Saturday, February, 28,2026

राजस्थान में विवाहित दूसरे राज्यों की महिला ईडब्ल्यूएस आरक्षण की हकदार

जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण को लेकर एक महत्त्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद अन्य राज्यों से आकर राजस्थान में स्थायी रूप से बसने वाली महिलाओं को ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ देने से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संदीप शाह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपीलों को खारिज करते हुए महिला अभ्यर्थियों को ईडब्ल्यूएस कोटे में नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। यह विवाद राज्य स्वास्थ्य विभाग की वर्ष 2023 की महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता भर्ती से जुड़ा है। सरकार ने इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। कई महिला अभ्यर्थियों, जिनमें पुनिता रानी समेत अन्य महिलाएं शामिल हैं, ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आवेदन किया।

वे लिखित परीक्षा में मेरिट सूची में शामिल हुईं और दस्तावेज सत्यापन के लिए भी बुलाई गई। लेकिन अंतिम चयन सूची में अचानक उनके नाम हटा दिए गए। स्वास्थ्य विभाग का तर्क था कि ये महिलाएं मूल रूप से अन्य राज्यों (जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि) की निवासी हैं और विवाह के बाद राजस्थान आई हैं, इसलिए उन्हें ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट का आदेश

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की सभी विशेष अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता महिलाओं की उम्मीदवारी को ईडब्ल्यूएस श्रेणी में पुनः विचार किया जाए। यदि वे निर्धारित कट-ऑफ में आती हैं तो उन्हें तुरंत नियुक्ति दी जाए। नियुक्ति वरिष्ठता सहित सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। वास्तविक नियुक्ति की तिथि से सभी मौद्रिक लाभ (सैलरी, भत्ते आदि) भी दिए जाएं। यह फैसला न केवल इन महिलाओं के लिए राहत है, बल्कि पूरे देश में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की व्याख्या को नए आयाम देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अन्य राज्यों में भी ईडब्ल्यूएस नीति को प्रभावित कर सकता है।

याचिकाकर्ता महिलाओं की मजबूत दलीलें

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण पूरी तरह आर्थिक मानदंडों पर आधारित है, न कि SC/ST/OBC की तरह सामाजिक या जातिगत पिछड़ेपन पर।
  • राज्य सरकार के 10 फरवरी 2020 और 16 अगस्त 2021 के दो परिपत्रों में साफ-साफ लिखा है कि अन्य राज्यों से आकर राजस्थान में स्थायी निवास करने वाले व्यक्ति आय व संपत्ति की सीमा पूरी करने पर ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकते हैं।
  • विवाह के बाद ये महिलाएं राजस्थान की डोमिसाइल नीति के तहत मूल निवासी मानी जाती हैं और राज्य स्वयं उन्हें ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र जारी कर रहा है।
  • पूर्व में 'अमन कुमारी बनाम राज्य सरकार' मामले में भी हाई कोर्ट ने यही लाभ दिया था और सरकार ने उस फैसले के खिलाफ अपील नहीं की।

राज्य सरकार की दलीलें और खंडन

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों (रंजना कुमारी बनाम उत्तराखंड, मरी चंद्रशेखर राव, बीर सिंह आदि) का हवाला देकर कहा कि एक राज्य का आरक्षण दूसरे राज्य में नहीं मिल सकता। उन्होंने विज्ञापन की शर्त का भी जिक्र किया जिसमे लिखा था कि विवाह के बाद आई महिलाओं को SC/ST/OBC का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का यह भी तर्क था कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र जारी होना और आरक्षण का लाभ लेना दो अलग विषय हैं। साथ ही अभ्यर्थियों ने विज्ञापन की शर्तों को पहले चुनौती नहीं दी, इसलिए अब एस्टॉपेल सिद्धांत लागू होता है। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद राज्य सरकार के तर्कों को खारिज कर दिया।

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