Monday, June, 15,2026

बोर्ड-निगमों की कुर्सियां खाली... इंतजार में दावेदार

जयपुर: राजस्थान में बोर्ड, निगम और आयोग राजनीतिक नियुक्तियों का बड़ा माध्यम माने जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इन संस्थाओं में नियुक्तियों का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। दिलचस्प यह है कि पिछली कांग्रेस सरकार ने चुनावी वर्ष में विभिन्न जातियों और सामाजिक वर्गों को साधने के उद्देश्य से अपने कार्यकाल के अंतिम डेढ़-दो वर्षों में 36 नए बोर्ड और आयोगों का गठन कर दिया, लेकिन इनमें से अधिकांश में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां तक नहीं हो सकीं। इसके अलावा प्रदेश में करीब 100 बोर्ड और निगम ऐसे हैं, जिनमें नियुक्तियों का इंतजार है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 से 2023 के बीच सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तहत 36 नए बोर्ड और आयोग बनाए गए, लेकिन इनमें से केवल 10 में ही नियुक्तियां हो पाई।

कई बोर्ड ऐसे रहे, जिनका गठन तो हो गया, लेकिन पूरे कार्यकाल में एक भी पद नहीं भरा गया। सरकार बदलने के बाद भी तस्वीर में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। भजनलाल सरकार का आधे से अधिक कार्यकाल पूरा होने की ओर है, लेकिन अधिकांश बोर्ड और आयोग अब भी खाली पड़े हैं। फिलहाल राज्य वित्त आयोग, देवनारायण बोर्ड और अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम जैसे चुनिंदा निकायों में ही नियुक्तियां हुई हैं, जबकि बड़ी संख्या में बोर्ड, निगम और आयोग अध्यक्ष तथा सदस्यों के बिना काम कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बोर्ड-निगमों की नियुक्तियां केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हीं के जरिए सरकार संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाती है, असंतुष्ट नेताओं को जिम्मेदारी देती है और सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास करती है। यही कारण है कि भाजपा सरकार के ढाई साल से अधिक समय बीतने के बावजूद नियुक्तियों का इंतजार कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है।

आंकड़ों में तस्वीर

  • 100 से अधिक बोर्ड, निगम और आयोग प्रदेश में सक्रिय
  • 36 नए बोर्ड-आयोग कांग्रेस सरकार ने गठित किए
  • केवल 10 में ही नियुक्तियां हो सकीं
  • 26 नए बोर्ड गठन के बाद भी खाली

महिला और बाल आयोग भी इंतजार में

स्थिति केवल सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के बोर्डों तक सीमित नहीं है। राजस्थान राज्य महिला आयोग और राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग जैसे महत्वपूर्ण निकाय भी लंबे समय से पूर्णकालिक नेतृत्व के इंतजार में है। इसके अलावा अल्पसंख्यक आयोग, नि:शक्तजन आयोग, जन-अभाव अभियोग निराकरण समिति, बीसूका, डांग क्षेत्रीय विकास मंडल, मेवात क्षेत्रीय विकास बोर्ड और मगरा विकास बोर्ड जैसी संस्थाओं में भी नियुक्तियों का इंतजार बना हुआ है।

कद्दावर नेताओं के लिए मानी -जाती हैं अहम कुर्सियां

राज्य में 100 से अधिक बोर्ड, निगम और आयोग हैं, जिनके अध्यक्षों को कई बार कैबिनेट मंत्री या राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया जाता है। यही वजह है कि इन पदों को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल सरकार ने डॉ. अरुण चतुर्वेदी को राज्य वित्त आयोग, सी.आर. चौधरी को किसान आयोग, जसवंत सिंह बिश्नोई को जीव-जंतु कल्याण बोर्ड, ओमप्रकाश भडाणा को देवनारायण बोर्ड और रामगोपाल सुथार को विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड जैसी जिम्मेदारियां सौंपी है, लेकिन कुल पदों की तुलना में यह संख्या अभी भी बेहद सीमित है।

इन बोर्डों का भविष्य तय नहीं

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने विभिन्न सामाजिक, जातीय और आर्थिक वर्गों के उत्थान के नाम पर जिन बोडों और आयोगों का गठन किया था, उनमें से बड़ी संख्या आज भी केवल कागजों तक सीमित है। माना जा रहा है कि वर्तमान सरकार इन बोर्डों में नियुक्ति का मन नहीं रख रही है। वर्तमान में आर्थिक पिछड़ा वर्ग बोर्ड, विप्र कल्याण बोर्ड, वीर तेजाजी किसान कल्याण बोर्ड, महात्मा ज्योतिबा फुले बोर्ड, रजक कल्याण बोर्ड, स्वर्ण-रजत कला विकास बोर्ड, मेजर दलपत सिंह (हाड़फा स्मृति) कल्याण बोर्ड, तेली घाणी विकास बोर्ड, अवंतीबाई लोधी बोर्ड, गाड़िया लोहार कल्याण बोर्ड, श्रीकृष्ण बोर्ड, लव-कुश बोर्ड, अहिल्याबाई होल्कर बोर्ड, स्थापत्य कला बोर्ड, गुरु गोरखनाथ बोर्ड, बालीनाथ बोर्ड, सरदार पटेल कल्याण बोर्ड, मिरासी समुदाय कल्याण बोर्ड, भ्रमण संस्कृति बोर्ड, धरणीधर कल्याण बोर्ड, संत दुर्बलनाथ बोर्ड, अग्रसेन कल्याण बोर्ड, राजा बली कल्याण बोर्ड, पुजारी कल्याण बोर्ड, वाल्मीकि कल्याण बोर्ड, धानका कल्याण बोर्ड, चित्रगुप्त कायस्थ कल्याण बोर्ड, जाटव कल्याण बोर्ड, मेघवाल कल्याण बोर्ड, कंजर कल्याण बोर्ड, आई माता कल्याण बोर्ड, स्वामी श्री दयानाथ बावरी कल्याण बोर्ड तथा अन्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास आयोग में अब भी नियुक्तियों का इंतजार बना हुआ है। इन बोर्डों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के अधिकांश पद रिक्त पड़े हैं।

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