Monday, August, 03,2026

न अध्यक्ष नाराज, ना मैं नाराज... प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह एकजुट

जयपुर: बीएपी (भारत आदिवासी पार्टी) से जुड़े कार्यकर्ताओं की पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर मुलाकात और उसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की टिप्पणी से उपजे सियासी विवाद पर शुक्रवार को आखिरकार गहलोत ने अपनी चुप्पी तोड़ दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस में किसी तरह की नाराजगी नहीं है, पार्टी पूरी तरह एकजुट है और मीडिया इस पूरे घटनाक्रम को बेवजह विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहा है। सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा कि बीएपी के कार्यकर्ता केवल उनसे मिलने आए थे, उनकी कांग्रेस में जॉइनिंग का कोई कार्यक्रम नहीं था।

उन्होंने कहा कि जॉइनिंग नेताओं की होती है, कार्यकर्ताओं की नहीं। वे मिलने आए थे और बाद में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जाकर अध्यक्ष से भी मिले। इसमें विवाद जैसी कोई बात नहीं है। डोटासरा की नाराजगी से जुड़े सवाल पर गहलोत ने स्पष्ट कहा कि उनके और प्रदेशाध्यक्ष के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा, 'न अध्यक्ष जी नाराज हैं, ना मैं नाराज हूं।' उन्होंने जो महसूस किया, वह कह दिया। लेकिन मीडिया बार-बार ऐसे सवाल पूछकर माहौल बिगाड़ने और नेताओं को डराने की कोशिश करता है। उन्होंने दोहराया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में कांग्रेस पूरी तरह संगठित है और अगली सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

20-25 दिन तक मना किया, फिर भी 500 किमी दूर से आ गए कार्यकर्ता

गहलोत ने बताया कि वागड़ क्षेत्र के आदिवासी कार्यकर्ता पिछले 20-25 दिनों से उनसे मिलने का समय मांग रहे थे। उन्होंने कई बार उन्हें समझाया कि जयपुर आने की जरूरत नहीं है, वे स्वयं बांसवाड़ा आकर मुलाकात करेंगे। इसके बावजूद कार्यकर्ता बसों में बैठकर करीब 500 किलोमीटर का सफर तय कर जयपुर पहुंच गए। ऐसे में उन्होंने उनसे मुलाकात की। गहलोत ने कहा कि करीब 400 कार्यकर्ता आए थे और यदि किसी पार्टी से लोगों का मोहभंग होकर वे काग्रेस के संपर्क में आते हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए, न कि उसे विवाद बनाया जाए।

भाजपा सरकार पर साधा तीखा निशाना

बीएपी प्रकरण पर सफाई देने के साथ ही गहलोत ने भाजपा सरकार पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में शासन नहीं, बल्कि कुशासन चल रहा है। भ्रष्टाचार ने सारी सीमाएं पार कर दी हैं, विभागों में भुगतान अटके पड़े हैं और आम लोगों के काम नहीं हो रहे। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के कुछ ही महीनों में प्रशासनिक विफलता की चर्चा शुरू हो जाना अभूतपूर्व है। गहलोत ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूल बंद हो रहे हैं, शिक्षकों की भारी कमी है और आरजीएचएस की स्थिति भी लगातार बिगड़ रही है। कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में हत्या, फायरिंग, डकैती और दुष्कर्म जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जबकि सरकार हालात संभालने में विफल साबित हो रही है।

क्या था विवाद ?

पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के नेतृत्व में गुरुवार को बीएपी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने आए 309 नेता और कार्यकर्ता सबसे पहले अशोक गहलोत के आवास पहुंचे थे, जहां अशोक गहलोत चौथी बार के नारे लगे। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डोटासरा ने बिना नाम लिए व्यक्तिवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि पार्टी किसी भी व्यक्ति से बड़ी होती है। इसी बयान के बाद कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था। हालांकि शुक्रवार को गहलोत ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के भीतर किसी प्रकार की नाराजगी या टकराव नहीं है।

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