Thursday, July, 23,2026

खांसी की दवा से बच्चों की बिगड़ी तबीयत, सप्लाई पर लगाई रोक

जयपुर: सरकारी सप्लाई में आने वाली खांसी की दवा बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाल रही है। ताजा मामला सीकर के श्रीमाधोपुर और भरतपुर से सामने आया है, जहां सरकारी अस्पताल से मिली खांसी की दवा पीने से बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। इस पर परिजन बच्चों को लेकर जयपुर के जेके लोन अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज कराया गया। मामला श्रीमाधोपुर के अजीतगढ़ स्थित मंडा हाथी देह गांव के प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) का है। तीन दिन पहले यानी 25 सितंबर को परिजनों ने अपने दो बच्चों को बुखार होने पर सीएचसी में डॉक्टर को दिखाया था। डॉक्टर ने डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइ‌ड्रोब्रोमाइड सीरप लिखी थी। इस दवा को पीने के बाद दोनों बच्चे बेहोश हो गए। मामला सामने आने के बाद ड्रग विभाग ने डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सीरप की पूरी सप्लाई पर रोक लगा दी और जांच के लिए सैंपल भेज दिए। वहीं, मामले को लेकर जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक का कहना है कि यह तय नहीं है कि बच्चों की तबीयत दवा पीने से ही बिगड़ी।

डॉक्टर ने गलत दी दवा

इस मामले को लेकर ड्रग अधिकारियों का कहना है कि दवा का गलत उपयोग किया गया है। डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सीरप चार साल से बड़े बच्चों के लिए मान्य है। एफडीए भी चार साल से छोटे बच्चों को ये दवा नहीं देने की सिफारिश करता है, लेकिन जिन बच्चों की तबीयत बिगड़ी, वे सभी चार साल से कम उम्र के हैं। ऐसे में दवा देने वाले डॉक्टर और डिस्पेसरी को लेकर मुख्यालय स्तर से जांच करवाई जा रही है।

जयपुर की लोकल कंपनी बना रही दवा

बच्चों को दी गई खांसी की दवा डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सीरप जयपुर की लोकल कंपनी कायसन्स फार्मा बना रही है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सरना डूंगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। मामला सामने आने के बाद राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस कंपनी की सीरप को दवा केंद्रों पर वितरित करने से रोक लगा दी है।

सर्दी-जुकाम पर दी गई दवा

सर्दी-जुकाम के कारण मंडा हाथी देह गांव निवासी किट्ट (3 वर्ष) और टिंकू (डेढ़ वर्ष) को सीएचसी में डॉक्टर को दिखाया गया। डॉक्टर ने बच्चों को खांसी की सीरप डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड और कुछ अन्य दवाएं दीं। परिजनों का आरोप है कि दवा पीते ही दोनों बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और वे अचानक बेहोश हो गए। बच्चों को पहले शाहपुरा के प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तबीयत में सुधार न होने पर उन्हें जयपुर के जैके लोन अस्पताल रेफर किया गया। रविवार को दोनों बच्चों को ठीक होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। इसी तरह, भरतपुर के बयाना में सरकारी अस्पताल से मिली खांसी की सीरप पीने से दो बच्चों और एक डॉक्टर की तबीयत बिगड़ी। बच्चे का जेके लोन अस्पताल में इलाज हुआ और शनिवार को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।

सिम्पटम्स के अनुसार इलाज

जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर. एन, सेहरा ने बताया कि भरतपुर और सीकर के तीन बच्चों में यह समस्या देखी गई। परिजनों ने स्थानीय डिस्पेंसरी की दवा की पर्ची और दी गई दवा की जानकारी दी। हालांकि यह सुनिश्चित नहीं है कि दवा पीने से ही बच्चे बेहोश हुए। बच्चों का इलाज उनके लक्षणों (सिम्पटम्स) के अनुसार किया गया और ठीक होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी तय

ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए डेक्सट्रोमेौरफन हाइड्रोब्रोमाइड सीरप की पूरी सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। विभिन्न बैचों के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी बढ़ाई जाएगी।

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