Monday, March, 16,2026

नींदड़ आवासीय योजना: 16 साल पुराने विवाद में खुली राह

जयपुर: जेडीए की लंबित नींदड़ आवासीय योजना को लेकर पिछले 16 वर्षों से चले आ रहे विवाद में अब सुलह के आसार नजर आ रहे हैं। प्रभावित किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार और जेडीए उनकी 15 सूत्री मांगों को लिखित रूप में मान लेते हैं तो वे योजना के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध करा देंगे अन्यथा वे एक इंच जमीन भी देने को तैयार नहीं हैं। नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति के आह्वान पर रविवार को नींदड़ गांव में किसानों और नागरिकों की आम सभा हुई। इसमें लंबित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। संघर्ष समिति के नेताओं ने पिछले 8 माह में जेडीए और राज्य सरकार के स्तर पर हुई विभिन्न दौर की वार्ताओं का पूरा ब्योरा किसानों के सामने रखा। सभा में किसानों ने एकमत से घोषणा की कि लिखित समझौते के बिना कोई सहयोग नहीं किया जाएगा। उपस्थित लोगों ने हाथ उठाकर इस प्रस्ताव पर सहमति जताई।

वार्ता से उम्मीद

संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश चंद बोहरा ने किसानों को अब तक की वार्ताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के सक्रिय हस्तक्षेप से किसानों में सुलह की उम्मीद बंधी है। बलराम सिंह ने बताया कि सभा सौहार्दपूर्ण संपन्न हुई और किसानों व सरकार के बीच सहमति की संभावना दिखाई दे रही है।

संघर्ष समिति अध्यक्ष ने बताई मांगों की स्थिति

संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट प्रभाती लाल शर्मा ने कहा कि लंबे समय से जेडीए और सरकार के साथ वार्ता चल रही है। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, पूर्व जेडीसी आनंदी, विभागीय अधिकारियों और नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इनमें अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई है, जो मांगें जेडीए स्तर पर पूरी नहीं हो सकतीं, उन्हें राज्य सरकार कैबिनेट की बैठक में ले जाएगी। उन्होंने प्रमुख मांगों का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रभावित किसानों के साथ दोबारा सर्वे कराया जाए और वर्तमान बाजार दर के अनुसार मुआवजा तय किया जाए, जिन खातेदारों का मुआवजा जेडीए द्वारा न्यायालय में जमा कराया गया है, उन्हें नींदड़ आवासीय योजना में विकसित भूमि का विकल्प दिया जाए। प्रभावित किसानों को योजना में 25 प्रतिशत विकसित आवासीय भूमि और 10 प्रतिशत विकसित व्यावसायिक भूमि प्रदान की जाए। किसानों से कोई पट्टा शुल्क या अन्य अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाए। प्रभावित किसानों के मौजूदा मकानों को न तोड़ा जाए; यदि तोड़ना आवश्यक हो तो उनका पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। इन सहित कुल 15 सूत्री मांगों को लिखित रूप में स्वीकार करने पर ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।

प्रस्तावित योजना

नींदड आवासीय योजना सीकर रोड स्थित हरमाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित है, जिसमें करीब 1350 बीघा कृषि भूमि शामिल है। वर्ष 2010 से चले आ रहे इस विवाद में किसान मुआवजे की दरों, विकसित भूमि के विकल्प और कथित जबरन अधिग्रहण के खिलाफ संघर्षरत रहे हैं। हाल के महीनों में कई प्रदर्शन और धरने हुए हैं, लेकिन अब बातचीत के सकारात्मक परिणाम आने के संकेत मिल रहे हैं।

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