Tuesday, June, 30,2026

टाइगर री-इंट्रोडक्शन का सफल मॉडल बना सरिस्का

अलवर: कभी बाघों की पूरी तरह स्थानीय विलुप्ति का दंश झेल चुका सरिस्का आज विश्व के सबसे सफल टाइगर री-इंट्रोडक्शन मॉडल बन चुका है। 28 जून 2008 को रणथंभौर से पहले बाघ एसटी-1 के आगमन के साथ शुरू हुई यह यात्रा आज 18 वर्ष पूरे कर चुकी है। संघर्ष से सफलता तक के इस ऐतिहासिक सफर का जश्न सरिस्का डे के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर अलवर में 'टाइगर री-इंट्रोडक्शनः अवसर एवं चुनौतियां' विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार हुई। इसमें देशभर के 11 राज्यों के प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, 21 टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, एनटीसीए, भारतीय वन्यजीव संस्थान, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) सहित वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा, डीजी फॉरेस्ट एवं विशेष सचिव सुशील अवस्थी, आईबीसीए के महानिदेशक डॉ. एस.पी. यादव, एनटीसीए के अपर महानिदेशक एवं सदस्य सचिव संजय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सरिस्का की सफलता को देश और दुनिया के लिए प्रेरणादायी बताया। वर्ष 2005 में जब सरिस्का से बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे, तब इसकी कल्पना भी कठिन थी कि यही जंगल एक दिन बाघ संरक्षण की वैश्विक मिसाल बनेगा। 2008 में रणथंभौर से बाघों का पुनर्स्थापन शुरू हुआ। अब तक 11 बाघों का सफल ट्रांसलोकेशन किया जा चुका है। वर्ष 2012 में पहली बार शावकों का जन्म हुआ और आज सरिस्का में बाघों की संख्या 56 से अधिक पहुंच चुकी है।

वन मंत्री संजय शर्मा ने विश्वास जताया कि इसी वर्ष यह आंकड़ा 60 पार करेगा, जबकि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भविष्य में सरिस्का 100 बाघों की क्षमता तक भी पहुंचेगा। राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक हैं। भारत आज दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत जंगली बाघों का संरक्षण कर रहा है और सरिस्का इस सफलता का सबसे मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। सरिस्का की सफलता का सकारात्मक प्रभाव पर्यटन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में पर्यटकों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है तथा टिकट राजस्व भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है।

जुलाई में लगाए जाएंगे एक करोड़ पौधे

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अलवर को पूर्णतः हरित बनाने का संकल्प भी दोहराया। उन्होंने घोषणा की कि जुलाई से वन मंत्री संजय शर्मा के साथ मिलकर अलवर के आसपास की पहाड़ियों में एक करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्यों ने बाघ पुनर्स्थापन के अनुभव साझा किए तथा भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। विशेषज्ञों ने माना कि वैज्ञानिक प्रबंधन, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, वन विभाग की प्रतिबद्धता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के कारण ही सरिस्का आज संघर्ष से सफलता की ऐसी कहानी लिख सका है, जो विश्व वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है।

सरिस्का की सफलता पर बनेगी ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की है कि प्रसिद्ध वन्यजीव फिल्म निर्माता सुब्बैया नल्लामुथु के नेतृत्व वाली संस्था नल्ला'स आर्क (Nalla's Ark) भारत सरकार और राजस्थान सरकार के सहयोग से सरिस्का टाइगर रिजर्व की ऐतिहासिक सफलता पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री का निर्माण करेगी। इस डॉक्यूमेंट्री को सरिस्का बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम की 20वीं वर्षगांठ पर रिलीज करने की योजना है। यह फिल्म दुनिया की सबसे सफल वन्यजीव संरक्षण और बाघ पुनर्स्थापना की कहानियों में से एक के रूप में सरिस्का की उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करेगी।

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