Thursday, January, 29,2026

इतिहास केवल युद्धों से नहीं बनता, कला और संस्कृति भी होती हैं समाज का दर्पण

जयपुर: सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति शुरू हुई तो हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया। मौका था राष्ट्रीय महिला लोक कला एवं शिल्प कार्यशाला के समापन समारोह का। उत्सव में देशभर से आई 13 महिला शिल्पकारों ने कार्यशाला में भाग लिया और विद्यार्थियों को पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण दिया। समारोह में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को हमारी समृद्ध कला और संस्कृति से परिचित कराते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक कलाओं का विश्वविद्यालयों में संरक्षण और संवर्द्धन होना चाहिए तथा इसके लिए सरकार हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।
फर्स्ट इंडिया न्यूज के सीईओ एंड मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा ने कहा कि राजस्थान की बात आते ही उसको मिट्टी, रंग, लोक परंपराएं, लोक कला, संगीत, शिल्प और वास्तुकला अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। राजस्थान में इस तरह के कला शिविर का आयोजन इसे और अधिक प्रासंगिक बनाता है। उन्होंने याद दिलाया कि उद्घाटन के दौरान राज्यपाल बागडे ने भी इस बात पर जोर दिया था कि कला आमजन तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल युद्धों और साम्राज्यों से नहीं बनता, बल्कि कला और संस्कृति समाज का दर्पण होती हैं। सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो और हड़प्पा को देखें तो वहां की कला हमें उस दौर की सामाजिक संरचना के बारे में बताती है।

अल्पना कटेजा ने पवन अरोड़ा को आयोजन का शोमैन बताते हुए कहा कि जो पहल एक छोटे प्रयास के रूप में शुरू हुई थी, वह अब दूरगामी प्रभाव वाले कार्यक्रम में बदल चुकी है। उन्होंने इस अवसर के महत्व को रेखांकित करते हुए दीया कुमारी के परिवार द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय के लिए भूमि दान किए जाने का स्मरण किया, जो इस वर्ष अपना 80 वां स्थापना दिवस मना रहा है। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने गंभीर वित्तीय चुनौतियों की और भी ध्यान दिलाया, जिनमें राज्य के साथ अनिवार्य राजस्व साझेदारी और 40 प्रतिशत से अधिक छात्राओं को दी जा रही निशुल्क शिक्षा के लिए प्रतिपूर्ति न मिलना शामिल है। उन्होंने आगामी बजट में सरकार से सहयोग की अपील की।

सहयोग मिला तो बढ़ा आत्मविश्वास

विजुअल आर्ट्स विभाग के प्रमुख रजत पंडेल ने कहा कि इस कार्यक्रम की योजना पिछले तीन-चार वर्षों से बनाई जा रही थी, लेकिन धन की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती थी। बैठक के बाद पवन अरोड़ा ने सहयोग का आश्वासन दिया, जिससे आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला। उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग इस तरह निस्वार्थ भाव से आगे आते हैं। वे कला और कलाकारों के प्रति सच्चे समर्पित है। कार्यशाला के प्रबंधन की जिम्मेदारी पीईडीआरएस से बीके दत्ता और सुहास दत्ता ने संभाली।

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