Tuesday, July, 28,2026

नदी बेसिन का बनेगा मास्टर प्लान, प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्ती

जयपुर: राजस्थान में जल संकट, भूजल दोहन और नदियों के बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एकीकृत जल प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सचिवालय में सोमवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में राजस्थान नदी बेसिन एंड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग अथॉरिटी की
समीक्षा बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब प्रदेश के प्रत्येक नदी बेसिन के लिए समग्र योजना तैयार होगी और सभी 11 संबंधित विभाग मिलकर जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ उपयोग पर काम करेंगे।

साथ ही जोजरी, बांडी समेत प्रदूषित नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने वालों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान जैसे जल संकटग्रस्त राज्य में उपलब्ध सीमित जल का विवेकपूर्ण उपयोग ही भविष्य की जल सुरक्षा की कुंजी है। उन्होंने जल संसाधन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, कृषि, उद्योग, नगरीय विकास, वन, प्रदूषण नियंत्रण मंडल सहित सभी विभागों को अंतर विभागीय समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक का मुख्य फोकस राज्य के सभी नदी बेसिनों में जल उपलब्धता, मौजूदा परियोजनाओं, चुनौतियों और 'विकसित राजस्थान-2047' के लक्ष्य के अनुरूप एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन योजना तैयार करना रहा।

उद्योगों को चेतावनीः नदियों में गंदा पानी गया तो होगी कार्रवाई

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जोधपुर, पाली, बालोतरा और जसोल के उद्योग संघों और सीईटीपी संचालन समितियों के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक कर साफ कहा कि जोजरी सहित किसी भी नदी में प्रदूषित औद्योगिक पानी नहीं जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित उद्योग संघों, सीईटीपी समितियों और जिला कलेक्टरों को तत्काल ठोस कार्य योजना तैयार कर सरकार को भेजने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 1990 के दशक के बाद पहली बार राज्य की सभी 16 नदी बेसिन योजनाओं का आधुनिक तकनीकों के आधार पर अद्यतन किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य करीब 2.9 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई कमांड क्षेत्र विकसित करना और जल निकायों का संरक्षण करना है।

मुख्य सचिव ने सभी बेसिनों के प्रस्तुतीकरण संबंधित विभागों को भेजकर त्वरित सुझाव लेने और अंतिम एकीकृत बेसिन प्लान शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने कहा कि जोजरी सहित क्षेत्र की नदियों में प्रदूषित पानी छोड़े जाने के मामलों को सर्वोच्च न्यायालय भी गंभीरता से देख रहा है। यदि उद्योग वैज्ञानिक तरीके से अपशिष्ट का निस्तारण नहीं करेंगे तो उद्योग बंद करने जैसे कठोर निर्णय लेने की नौबत भी आ सकती है। उन्होंने आईआईटी जैसी संस्थाओं की मदद से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। बैठक में आनंद कुमार, शिखर अग्रवाल, भवानी सिंह देथा, हेमंत गेरा, बिजो जॉय, संचिता बिश्नोई, रवि जैन, सुरेश ओला, आलोक रंजन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, उद्योग संघों और सीईटीपी संचालन समितियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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