Thursday, January, 29,2026

बांग्लादेश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति चिंताजनक: देवनानी

कोटा: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गुरुवार को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो चुकी है। 'बांग्लादेश में मानवाधिकार एवं लोकतंत्र' विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में उन्होंने मुख्य वक्ता के रूप में विचार रखे। देवनानी ने कहा कि वर्ष 1971 में शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश बना। बांग्लादेश को स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित करने में भारत का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारत ने हमेशा बांग्लादेश की सहायता की, लेकिन हाल के घटनाक्रमों से वहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह तहस-नहस हो गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात ऐसे हैं कि वहां किसी प्रभावी सरकार के अस्तित्व का भी आभास नहीं होता।

कार्यक्रम में वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीएल वर्मा ने विषय पर प्रकाश डालते हुए विश्व समुदाय से बांग्लादेश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप का आह्वान किया। देवनानी ने गंभीर विषय पर व्याख्यान आयोजित करने के लिए कुलगुरु को साधुवाद दिया तथा विश्वविद्यालय के डिजिटल न्यूज लेटर 'मीरा' का विमोचन भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. सुबोध कुमार जैन के स्वागत भाषण से हुई और अंत में प्रो. सुनीता चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुप क्यों?

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बांग्लादेश में चुनावों की घोषणा तो की गई है, लेकिन इन चुनावों के निष्पक्ष होने की संभावना कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2025 में मंदिरों पर हमले, आगजनी और हिंसा की करीब 258 घटनाएं हो चुकी हैं। देवनानी ने सवाल उठाया कि बांग्लादेश में हो रहे मानवाधिकार हनन पर मानवाधिकारों की बात करने वाले देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि जब छोटी-छोटी घटनाओं पर मानवाधिकारों का मुद्दा उठाया जाता है, तो बांग्लादेश की घटनाओं पर मौन क्यों साध लिया गया है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं

देवनानी ने कहा कि भारत का दायित्व बनता है कि अपने सबसे निकटतम पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और ऐसे में भारत को वैश्विक मंच पर नेतृत्व करते हुए बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। देवनानी ने कहा कि बांग्लादेश में भीड़तंत्र हावी हो चुका है और वहां सेना का भी प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आता। उन्होंने सुझाव दिया कि बांग्लादेश में चुनाव संयुक्त राष्ट्र संघ या किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की निगरानी में कराए जाने चाहिए, ताकि लोकतंत्र को बचाया जा सके।

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