Monday, June, 15,2026

भू-माफियाओं ने जलस्रोत पाटकर बसाई थी कॉलोनियां

जयपुर: राजधानी जयपुर के खोह नागोरियान क्षेत्र में मंगलवार को हुए भीषण अग्निकांड ने शहरी विकास व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीम नगर इलाके में अवैध रूप से संचालित पटाखा निर्माण इकाई में लगी आग से आठ लोगों की मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच और स्थानीय दावों में यह सामने आया है कि यह पूरा क्षेत्र बड़ली तालाब की भूमि पर विकसित अवैध कॉलोनियों का हिस्सा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार खसरा नंबर 1954 से 1958 तक फैली लगभग 18 बीघा भूमि पर कभी जलस्त्रोत स्थित था, जहां वर्षा जल का संग्रह होता था। यह क्षेत्र जल संरक्षण प्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता था, लेकिन समय के साथ जल प्रवाह के मार्ग बाधित कर दिए गए, जिससे तालाब धीरे-धीरे समाप्त हो गया। इसके बाद भूमि पर मलबा, मिट्टी और कचरा डालकर बड़े पैमाने पर भराव किया गया तथा क्षेत्र को समतल बना दिया गया। इसके बाद यहां भूखंडों की कटाई शुरू हुई और धीरे-धीरे करीम नगर के साथ-साथ रहीम नगर सहित कई अनाधिकृत कॉलोनियां विकसित हो गई।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देश

न्यायालयों के निर्देशों के अनुसार नदी, नाले या तालाब जैसे जलस्रोतों तथा उनके कैचमेंट क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है। यहां तक कि कृषि भूमि पर भी कॉलोनी विकसित करने के लिए सक्षम प्राधिकरण की अनुमति आवश्यक होती है। इसके बावजूद डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य लगातार चलता रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शुरुआती चरण में ही जेडीए को लिखित शिकायतें दी गई थीं। मामला विधानसभा तक भी पहुंचा,
जहां जनप्रतिनिधियों ने अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया, लेकिन प्रवर्तन स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण निर्माण गतिविधियां जारी रहीं।

परिणामस्वरूप समय के साथ पूरा क्षेत्र घनी आबादी में तब्दील हो गया। अग्निकांड के बाद जेडीए की प्रवर्तन शाखा सक्रिय हुई है। मौके पर सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार चिह्नित भूखंडों पर नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भूमि परिवर्तन-बसावट

  • बड़ली तालाब खसरा नंबर 1954-1958 के बीच स्थित था।
  • पूर्व में क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनी रहती थी।
  • जल आगमन के मार्ग अवरुद्ध किए जाने से तालाब सूख गया।
  • इसके बाद भूमि पर मलबा और मिट्टी डालकर भराव किया गया।
  • भारी मात्रा में डंपरों से सामग्री लाकर क्षेत्र को समतल बनाया गया।
  • स्थानीय नागरिकों के अनुसार अवैध बसावट में भू-कारोबारी वकील खान और उनके सहयोगियों की भूमिका रही।

खाली प्लॉट में जलाए गए पटाखे, जांच में जुटी पुलिस

अवैध पटाखा फैक्ट्रियों के खिलाफ चल रही पुलिस कार्रवाई के दौरान गुरुवार सुबह नाड़ा वाली ढाणी के पास एक खाली प्लॉट में बड़ी मात्रा में पटाखों को फेंककर आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों ने धुआं उठता देख पुलिस को सूचना दी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पटाखा स्टॉक किसी अवैध फैक्ट्री या गोदाम से लाकर यहां नष्ट करने के उद्देश्य से फेंका गया था। पुलिस को आशंका है कि कार्रवाई के दबाव में सबूत मिटाने की कोशिश की गई है। मामले की अलग से जांच शुरू कर दी गई है। इससे एक दिन पहले 79 मकानों पर सर्च अभियान चलाया गया था, जिनमें 29 मकान बंद पाए गए थे। गौरतलब है कि पुलिस ने करीम नगर क्षेत्र की दो अवैध पटाखा इकाइयों पर छापेमारी कर करीब 16 हजार पटाखे जन्त किए थे। इधर, फरार आरोपी कयूम और फिरोज की तलाश में जिला विशेष टीम (डीएसटी) को दिल्ली और उत्तर प्रदेश स्वाना किया गया है। टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

ढांढस बंधाने पहुंचे गहलोत, सरकार को घेरा

अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और मौके पर हालात का जायजा लिया। गहलोत ने कहा कि हादसे के बाद फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस के देर से पहुंचने के कारण जनहानि बढ़ी, जो गंभीर लापरवाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी जयपुर में इतनी बड़ी घटना के बावजूद सरकार के किसी वरिष्ठ नेता का मौके पर नहीं पहुंचना दुर्भाग्यपूर्ण है। गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर तथा जिला कलेक्टर से फोन पर बातचीत कर पीड़ित परिवारों को उचित सहायता देने की मांग की।

मानवाधिकार आयोग सख्त, लिया प्रसंज्ञान

आठ मजदूरों की मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाते हुए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा एवं आर्थिक सहायता तथा घायलों को समुचित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने होटल, गोदाम, भंडारण इकाइयों, विस्फोटक और अन्य जोखिमपूर्ण प्रतिष्ठानों की व्यापक जांच कर सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश भी दिए हैं। आयोग अध्यक्ष ने घटना को गंभीर बताते हुए प्रमुख शासन सचिव गृह, जयपुर कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर 30 जून तक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

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