Friday, February, 13,2026

तनोट मंदिर व बॉर्डर देखने के लिए ऑनलाइन पास अनिवार्य

जैसलमेर: श्री तनोट माता मंदिर और भारत पाक सीमा देखने के लिए पास अनिवार्य कर दिया गया है। श्री तनोट माता मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और पर्यटकों की बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए सीमा-दर्शन के लिए ऑनलाइन बॉर्डर पास अनिवार्य कर दिया है। यह नई व्यवस्था गुरुवार से प्रभावी हो गई है। ट्रस्ट की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, अब किसी भी आगंतुक को बिना पूर्व पंजीकरण के बॉर्डर क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट www. shritanotmatamandirtrust. com पर जाकर आवेदन करना होगा। ऑनलाइन आवेदन के बाद पास की कॉपी आवेदक के पंजीकृत ई-मेल पर भेजी जाएगी। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबी कतारों और प्रतीक्षा समय को कम करने के लिए श्रद्धालुओं को अपने पास की दो प्रिंटेड प्रतियां साथ लाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, सत्यापन के लिए वही मूल पहचान पत्र साथ रखना होगा, जिसका विवरण ऑनलाइन फॉर्म भरते समय दिया गया था।

श्रद्धालुओं को अब नहीं करना पड़ेगा इंतजार

ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि सीजन के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ के कारण चेक पोस्ट पर सत्यापन में काफी समय लगता था। ऑनलाइन व्यवस्था से न केवल सुरक्षा एजेंसियां डेटा को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगी, बल्कि श्रद्धालुओं को भी घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ट्रस्ट ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे जैसलमेर से तनोट के लिए रवाना होने से पहले अपना ऑनलाइन पास सुनिश्चित कर लें ताकि सीमा चौकी पर किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

बच्चों के लिए अभिभावकों का पास ही मान्य

नियमों के अनुसार, प्रत्येक वयस्क व्यक्ति को अपना व्यक्तिगत पास बनवाना होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए अलग से पास बनवाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपने अभिभावकों के साथ प्रवेश कर सकेंगे।

यह है तनोट माता के मंदिर का इतिहास

जैसलमेर शहर से 120 किलोमीटर दूर भारत-पाक सीमा पर स्थित यह मंदिर 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध की साक्षी तनोट माता का है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने करीब 3500 बम गिराए थे, लेकिन उनमें से एक भी बम नहीं फटा था। इसे माता का चमत्कार माना जाता है। यहां पर ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मंदिर परिसर में रुमाल बांधकर मनोकामना करता है तो उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। तनोट माता मंदिर का निर्माण 828 विक्रमी संवत में राजा तणुराव (तनुजी राव) ने करवाया था। उस समय जैसलमेर की राजधानी तनोट हुआ करती थी और कालांतर में यहां के राजा भाटी राजपूत अपनी राजधानी तनोट से लोद्रवा और उसके बाद जैसलमेर ले गए, लेकिन मंदिर वहीं रहा।

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