Tuesday, March, 17,2026

नई संरचना 2027 तक, तीन साल में एक बार होगी प्रतिनिधि सभा

जयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) ने संघ अपनी संगठनात्मक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए राजस्थान में तीन प्रांतों की जगह पांच संभाग बनाने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा और चित्तौड़ नाम से पांच संभाग होंगे। फिलहाल पदाधिकारियों के दायित्वों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन आगामी समय में नई संरचना के अनुरूप संगठनात्मक कार्य का विस्तार किया जाएगा। संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने सोमवार को जयपुर के सेवा सदन में पत्रकारों को बताया कि संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में आयोजित हुई थी। इस बैठक में संगठनात्मक ढांचे में बदलाव सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत राजस्थान क्षेत्र को समाप्त कर 'उत्तर-पश्चिम क्षेत्र' बनाया जाएगा। इस नए क्षेत्र में राजस्थान के साथ दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब को शामिल किया जाएगा। इससे संगठन के कार्यों के समन्वय और विस्तार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि नई संगठनात्मक संरचना को मार्च 2027 में होने वाली अगली प्रतिनिधि सभा की बैठक तक पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही संघ की बैठकों की संरचना में भी बदलाव किया गया है। अब तक हर वर्ष होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को तीन वर्ष में एक बार आयोजित किया जाएगा, जबकि हर साल क्षेत्र सभा का आयोजन किया जाएगा।

राजस्थान में बढ़ रहा है संघ का काम

राजस्थान के संदर्भ में उन्होंने बताया कि प्रदेश में संघ का कार्य तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में राज्य में लगभग 7,910 स्थानों पर संगठनात्मक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। प्रदेश में कुल 12,109 शाखाएं और 5,950 मिलन चल रहे हैं। इसके अलावा समाज के व्यापक संपर्क के लिए प्रदेश में अब तक 7,175 सम्मेलन हुए हैं, जिनमें 27,918 गांवों की भागीदारी रही। इन सम्मेलनों में लगभग 76 लाख से अधिक लोग शामिल हुए है।

न्यूनतम तीन बच्चे नहीं, चार-पांच भी स्वीकार्य

संघचालक ने कहा कि आज हिंदू समाज की जनसंख्या घट रही है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि एक व्यक्ति के तीन से अधिक संतान होनी चाहिए। संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में अलग-अलग स्थानों पर इस विषय को स्पष्टता के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रखा है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या का असंतुलन होने से कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ऐसा होने पर इसका समाधान अपने आप होगा। उन्होंने कहा कि न्यूनतम तीन बच्चे नहीं, चार-पांच भी स्वीकार्य हैं।

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