Friday, July, 17,2026

लोकतंत्र के पहरेदारों ने साझा किए 75 साल के सुनहरे सफर के पल

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित 'विधायी गौरव यात्रा' के अंतर्गत बुधवार को आयोनित दो विशेष सहें में प्रदेश को लोकतांत्रिक एवं विधायी विरासत का व्यापक मंथन हुआ। वर्तमान और पूर्व विधायकों ने पिछले साढ़े सात दशकों में पारित जनकल्याणकारी एवं ऐतिहासिक कानूनों की पृष्ठभूमि, उनके प्रभाव और भविष्य की चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए।

भूमि सुधार, लोकायुका, सूचना का अधिकार, वित्तीय अनुशासन, गोसंरक्षण, टेनेसी कानून, गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा, कोचिंग सेंटर विनियमन, धमांतरण प्रतिषेध, सती निवारण और प्राथमिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण अधिनियम चर्चा के केंद्र में रहे। वक्ताओं ने इस चात पर भोर दिया कि समय के साथ कानून बदलते रहे हैं, लेकिन उनका मूल उद्देश्य जनहित, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करना रहा है। सम्मेलन में अनुभवी जनप्रतिनिधियों ने अपने संसदीय संस्मरण साझा कर नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक परंपराओं से मीखने का संदेश भी दिव्यख।

सदन की गरिमा सार्थक बहस और अध्ययन से बढ़ती है

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि सदन की गरिमा अध्ययन, मर्यादा और सार्थक बहस से बढ़ती है। उन्होंने नए विधायकों से विधानसभा पुस्तकालय का अधिक उपयोग करने और विषयों का सहन अध्ययन कर सदन में आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संसदीय परंपरा में वैचारिक मतभेद हमेशा रहे, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों में सम्मान और मानवीयता संवर्वोपरि रही है। राजे ने कहा कि जब वे पूर्व सांसद डी. अबरार अहमद के निधन के बाद कांग्रेस ऑफिस पहुंची तो कई लोगों ने कहा आप सीएम है, आपका काग्रेस कार्यालय जाना उचित नहीं। मैंने कहा राजनीति की लक्ष्मण रेखा से बहुत बड़ी है इंसानियत की भावना।

हर विधेयक पर हो गंभीर चर्चा

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डी. सी.पी. जोशी ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता का आधार स्वस्थ, तथ्यपरक और गंभीर बहस है। उन्होंने विधायकों हसे हर विधेयक के प्रत्येक प्रावधान पर गंभीरता से चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने राजस्वान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 तथा विधानसभा सदस्य (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1969 का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित में कानून बनाना ही लोकतांत्रिक परंपराओं की असली पहचान है।

भूमि सुधारों ने किसानों को मालिक बनाया

राज्यसभा सांसद घनस्याम शिवाड़ी ने राजस्थान भूত্রि सुधार एवं जागीर पुनर्यहग अधिनियम, 1952 को राज्य के इतिहास का मील का पत्था बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून ने किसानों की भूमि का स्वामित्व दिलाया और सामंती व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनके अनुसार भूमि सुधारों की बदौलत राजस्थान ने कृषि विकास और देश की खाद्यान आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने वाला पहला राज्य बना

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित जिम कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण एवं कल्याण) अधिनियम, 2023 को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि ओला, उबर, स्विगी और जओमेटी जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों निग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना। इस कानून के तहत गठित कल्याण बोर्ड और विशेष कोष उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्क्षित करेंगे।

सामाजिक सन्द्भाव की रक्षा का कानून

पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ ने राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता और समाज मैं आपसी विश्वास एवं सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य छल, प्रलोभन या दबाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाकर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है।

कोचिंग कानून से विद्यार्थियों को मिलेगा सुरक्षित माहौल

पूर्व विधायक राजेंद्र राठौड़ ने राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2025 को विद्यार्थियों के हित में ऐतिहासिक कानून बताया।। उन्होंने कहा कि यह कानून कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही जय करता है, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाता है तथा सुरक्षा और अग्निशमन मानकों को अनिवार्य बनाता है। इससे छात्रों को सुरक्षित, तनावमुक्त और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

RTI बना जवाबदेही का आधार

बूढी विधायक हरिमोहन शर्मा ने राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 की पारदर्शी और जवाबदेह शासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। इस कानून ने आम नागरिक को शासन से जवाब मांगने का अधिकार दिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को नई मजबूती की। इससे लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और सरकार की जवाबदेही दोनों मजबूत हुई। प्रदान

किसान अधिकारों में कानून की बड़ी भूमिका

पूर्व विधायक प्रभूलाल सैनी ने राजस्थान कृषि जोतों पर सीमा अधिरोगण अधिनियम, 1973 को सामाजिक न्याय की दिशा में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से अतिरिक्त भूमि का पुनर्वितरण कर भूमिहीन किसानों को स्वामित्व का अधिकार दिलाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू हुई। इससे ग्रामीण समाज में आर्थिक समानता बढ़ी और भूमि सुधारों की नई दिशा मिली।

टेनेंसी एक्ट ने दिए कानूनी अधिकार

जयपुर ग्रामीण सासद राव राजेन्द्र सिंह ने राजस्थान टेनेसी (अभिधुति) अधिनियम, 1955 को किसानों के अधिकारों की रक्षा करने वाला मतहासिक कानून बताया। इस अधिनियम ने काश्तकारों को कानूनी संरक्षण और अधिकार प्रदान किए। विशेष रूप से SC/ST की भूमि की सुरक्षा के लिए किए गए प्रावधान सामाजिक न्याय के उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्राथमिक शिक्षा ने रखी बदलाव की नींव

पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964 की शिक्षा के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून ने प्रदेश में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का आधार तैयार किया। उन्होंने स्वावलंबन आधारित शिक्षा, जैसे कताई बुनाई और व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी इस कानून की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

वर्तमान-पूर्व विधायकों ने की यादें ताजा

विधानसभा के अमृत उत्सव के दौरान बुधवार को वर्तमान और पूर्व विधायकों का ऐतिहासिक समागम हुआ। विधानसभा के सदन में वर्षों बाद पहुंचे कई पूर्व विधायक भावुक हो उठे और उन्होंने अपनी संसदीय यादें ताजा की। इस 'विधायी महाकुंभ' में 410 अनप्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 247 पूर्व विधायक तथा 163 वर्तमान विधायक शामिल रहे। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देतनानी की इस पहल को "अनूठी" बताते हुए कहा कि वर्तमान और पूर्व विधायकों का यह समागम ऐतिहासिक है, जहां राजनीति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान दिखाई दिया। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसे "विधायी महाकुंभ" बताते हुए देवनानी की सकारात्मक सोच की सराहना की। समारोह में शामिल पूर्व और वर्तमान विधायकों ने इसे विधानसभा के इतिहास का अभूतपूर्व आयोजन बताया।

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