Tuesday, July, 28,2026

अफसरों की विदेश यात्रा के दौरान एडिशनल चार्ज सौंपने का मुद्दा बना एकेडमिक चर्चा और डिबेट का विषय

जयपुर: ऑफिशियल विजिट पर विदेश जाने वाले आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के पदों का डीओपी ने आदेश जारी कर दूसरे अफसरों को एडिशनल चार्ज दिया है। यह कोई नई बात नहीं है। ऐसा ही होता रहा है, लेकिन संभवतः पहली बार इस अरेंजमेंट और सिस्टम को गलत और अव्यवहारिक बताया जा रहा है।

राज-काज का लंबा अनुभव रखने वाले, नियम-कायदों के जानकार और रूल-बुक के फॉलोअर एक वरिष्ठ आईएएस ने डीओपी के आदेश को एकेडमिक डिस्कशन का विषय बना दिया है। एसीएस रैंक के इस वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को वाट्सएप ग्रुप में यह मुद्दा उठाया है। लिखा "हम आधिकारिक ड्यूटी पर जा रहे हैं और हमारे कार्यालय के आदेशों है, में भी यही कहा गया है, यह कारण है कि हम आधिकारिक डिप्लोमेटिक पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे हैं। डीओपी को अतिरिक्त प्रभाम के लिए आदेश क्यों जारी करन चाहिए जो आधिकारिक कर्तव्यों पर आगे बढ़ने के अपने ही आदेश का खंडन करता है? ई-फाइले राजकाज पर की जा सकती हैं और कुछ राज्यों में इस तरह की स्थिति के लिए लिंक अधिकारी हैं, लेकिन डीओपी द्वारा अपनाया जा रहा अतिरिक्त प्रभार विकल्प दोषपूर्ण प्रतीत होता है।"

प्रशासन के जानकार इस आईएएस के उठाए गए पाइंट को सही और लॉजिकल मानते हैं। इनका तर्क यह है कि यदि ऑफिसर लंबी छुट्टी पर जाता है, मसूरी में ट्रेनिंग पर जाता है अथवा इलेक्शन ड्यूटी करता है तो इन सभी मामलों में वह अपनी ऑफिशियल ड्यूटी से अलग हो जाता है।

इलेक्शन ड्यूटी के दौरान तो वह चुनाव आयोग में ऑन डेपुटेशन होता है। इन मामलों में उसकी पोस्ट की जिम्मेदारी दूसरे अफसर को सौंपा जाना जरूरी है, क्योंकि उक्त मामलों में ऑफिस से बाहर रह कर वह ऑफिस का काम-काज नहीं कर सकता है।

लेकिन विदेश दौरे का मामला इन सबसे अलग है। विदेश में वह उसी ऑफिशियल काम से जाता है, जो काम देश व प्रदेश में उसकी पोस्ट से जुड़ा होता है। ऐसे में विदेश दौरे के दौरान भी वह व्यवहारिक तौर पर और लॉजिकली अपनी पोस्ट की ही जिम्मेदारी निभा रहा होता है। पीछे से उसकी पोस्ट को खाली नहीं माना जा सकता है।

ऐसे में डीओपी खाली मानते हुए उस पोस्ट का चार्ज दूसरे अफसर को कैसे सौंप सकता है? इस संबंध में दो रिटायर्ड सीनियर आईएएस अफसरों पी.एन. भंडारी और रविशंकर श्रीवास्तव का कहना है कि विदेश दौरों के दौरान उनके जमाने में भी एडिशनल चार्ज दिया जाता था, लेकिन हकीकत में यह सिस्टम या परंपरा गलत है। हालांकि सेवा नियमों में इस संबंध  में कहीं कोई स्पष्टता नहीं है, लेकिन अब जबकि ई-फाइलिंग का जमाना आ गया है और विदेश में बैठकर भी ऑफिशियल काम- काज निपटाया जा सकता है तो एडिशनल चार्ज के सिस्टम को बदला जा सकता है। इसका अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। कुछ जानकारों का कहना है कि विदेश के मामलों में टाइम जोन बड़ा फैक्टर होता है।

अमेरिका में तो 12 घंटे तक का टाइम डिफरेंस हो जाता है। ऐसे में ई-फाइलिंग में समस्या आएगी। समस्या का अधिक उपयुक्त समाधान यह हो सकता है कि अन्य कुछ राज्यों की तरह राजस्थान में भी लिंक- ऑफिसर बना दिए जाएं। कुल मिलाकर अफसरों की विदेश यात्राओं से जुड़ा यह विषय एकेडमिक डिस्कशन और डिबेट का हो गया है।

डीओपी का आदेश चर्चा का विषय बना

तीन आईएएस और दो आईएफएस के विदेश दौरों के दौरान उनके एडिशनल चार्ज बाबत डीओपी का 15 अक्टूबर का आदेश ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय बन गया है। इस एक ही आदेश में दोनों सेवाओं-आईएएस और आईएफएस के पांचों अफसरों का नाम 1 से 5 नंबर के सीरियल में एक साथ लिख दिए गए हैं। यह अनियमित और गलत है। आईएएस के 3 अफसरों का एक और आईएफएस के 2 अफसरों का अलग से दूसरा आदेश निकलना चाहिए था। डीओपी से जाने-अनजाने में हुई यह चूक गंभीर मानी जा रही है। ऐसा पहली बार ही हुआ है।

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