Tuesday, May, 05,2026

असम में भाजपा ने लगाई जीत की हैटिक

गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीसरी बार जनादेश हामिल कर अपनी मजबूत पकड़ और संगठनात्मक ताकत साबित की है। इस जीत के पीछे सटीक रणनीति, प्रभावी गठबंधन और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का निर्णायक नेतृत्व अहम रहा।

सरमा ने अपनी पारंपरिक जलुकबारी मीट से कांग्रेस की बिदिशा नियोग को बड़े अंतर से हराकर अपनी लोकप्रियता पर फिर मुहर लगाई। 9 अप्रैल को 126 सीटों पर हुए मतदान में मतदाताओं ने भाजपा सरकार के पांच साल के कामकाज को समर्थन दिया। अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कदमों को खास तौर पर सराहा गया। नतीजतन, भाजपा ने न सिर्फ सत्ता बरकरार रखी, बल्कि सहयोगियों के साथ बहुमत से आगे निकलते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। वहीं, कांग्रेस कमजोर नेतृत्व और रणनीतिक असमंजस में उलझी रही। एआईयूडीएफ से गठबंधन टूटने ने उसकी स्थिति और कमजोर कर दी, जिससे वह भाजपा के सामने प्रभावी चुनौती पेश नहीं कर सकी।

भाजपा की रणनीति, जीत का आधार

  • भाजपा ने आक्रामक और जीत-केंद्रित चुनावी रणनीति अपनाई
  • बांग्लादेश से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से भुनाया
  • कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टीकरण के मुद्दे पर घेरा
  • बोडो क्षेत्र में रणनीतिक बदलाव करते हुए यूपीपीएल की जगह बीपीएफ से तालमेल किया
  • बीपीएफ की पिछली चुनावी सफलता को ध्यान में रखकर सीट बंटवारा तय किया
  • पूरे चुनाव में भाजपा ने एनआरसी, सीएए और घुसपैठ को मुद्दा बनाए रखा

कांग्रेस और वामदलों की हार के क्या हैं मायने ?

असम में लगातार दो बार की सरकार के बाद भी भाजपा का पहले की अपेक्षा अधिक सीटों के साथ सत्ता में वापसी बड़ा संकेत देता है। केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार जहां दो कार्यकाल के बाद हार गई, वहीं असम में भाजपा नीत एनडीए की बड़े बहुमत के साथ वापसी बड़ा राजनीतिक परिवर्तन है, जो भाजपा को कांग्रेस, वाम और अन्य क्षेत्रीय दलों से अलग बनाती है।

भाजपा

अब तक का शानदार प्रदर्शन

असम में भाजपा ने न केवल अपनी सरकार बरकरार रखी है, बल्कि अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया है। सहयोगियों के साथ दो तिहाई का आंकड़ा भी पार किया है। दरअसल मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बार बेहद आक्रामक अभियान चलाया। उन्होंने न केवल कांग्रेस पर खुलकर प्रहार किए बल्कि अपने उपर लगे आरोपों की खारिज करते हुए कांग्रेस के नेताओं को कठघरे में खड़ा भी किया। दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई खुद के मामलों और क्षेत्र में ही घिरे रहे। पार्टी के अन्य नेताओं का भी समर्थन नहीं मिला और प्रद्युत बोरदोलोई जैसे नेता भी साथ छोड़ गए।

कांग्रेस

अंदरूनी कलह में फंसी रही

असम चुनाव में कांग्रेस अंदरूनी कलह और कमजोर रणनीति के कारण पूरी तरह बिखरी नजर आई। पूरे चुनाव के दौरान वह कहीं भी प्रभावी मुकाबला खड़ा नहीं कर सकी। भाजपा ने उसे बांग्लादेशी घुसपैठियों की समर्थक के रूप में पेश करते हुए मुस्लिम बहुल सीटों तक सीमित करने में सफलता पाई। कट्टर हिंदुत्व की राजनीति के सामने कांग्रेस और उसके सहयोगी पूरे चुनाव में असरदार चुनौती देने में विफल रहे।

सरमा बोले... शतक के साथ हैट्रिक...

असम में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा उत्साहित नजर आए। भाजपा को मिले जनादेश को उन्होंने कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल बताया। उन्होंने जीत पर कहा कि 'शतक के साथ हैट्रिक !'

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