Friday, February, 13,2026

कोषाधिकारियों को निर्देशः चेकलिस्ट के अनुसार ही करें जांच

जयपुर: राजस्थान सरकार के वित्त (कोष एवं लेखा) विभाग ने निर्माण कार्यों से जुड़े बिलों की कोषालय स्तर पर जांच को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुछ कोषाधिकारी अब भी मनमाने ढंग से तकनीकी प्रकृति के आक्षेप (आपत्तियां) लगा रहे हैं, जिससे बिल पास होने में अनावश्यक देरी हो रही है। इस समस्या को रोकने के लिए विभाग ने सभी कोषाधिकारियों को फिर से पुराने परिपत्रों और चेकलिस्ट का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए हैं। वित्त विभाग के अनुसार, निर्माण विभागों की ओर से किए जाने वाले कार्यों के बिलों की जांच के लिए पहले से ही स्पष्ट नियम और प्रक्रिया तय की गई है। वर्ष
2016 में जारी परिपत्र में कोषालय स्तर पर बिल जांच के योग्य बिंदु और संलग्न चेकलिस्ट के बारे में विस्तार से बताया गया था। इसी क्रम में 5 मई, 2016 और 20 मई, 2016 को भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इनमें साफ कहा गया था कि यदि बिलों पर अनुचित या अनावश्यक आक्षेप लगाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

विभाग के संज्ञान में आया है कि वर्तमान समय में कुछ कोषाधिकारी इन निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं। वे चेकलिस्ट और निर्धारित प्रक्रिया से हटकर तकनीकी विषयों (जैसे इंजीनियरिंग या डिजाइन से जुड़े) पर आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं, जो उनकी जांच के दायरे से बाहर हैं। इससे निर्माण कार्यों के ठेकेदारों और विभागों को परेशानी हो रही है तथा सरकारी योजनाओं और प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है। इसी को देखते हुए वित्त (जी. एण्ड टी.) विभाग ने सभी कोषाधिकारियों को पुनः निर्देशित किया है कि वे निर्माण कार्य बिलों की जांच केवल पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही करें। तकनीकी प्रकृति के अनावश्यक आक्षेप लगाने से पूरी तरह बचा जाए। यदि कोई कोषाधिकारी इन निर्देशों की अवहेलना करता है तो वह व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश शासन सचिव, वित्त (बजट) राजन विशाल की ओर से जारी किया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान अनिवार्य, ठेकेदारों को सीधे चेक बंद

दरअसल, वर्ष 2016 में जारी सर्कुलर में राजस्थान सरकार ने लोक निर्माण, वन सहित सभी कार्य विभागों के निर्माण लेन-देन को पूर्ण रूप से कोषालय मोड पर शिफ्ट कर दिया था। इसका उद्देश्य लेखांकन में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाना तथा भुगतान में देरी समाप्त करना था। इसके तहत सभी भुगतान कोषालय /उप कोषालय के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होंगे। डिवीजन ठेकेदारों या सप्लायर्स को सीधे चेक जारी नहीं कर सकेंगे। कार्यों के जीपीएस और विभिन्न चरणों की फोटोग्राफ से भुगतान प्रक्रिया लिंक होगी। ऑनलाइन बजट वितरण (लेटर ऑफ क्रेडिट) वित्त विभाग की ओर से किया जाएगा और डिवीजन केवल निर्धारित सीमा में ही लेन-देन कर सकेंगे। प्रशासनिक-वित्तीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति और कार्य आदेश का ऑटो-जनरेशन सिस्टम पर होगा। विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ लेखा अधिकारी नई व्यवस्था की दैनिक निगरानी करेंगे सहित अन्य बिंदुओं पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए थे।

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