Monday, August, 03,2026

विवादों का समाधान पहले संवाद, फिर कानून से होना चाहिए: CJI

जयपुर: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता (मेडिएशन) भारत की न्याय परंपरा और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस, मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस 2026 के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और विश्वास के माध्यम से विवादों के स्थायी समाधान का प्रभावी तरीका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य हर विवाद को अदालत तक पहुंचाना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को सुलभ, सम्मानजनक और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। सीजेआई ने कहा कि अब मध्यस्थता का दायरा पारिवारिक विवादों से आगे बढ़कर व्यावसायिक, वाणिज्यिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं तक पहुंच गया है। इससे समय, धन और रिश्तों-तीनों को बचत होती है। उन्होंने कहा कि गोपनीयता मध्यस्थता की सबसे बड़ी ताकत है। मेडिएशन एक्ट-2023 और सुप्रीम कोर्ट की पहल से देशभर में प्रशिक्षित मध्यस्थों का मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है, जिससे वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को नई मजबूती मिली है।

जयपुर घोषणा-2026 से मिलेगा वैश्विक सहयोग को नया आधार

सम्मेलन में प्रस्तावित 'जयपुर घोषणा-2026' को वैश्विक स्तर पर मध्यस्थता, न्याय व्यवस्था और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। राष्ट्रमंडल देशों के न्यायविद और विधि विशेषज्ञ परिवार, व्यापार, कार्यस्थल, पर्यावरण तथा अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता की भूमिका पर मंथन कर रहे है। इस विचार-विमर्श के आधार पर तैयार होने चाला जयपुर घोषणा पत्र सदस्य देशों के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान और न्याय प्रणाली को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज माना जा रहा है।

राजस्थान बना वैश्विक न्याय और संवाद का केंद्र

उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राजस्थान कॉमनवेल्थ पीस मैडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 की मेजबानी कर रहा है, जहां विश्व के न्यायविद और विधि विशेषज्ञ शांति, मध्यस्थता और कानून के शासन पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संवाद और मध्यस्थता की परंपरा 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना को आगे बढ़ाती है। लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से लाखों लोगों को त्वरित न्याय मिला है। उन्होंने सीजेआई सूर्यकांत के नेतृत्व और राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक न्यायिक सहयोग को नई दिशा देगा।

मध्यस्थता भारत की पुरानी परंपरा

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विजय बिश्रोई ने कहा कि मध्यस्थता भारत की प्राचीन न्याय परंपरा का हिस्सा रही है। गांवों की पचायतों और समुदाय के बुजुर्ग सदियों से आपसी संवाद के जरिए विवादों का समाधान करते आए है। उन्होंने कहा कि आधुनिक मध्यस्थता कोई विदेशी अवधारणा नहीं, बल्कि उसी परंपरा का संस्थागत और कानूनी स्वरूप है। जस्टिस बिश्नोई ने कहा कि कानून के शासन का उद्देश्य हर नागरिक तक समयबद्ध, सुलभ और प्रभावी न्याय पहुंचाना है। मुकदमेबाजी में जहां एक पक्ष हारता है, वहीं मध्यस्थता दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान उपलब्ध कराती है।

राजस्थान में 181 मेडिएशन सेंटर

राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि शांति केवल संघर्ष का अभाव नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान की उपस्थिति है। मध्यस्थता समाज और परिवारों को जोड़ने वाला मजबूत पुल है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में 181 मेडिएशन सेंटर संचालित हैं और करीब 2500 प्रशिक्षित मध्यस्थ सेवाएं दे रहे हैं। राज्य में ऑनलाइन मेडिएशन प्लेटफॉर्म की शुरुआत भी सफलतापूर्वक की गई है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सफल मध्यस्थता पर मध्यस्थों को मानदेय देने वाला अग्रणी राज्य बना है। राज्य सरकार ने मध्यस्थों का मानदेय बढ़ाकर 7000 रुपए प्रति केस किया है।

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