Sunday, June, 14,2026

अग्निकांड के बाद एक्शन... रातभर छापे, पांच गोदाम-फैक्ट्रियां सील

जयपुर: खोह नागोरियान थाना क्षेत्र के करीम नगर तलाई में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और अग्निकांड ने राजधानी जयपुर की प्रशासनिक, पुलिस और फायर सेफ्टी व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। आठ लोगों की मौत के बाद कार्रवाई का दौर जरूर शुरू हुआ है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिहायशी इलाके में वर्षों से चल रहे बारूद के इस कारोबार को आखिर किसकी शह प्राप्त थी और जिम्मेदार एजेंसियां अब तक क्या कर रही थीं?

हादसे के बाद पुलिस ने मंगलवार रात से पूरे इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कार्रवाई के दौरान अब तक पांच अवैध पटाखा फैक्ट्री और गोदामों का खुलासा हुआ है। इनमें से तीन स्थानों पर भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, तैयार पटाखे और निर्माण में उपयोग होने वाला बारूद बरामद किया गया है। दाउद कॉलोनी, आयशा कॉलोनी और आसपास के इलाकों में कई मकानों में अवैध रूप से पटाखा निर्माण और भंडारण किए जाने के प्रमाण मिले हैं। पुलिस ने इन परिसरों को सील कर दिया है। एफएसएल टीम बरामद विस्फोटकों की प्रकृति और उनकी मारक क्षमता का परीक्षण कर रही है। वहीं पुलिस ने इन फैक्ट्रियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मकान मालिक याकूब-कयूम और संचालक फिरोज फरार

पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस मकान में विस्फोट हुआ, वह कयूम का बताया जा रहा है, जबकि उसका भाई याकूब भी इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। दोनों भाई रहीम नगर द्वितीय स्थित एक आलीशान दो मंजिला बंगले में रहते हैं, जहां सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। पुलिस जब वहां पहुंची तो दोनों फरार मिले। जांच एजेंसियां अब मकान मालिक याकूब, कयूम और फैक्ट्री संचालक फिरोज की तलाश में राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद सहित कई स्थानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का मानना है कि फिरोज इस पूरे अवैध कारोबार का मास्टरमाइंड है। डीसीपी ईस्ट रंजीता शर्मा ने बताया कि जल्द ही गिरफ्तारी होगी।

मृतकों की पहचान पूरी, परिवारों में मातम

हादसे में जिन दो शवों की पहचान नहीं हो सकी थी, उनकी पहचान 18 वर्षीय रेयान और 22 वर्षीय निसार के रूप में हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। इससे पहले इस हादसे में 16 वर्षीय रब्बिल सहित कुल आठ लोगों की मौत हो चुकी है। करीम नगर तलाई में बुधवार को सन्नाटा पसरा रहा। वहां आज भी लोग सदमे में हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो उनके अपने आज जीवित होते।

वायरल वीडियो ने झकझोरा

हादसे के बाद सामने आए एक वीडियो ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। वीडियो में दो युवक गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में फैक्ट्री के बाहर मदद की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं। वे दर्द से कराहते हुए लोगों से अस्पताल पहुंचाने की अपील कर रहे हैं। बाद में दोनों की मौत हो गई। इस वीडियो ने राहत एवं बचाव कार्यों की गति और आपदा प्रबंधन की तत्परता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक चिंगारी और मौत का तांडव

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार फैक्ट्री में काम के दौरान उठी एक छोटी चिंगारी विस्फोटक सामग्री तक पहुंच गई। इसके बाद तेज धमाके के साथ पूरा परिसर आग की चपेट में आ गया। हालात इतने भयावह थे कि अंदर काम कर रहे लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला।

निगम की फायर सेफ्टी भी कठघरे में

खोह नागोरियान अग्निकांड के बाद नगर निगम की फायर सेफ्टी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। परकोटे के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र पुरोहित जी के कटले में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 3.90 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित फायर फाइटिंग सिस्टम बंद पड़ा मिला। पड़ताल में सामने आया कि कई फायर नोजल खराब है, पाइपों में पानी नहीं है और आपातकालीन लाइटें भी निष्क्रिय है, जबकि इस बाजार में 690 से अधिक दुकानें हैं और प्रतिदिन 20 हजार से ज्यादा लोगों की आवाजाही होती है। त्योहारों और सीजन में यह संख्या 50 हजार तक पहुंच जाती है। ऐसे में किसी बड़े हादसे की स्थिति में हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल आखिर किसकी सरपरस्ती में चल रहा था बारूद का कारोबार ?

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पुलिस की छापेमारी में एक के बाद एक पांच अवैध गोदाम और फैक्ट्रियां सामने आ रही हैं, तो यह स्पष्ट है कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क था। ऐसे में सवाल उठता है कि रिहायशी इलाकों में बारूद के गोदाम और पटाखा फैक्ट्रियां आखिर किसकी निगरानी में चल रही थीं? क्या स्थानीय स्तर से लेकर उच्च स्तर तक किसी ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया? क्या नियमित निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित थे? और सबसे अहम, क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा? आठ मौतों के बाद अब जनता की नजर केवल गिरफ्तारियों पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि क्या इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार पूरे तंत्र की जवाबदेही तय होगी या यह मामला भी कुछ निलंबनों और औपचारिक जांचों के बाद फाइलों में दफन होकर रह जाएगा। स्मार्ट सिटी सीईओ एवं निगम, उपायुक्त फायर और मुख्य अग्निशमन अधिकारी गौतमलाल, जिला प्रशासन भी जिम्मेदार हैं। हालांकि पुलिस पर कार्रवाई हो गई, लेकिन इन पर कार्रवाई बाकी है। नौ पुलिसकर्मी सस्पेंड हो गए, मगर बड़े जिम्मेदार अब भी बचे हुए हैं।

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