Wednesday, April, 15,2026

दिसंबर से पहले चुनाव संभव नहीं, OBC आरक्षण तय नहीं

जयपुर: राजस्थान में पंचायत समितियों, जिला परिषदों और नगर निकायों के चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर साफ संकेत दे दिया है कि 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से असंभव है। सरकार का तर्क है कि दिसंबर 2026 से पहले चुनाव नहीं हो सकते। इस प्रार्थना पत्र के बाद न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। हाई कोर्ट पहले ही 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दे चुका
है और न मानने पर अवमानना नोटिस भी जारी कर दिया है।

राजस्थान में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल सितंबर 2026 से लेकर दिसंबर 2026 तक पूरा होने वाला है। संविधान के अनुसार स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा ने इसकी अनदेखी को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की थीं। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया था कि 15 अप्रैल 2026 तक सभी पंचायत और नगर निकाय चुनाव पूरे कर लिए जाएं। अब सरकार ने उसी आदेश पर अपनी असमर्थता जताते हुए विस्तृत प्रार्थना पत्र दायर किया है।

ओबीसी आरक्षण सबसे बड़ा पेंच

राज्य सरकार ने महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद के माध्यम से दायर प्रार्थना पत्र में सबसे बड़ा मुद्दा ओबीसी आरक्षण को बताया है। 9 मई 2025 को गठित ओबीसी आयोग अभी डेटा संग्रह कर रहा है और 30 सितंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट दे सकता है। सरकार का कहना है कि बिना रिपोर्ट के सीटों का पुनर्निर्धारण और आरक्षण लागू करना संभव नहीं है। बिना आरक्षण चुनाव कराना सामाजिक न्याय के खिलाफ होगा और नई कानूनी चुनौती खड़ी कर सकता है।

महीने-दर-महीने बाधाएं गिनाईं

सरकार ने चुनाव में देरी के लिए विस्तृत कारण बताए।

  • अप्रैल-मई: बोर्ड परीक्षाएं, स्कूल स्टाफ व्यस्त
  • जून-जुलाई: भीषण गर्मी और प्रशासनिक पुनर्संरचना
  • अगस्त-सितंबरः त्योहारों का सीजन
  • अक्टूबर-दिसंबरः कई निकायों का कार्यकाल समाप्त

विशाल चुनावी मशीनरी की चुनौती

चुनाव के लिए भारी संसाधनों की जरूरत होगी। शहरी क्षेत्रः 22,891 मतदान केंद्र, 1,14,455 कर्मचारी, ग्रामीण क्षेत्रः 45,380 मतदान केंद्र, 2,26,900 कर्मचारी और बड़ी संख्या में ईवीएम मशीनें चाहिए। सरकार ने कहा कि इतनी बड़ी चुनावी व्यवस्था को अचानक तैयार करना संभव नहीं है।

अब आगे क्या होगा ?: जहां हाई कोर्ट 15 अप्रैल 2026 की समय-सीमा पर अड़ा हुआ है, वहीं, सरकार दिसंबर 2026 के बाद चुनाव कराने की बात कह रही है। अवमानना नोटिस पहले ही जारी हो चुका है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट इस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई कर अपना फैसला सुनाएगा। अब अगली सुनवाई में हाई कोर्ट के सामने दो विकल्प अहम होंगे, या तो वह अवमानना की कार्रवाई को आगे बढ़ाए या सरकार की दलीलों और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए चुनाव के लिए नई समय-सीमा तय करे।

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