Wednesday, September, 02,2026

जनता से पहले अपनों की चुनौती, अब सता रहा भीतरघात का भय

जयपुर: नगर निगम चुनाव में इस बार फैसला सिर्फ जनता ही नहीं करेगी, बल्कि पार्टियों के भीतर की एकजुटता भी उम्मीदवारों की जीत-हार तय करेगी। टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में बगावत ने चुनावी गणित को उलझा दिया है। हालात यह हैं कि आधे से ज्यादा वाड़ों में कहीं टिकट के दावेदार निर्दलीय बनकर मैदान में उतर गए हैं तो कहीं पार्टी के पुराने कार्यकर्ता ही अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। अब दोनों दलों के सामने अपने-अपने बागियों को मनाने, वोटों के बिखराव को रोकने और भीतरघात पर लगाम लगाने की चुनौती है। भाजपा में टिकट बंटवारे के बाद असंतोष लगातार सामने आ रहा है।

जयपुर से लेकर दूसरे निकाय क्षेत्रों तक कार्यकर्ताओं और दावेदारों की नाराजगी दिखाई दे रही है। कई जगहों पर दोनों ही पार्टियों पदाधिकारियों की नाराजगी टिकट वितरण में अनदेखी और स्थानीय स्तर पर समन्वय नहीं होने को लेकर है। जयपुर में भी टिकट को लेकर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 98 में कार्यकर्ताओं ने भाजपा मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सुभाष को टिकट दिए जाने का विरोध किया। अब भाजपा ने प्रदेशभर में पार्टी सिंबल के अलावा नामांकन दाखिल करने वाले कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट जुटानी शुरू कर दी है। संगठन यह पता लगा रहा है कि कौन-कौन से पदाधिकारी, कार्यकर्ता और दावेदार निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं।

डोटासरा-जूली की बागियों पर नजर

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने साफ किया है कि राजनीति में शत-प्रतिशत लोगों को संतुष्ट करना संभव नहीं है। उनका कहना है कि नाराज कार्यकर्ताओं को बैठाकर बातचीत और सम्मान के साथ समझाइश की जाएगी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी संगठन स्तर पर असंतोष को साधने की कवायद में सक्रिय है। कांग्रेस की कोशिश है कि नाम वापसी से पहले अधिक से अधिक बागियों को चुनाव मैदान से हटाया जाए।

भाजपा के लिए 4 सितंबर अहम दिन

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष 4 सितंबर को जयपुर पहुंचेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार सुबह एयरपोर्ट से सीधे प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचेंगे। सुबह 10 बजे से दिनभर बैठकों का दौर चलेगा और रात करीब 9 बजे दिल्ली रवाना होने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश प्रभारी राधा मोहनदास अग्रवाल समेत संगठन के प्रमुख नेता बैठक में मौजूद रहेंगे। बैठक में टिकट वितरण के बाद उपजे असंतोष, बागियों की स्थिति, चुनाव प्रबंधन, बूथ तैयारियों और संगठनात्मक समन्वय पर फीडबैक लिया जा सकता है। यानी निकाय चुनाव से पहले बीएल संतोष का दौरा भाजपा के लिए संगठन का 'रियलिटी चेक' माना जा रहा है।

भाजपा-कांग्रेस के लिए आधे से ज्यादा वार्डों में निर्दलीय चुनौती

बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार सीधे पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। कई वाडों में ऐसे चेहरे मैदान में हैं, जिनका अपने-अपने इलाकों में व्यक्तिगत प्रभाव और राजनीतिक नेटवर्क है। वार्ड एक में सीएम शर्मा, वार्ड 2 में रणजीत सैनी, वार्ड 3 में हरिशंकर बोहरा, वार्ड 5 में देवेन्द्र सिंह निठारवाल, वार्ड 8 में दिनेश कांवट की पत्नी मंजू कांवट, वार्ड 13 में रणवीर सिंह राजावत, वार्ड 15 में पंकज गोयल और तरुण खटोड़, वार्ड 16 में महिपाल सिंह करीरी, वार्ड 48 में हरिओम स्वर्णकार और वार्ड 101 में मनोज मुदगल जैसे नामों से मुकाबला कई जगह त्रिकोणीय या बहुकोणीय होता नजर आ रहा है।

कांग्रेस में भी बगावत

भाजपा के समान कांग्रेस में भी टिकट वितरण के बाद बगावत ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। जयपुर में राजुला सिंह वार्ड 75, अरविंद अग्रवाल वार्ड 77, केशव शर्मा वार्ड 78, जितेंद्र सिंह जादौन और पारस मीणा वार्ड 130, रईस, इकरामुद्दीन और कलीम कुरैशी वार्ड 109 से मैदान में हैं। वार्ड 147 में वहीद खान और जाहिद निर्वाण, वार्ड 146 में पूर्व पार्षद इलियास खान और पूर्व पार्षद रोशन भाटी, जबकि वार्ड 19 में पूर्व पार्षद लियाकत चुगनी, शरीफ मनिहार, पूर्व पार्षद प्रत्याशी जाकिर खान एडवोकेट और शमा शेख ने भी पार्टी के सामने चुनौती खड़ी की है।

सबसे बड़ा सवाल- जीत के बाद किसके साथ ?

बागियों की मौजूदगी ने चुनावी समीकरण के साथ भविष्य की राजनीति को लेकर भी सवाल खड़ा कर दिया है। यदि पार्टी से नाराज होकर निर्दलीय जीते चेहरे बाद में बोर्ड गठन के समय किसके साथ खड़े होंगे, यह अभी सबसे बड़ा सवाल है। खासकर उन निकायों में जहां भाजपा-कांग्रेस के बीच जीत का अंतर बेहद कम रहने की संभावना है, वहां कुछ निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। यही वजह है कि दोनों पार्टियां बागियों को केवल चुनावी चुनौती के रूप में नहीं देख रही हैं। चुनाव से पहले उन्हें मनाना और चुनाव के बाद संभावित सत्ता समीकरणों को अपने पक्ष में रखना दोनों ही दलों के लिए अब बड़ी राजनीतिक परीक्षा है।

मदन राठौड़ का दावा- सभी को मना लेंगे

प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि सभी कार्यकर्ता परिवार के सदस्य है और नाराजगी को बातचीत के जरिए दूर किया जाएगा। बागियों को भी समझाकर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के समर्थन में लाया जाएगा। भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी भी कह चुके हैं कि टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं को विरोधी नहीं, बल्कि पार्टी परिवार का हिस्सा मानकर संवाद किया जाएगा। पार्टी अब 'एडजस्टमेंट फॉर्मूले' के जरिए असंतुष्टों को साधने में जुटी है।

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