Friday, April, 17,2026

ओरण बचाओ पदयात्रा पहुंची जयपुर, पुलिस ने रोका रास्ता

जयपुर: राजस्थान में ओरण (पारंपरिक चरागाह एवं संरक्षित वन क्षेत्र) के संरक्षण को लेकर निकाली गई 'ओरण बचाओ' पदयात्रा गुरुवार को जयपुर पहुंचते ही तनावपूर्ण माहौल में बदल गई। यह यात्रा 21 जनवरी को जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से शुरू हुई थी, जिसमें शामिल लोगों ने 86 दिनों में लगभग 750 किलोमीटर की दूरी नंगे पैर तय कर राजधानी में प्रवेश किया। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के नेतृत्व में निकाली जा रही पदयात्रा जैसे ही सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन पहुंची, पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे सिविल लाइंस की ओर बढ़ने से रोक दिया। इस पर हालात तनावपूर्ण हो गए और प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की और नोंकझोंक हुई। सैकड़ों प्रदर्शनकारी सीकर रोड पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की। धरना सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चला, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। बाद में सचिवालय में प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक आश्वासन पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

भाटी ने सरकार पर लगाया उदासीनता का आरोप

धरने को संबोधित करते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने राज्य सरकार पर ओरण भूमि के संरक्षण और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने को लेकर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के वे ग्रामीण, जिन्होंने 1965 और 1971 के युद्धों में देश की रक्षा की, आज अपनी ही जमीन और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाटी ने आरोप लगाया कि बड़े उद्योग और कंपनियां ओरण भूमि पर अतिक्रमण कर रही है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है और पशुपालकों व किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा सदन में खेजड़ी संरक्षण विधेयक लाने का आश्वासन अब तक धरातल पर नहीं उतरा है। विश्नोई समाज सहित कई वर्ग लंबे समय से इस मुद्दे पर आंदोलनरत है, लेकिन अब तक ठोस नीतिगत कार्रवाई के बजाय केवल आश्वासन ही मिले है। विधायक भाटी और प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं करती, तो आंदोलन को पूरे राजस्थान स्तर पर व्यापक रूप दिया जाएगा।

जैसलमेर में ओरण के लिए 3666 हेक्टेयर भूमि आरक्षित

जैसलमेर। पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने जैसलमेर जिले में ओरण भूमि के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विभिन्न तहसीलों के गांवों में कुल 3666.2139 हेक्टेयर भूमि को ओरण के रूप में आरक्षित किया है। रामगढ़ तहसील के दिलावर (124.95 हेक्टेयर), कुछड़ी (1084.80 हेक्टेयर) और पूनमनगर (583.99 हेक्टेयर) के साथ फतेहगढ़ तहसील के भीमसर (952.28 हेक्टेयर) और बीजोता (96.77 हेक्टेयर) में भी ओरण क्षेत्र घोषित किए गए हैं। इसके अलावा जैसलमेर तहसील के मोकला, बीरमा काणोद सहित कई गांवों में भी सैकड़ों हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में प्रक्रिया जारी है।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें

  • ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करना।
  • अतिक्रमण पर तुरंत रोक लगाना।
  • खेजड़ी पेड़ों का कानूनी संरक्षण (खेजड़ी बचाओ बिल लाना)।
  • गोचर भूमि और पारंपरिक जल स्रोतों (नदियां, नाले, तालाब) की सुरक्षा।
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