Thursday, June, 11,2026

अब बार-बार तारीख लेने वालो की खुलेगी पोल

जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने न्यायिक मामलों में बार-बार स्थगन लेने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हाई कोर्ट की वाद सूची (कॉज लिस्ट) में प्रत्येक मामले में लिए गए स्थगनों की संख्या अलग से प्रदर्शित की जाएगी।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से दर्ज होगा कि स्थगन किस पक्ष की ओर से लिया गया है। हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से जारी इस नए स्टैंडिंग ऑर्डर का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, अनावश्यक देरी को रोकना और मामलों के त्वरित निस्तारण को तय करना है। रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा द्वारा जारी आदेश में सभी न्यायिक शाखाओं और कॉज लिस्ट प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

अब कॉज लिस्ट में दिखेगा पूरा रिकॉर्ड

नए आदेश के तहत प्रत्येक मामले के केस कोड के साथ स्थगनों की संख्या प्रदर्शित की जाएगी। इतना ही नहीं, यह भी दर्ज किया जाएगा कि स्थगन याचिकाकर्ता, अपीलकर्ता, आवेदक, प्रतिवादी या दोनों पक्षों द्वारा संयुक्त रूप से मांगा गया था। हाई कोर्ट प्रशासन ने स्थगनों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करने का निर्णय लिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुनवाई में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है। इसके अलावा अन्य प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से हुए स्थगनों का भी पृथक रिकॉर्ड रखा जाएगा।

'नॉट रीच' मामलों को नहीं माना जाएगा स्थगन

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों की सुनवाई न्यायालय तक नहीं पहुंच पाती और उन्हें 'नॉट रीच' श्रेणी में रखा जाता है, उन्हें स्थगन की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। अर्थात, केवल उन्हीं मामलों का रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिनमें किसी पक्ष या अन्य कारणों से सुनवाई टली हो। यह स्टैंडिंग ऑर्डर 14 मई 2026 को पारित न्यायिक आदेश की अनुपालना में जारी किया गया है। न्यायालय ने माना था कि बार-बार स्थगन लेने की प्रवृत्ति न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालती है और मामलों के समयबद्ध निस्तारण में बड़ी बाधा बनती है।

सॉफ्टवेयर के जरिए होगी निगरानी

हाई कोर्ट के केस मैनेजमेंट सिस्टम में आवश्यक बदलाव कर स्थगनो का पूरा डेटा सॉफ्टवेयर के माध्यम से संधारित किया जाएगा। इससे किसी भी प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह तुरंत देखा जा सकेगा कि मामले में कितनी बार और किसके अनुरोध पर तारीख ली गई है। न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के लिए भी यह जानकारी आसानी से उपलब्ध रहेगी, जिससे अनावश्यक स्थगन मांगने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा।

लंबित मामलों को कम करने की दिशा में कदम

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था लंबित मामलों की संख्या कम करने में सहायक होगी। अक्सर पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं द्वारा बार-बार स्थगन लेने से वर्षों तक मामले लंबित रहते हैं। अब जब प्रत्येक स्थगन का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से कॉज लिस्ट में दिखाई देगा तो अनावश्यक तारीख लेने पर नैतिक और पेशेवर दबाव भी बनेगा। हाई कोर्ट का यह कदम न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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