किसी प्रकार के दबाव के चलते कार्रवाई को टाला जा रहा है। हालाकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन जमीन की भारी कीमत और लंबे समय से चले आ रहे विवाद के कारण मामला संवेदनशील बना हुआ है।

अब ASG भरत व्यास की शरण में बोर्ड

पूरे मामले में लंबे समय से चल रहे अनिर्णय के बीच अब आवासन मंडल ने बड़ा कदम उठाया है। मंडल ने नगरीय विकास विभाग से जुड़े मामलों के मास्टर एडवोकेट और ASG भरत व्यास से लीगल ओपिनियन मांगी है कि हाई कोर्ट के फैसले की पालना किस प्रक्रिया के तहत की जाए। भरत व्यास राज्य सरकार के लिए लैंड एक्विजिशन से जुड़े कई बड़े मामलों में निर्णायक जीत दिला चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उनकी राय मिलने के बाद आवासन मंडल जल्द ही ठोस कार्रवाई करेगा।

जल्द हो सकती है बड़ी कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, भरत व्यास की कानूनी राय मिलते ही आवासन मंडल 2200 करोड़ से अधिक बाजार मूल्य की इस महत्वपूर्ण जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।

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