Monday, April, 06,2026

प्रिंसिपल-अधीक्षक की निजी प्रैक्टिस बंद... फुल टाइम बनेंगे ऑफिसर

जयपुर: प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) और अधीक्षकों (सुपरिंटेंडेंट) की नियुक्ति, कार्यकाल और दायित्वों से जुड़ी नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल, कंट्रोलर या अस्पताल अधीक्षक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। साथ ही वे यूनिट हेड या विभागाध्यक्ष (एचओडी) के पद पर भी कार्य नहीं कर पाएंगे।
नियुक्ति से पूर्व उन्हें यह शपथ-पत्र देना होगा कि वे पूर्णकालिक रूप से अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे। प्रिंसिपल की नियुक्ति के लिए बनाई गई नई गाइडलाइन के अनुसार अब प्रिंसिपल की नियुक्ति तीन सालों के लिए की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक विभाग की अनुमति से कार्यकाल 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा। प्रिंसिपल पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अकुशलता या अन्य गंभीर आरोप सामने आने पर संबंधित जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त या सक्षम अधिकारी/समिति द्वारा जांच करवाई जाएगी।

अधीक्षक को देना होगा तीन-चौथाई समय

अस्पतालों के अधीक्षक पद के लिए अब केवल संबंधित कॉलेज या अस्पताल के सीनियर प्रोफेसर ही पात्र होंगे। चयन के लिए एसीएस चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें आयुक्त चिकित्सा शिक्षा, अतिरिक्त निदेशक (अस्पताल प्रशासन), अतिरिक्त निदेशक (एकेडमिक) और संबंधित कॉलेज के प्रिंसिपल सदस्य होंगे। जिन सीनियर प्रोफेसर या प्रोफेसर को अस्पताल में अधीक्षक बनाया जाएगा, उन्हें ड्यूटी के तीन-चौथाई समय में अधीक्षक पद पर ही कार्य करना होगा।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय चयन समिति गठित

प्रिंसिपल के चयन के लिए 4 सदस्यीय चयन समिति गठित की गई है। इसमें मुख्य सचिव अध्यक्ष होंगे, जबकि सदस्य के रूप में एसीएस कार्मिक विभाग, एसीएस चिकित्सा शिक्षा विभाग और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय या मारवाड़ मेडिकल कॉलेज, जोधपुर के कुलपति शामिल होंगे। गाइडलाइन के अनुसार केवल पात्र शिक्षक ही आवेदन कर सकेंगे। यदि संबंधित कॉलेज में पात्र चिकित्सक-शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं तो केंद्र या राज्य सरकार के अन्य मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टर भी आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा 57 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही अधीक्षक या अतिरिक्त प्रधानाचार्य के पद पर 3 वर्ष और विभागाध्यक्ष के पद पर 2 वर्ष का अनुभव आवश्यक होगा।

3 महीने तक कार्य हस्तांतरण प्रक्रिया में रहना होगा शामिल

अधीक्षक के पद से हटने या नए अधीक्षक की नियुक्ति पर पुराने अधीक्षक को 3 महीने तक कार्य हस्तांतरण प्रक्रिया में शामिल रहना होगा। पहले एक माह तक सभी फाइलें पुराने अधीक्षक के हस्ताक्षर से ही निपटेंगी। अगले दो महीनों में नए अधीक्षक को किसी भी निर्णय से पहले पुराने अधीक्षक से राय लेनी होगी। मेडिकल कॉलेजों में अकैडमिक, रिसर्च एवं फैकल्टी अफेयर्स, स्टूडेंट अफेयर्स, प्रशासन तथा क्लिनिकल एवं अस्पताल सेवाओं से जुड़े कार्यों के लिए 5 से अधिक अतिरिक्त प्रधानाचार्य नियुक्त नहीं होंगे। इनकी नियुक्ति प्रारंभिक रूप से 3 वर्षों के लिए की जाएगी। सेवाएं असंतोषजनक पाए जाने पर समय से पूर्व हटाया भी जा सकेगा।

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