Saturday, August, 01,2026

गांवों को आत्मनिर्भर बनाकर ही हो सकेगा विकसित भारत 2047 का सपना साकार

जयपुर: ग्रामीण विकास को नई दिशा देने और आत्मनिर्भर गांवों की अवधारणा को मजबूत करने के उद्देश्य से विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (बीजीयू) में गुरुवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'ग्रामीण विकास को फिर से परिभाषित करना: बहु-विषयक परिप्रेक्ष्य एवं वैश्विक अंतर्दृष्टि का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि, फर्स्ट इंडिया मीडिया ग्रुप के सीईओ एंड मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. ललित के. पंवार ने की। इस अवसर पर ग्रामीण विकास, नीति निर्माण, शोष, नवाचार और सामुदायिक सशक्तीकरण को समर्पित डॉ. के. राम ग्रामोत्थान अध्ययन पीठ का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पवन अरोड़ा ने कृषि में तकनीक के उपयोग, किसानों को डिजिटल माध्यम से मौसम पूर्वानुमान, टेलीमेडिसिन, स्कूलों में स्मार्ट क्लास, शिक्षकों के प्रशिक्षण और मजबूत आधारभूत ढांचे पर जोर दिया। साथ ही युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास, महिलाओं के सशक्तीकरण और गांवों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

अरोड़ा ने राज्य सरकार को पंच गौरव योजना के तहत बन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और गांव आत्मनिर्भर बनेंगे।  पवन अरोड़ा ने कहा कि किसी भी विकास मॉडल की सफलता केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं होती, बल्कि जनभागीदारी उसका मूल आधार है। उन्होंने कहा कि विकास को वास्तविक सफलता तब होगी, जब योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।

प्रगति गांवों की समृद्धि से ही संभव

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. ललित के, पंवार ने कहा कि भारत की वास्तविक प्रगति गांवों की समृद्धि से ही संभव है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं जितनी जवाबदेह और पारदर्शी होगी, ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभउतनी ही प्रभावी ढंग से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

योजनाओं का बेहतर समन्वय जरूरी

मुख्य वक्ता एवं एपीजे सत्य विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के कुलपति प्रो. विजय वीर सिंह ने कहा कि जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, आंगनबाड़ी सेवाओं और मनरेगा जैसी योजनाओं के बेहतर समन्वय से गांवों का समग्र विकास सुनिक्षित किया जा सकता है। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. के. रवि बाबू ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, आधुनिक कृषि तकनीक, बाजार से बेहतर जुड़ाव और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बताया। मुख्य संरक्षक एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डॉ. के. राम ने कहा कि ग्रामीण विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन निर्माण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी नवाचार और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। सम्मेलन में ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे पद्मश्री लक्ष्मण सिंह को डॉ. के. राम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर नागौर जिले के सिंगार गांव के मेधावी विद्यार्थियों को डॉ. के. राम छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई।

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