Tuesday, September, 29,2026

पुलिस में जिले के बाद ही रेंज, प्रशासन में सीधे संभाग की कमान

जयपुर: राजस्थान की हायर ब्यूरोक्रेसी में फील्ड पोस्टिंग को लेकर इन दिनों एक अलग तरह का प्रशासनिक समीकरण सामने आया है। पुलिस और प्रशासन के शीर्ष फील्ड पदों की तुलना करें तो दोनों सेवाओं में जिम्मेदारियों के लिहाज से काफी अंतर नजर आता है।

प्रदेश में आईजी स्तर के अधिकारियों की फील्ड पोस्टिंग में जहां लगभग सभी अधिकारियों के पास एसपी के रूप में काम करने का अनुभव है, वहीं आईएएस में संभागीय आयुक्त जैसे अहम फील्ड पद पर कुछ ऐसे अधिकारी भी तैनात हैं, जिन्हें कभी जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी नहीं मिली।

आईपीएस अधिकारियों के लिए फील्ड पोस्टिंग में आईजी का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था में आईजी स्तर पर तैनात अधिकारियों ने इससे पहले एसपी के रूप में जिलों की कमान संभाली है यानी जिला पुलिस की जिम्मेदारी संभालने, कानून-व्यवस्था देखने और फील्ड में पुलिस प्रशासन का नेतृत्व करने के बाद उन्हें रेंज स्तर पर आईजी की जिम्मेदारी मिली है, वहीं आईएएस में संभागीय आयुक्त का पद फील्ड प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। संभागीय आयुक्त के पास एक से अधिक जिलों के प्रशासन की मॉनिटरिंग, कलेक्टरों के साथ समन्वय, राजस्व एवं विकास कार्यों की समीक्षा और संभागीय स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण जैसी अहम जिम्मेदारियां होती हैं। बावजूद इसके प्रदेश में कुछ संभागीय आयुक्त ऐसे हैं, जिन्हें अपने कॅरिअर में कभी जिला कलेक्टर के रूप में काम करने का अवसर नहीं मिला।

बिना कलेक्टर रहे मिली संभाग की जिम्मेदारी

मौजूदा तैनातियों में नलिनी कठौतिया और के. एल. स्वामी ऐसे नाम हैं, जिन्होंने पहले कभी जिला कलेक्टर के रूप में कार्य नहीं किया है और अब संभागीय आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। भरतपुर संभाग में नलिनी कठौतिया संभागीय आयुक्त हैं, वहीं जोधपुर संभाग की कमान के.एल. स्वामी संभाल रहे हैं।

पुलिस में पहले जिला, फिर रेंज का पैटर्न

पुलिस महकमे में फील्ड पोस्टिंग का पैटर्न अलग दिखाई देता है। रेंज आईजी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों के पास सामान्यतः एसपी के रूप में जिला पुलिस की कमान संभालने का अनुभव रहता है। एसपी रहते हुए अधिकारी कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, पुलिस बल के संचालन और जिला स्तर पर प्रशासनिक समन्वय जैसी जिम्मेदारियों से सीधे रूबरू होते हैं। इसके बाद रेंज स्तर पर कई जिलों की पुलिस व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी मिलती है यानी पुलिस में जिला स्तर से रेंज स्तर तक जिम्मेदारी का एक क्रम दिखाई देता है। पहले एसपी के रूप में एक जिले की पुलिस की कमान और उसके बाद आईजी के रूप में पूरी रेंज की जिम्मेदारी।

प्रशासन में अलग तस्वीर

आईएएस कैडर में यह क्रम हर मामले में दिखाई नहीं देता। कलेक्टर को जिला प्रशासन का प्रमुख माना जाता है और संभागीय आयुक्त के स्तर पर उसी संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों की मॉनिटरिंग होती है। ऐसे में कलेक्टर के रूप में काम करने का अनुभव संभागीय स्तर की जिम्मेदारी के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक अनुभव माना जाता है। हालांकि संभागीय आयुक्त की नियुक्ति केवल कलेक्टर के अनुभव पर निर्भर नहीं होती। वरिष्ठता, प्रशासनिक अनुभव, कैडर की स्थिति और सरकार की पोस्टिंग नीति समेत कई कारक नियुक्ति में भूमिका निभाते हैं, लेकिन मौजूदा तैनातियां यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि क्या आईएएस में संभागीय आयुक्त जैसे शीर्ष फील्ड पद के लिए कलेक्टर के अनुभव को उतना महत्व दिया जा रहा है, जितना पुलिस में आईजी की फील्ड पोस्टिंग के लिए एसपी के अनुभव को ?

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