Thursday, January, 29,2026

मुझे आत्मावलोकन के लिए कहते हैं, खुद अमल में क्यों नहीं लाते ?

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के आगामी सत्र से पहले जारी बुलेटिन को लेकर छिड़े विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने रविवार को जयपुर में प्रतिक्रिया दी है। कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवनानी ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि गहलोत को दूसरों को नसीहत देने से पहले खुद आत्मावलोकन करना चाहिए। देवनानी ने कहा कि बुलेटिन में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है और यह 2020 के बुलेटिन को ही फॉलो कर रहा है।

वास्तु दोष सुधारने के लिए किया गेट एंट्री में बदलावः विधानसभा सत्र से पहले 'वास्तु' का हवाला देते हुए देवनानी ने गेट एंट्री में बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वास्तु के अनुसार कुछ बदलाव किए गए हैं, लेकिन इसका मकसद सिर्फ इतना है कि सदस्यों की संख्या पूरी रहे। देवनानी ने स्पष्ट किया कि कोई भी हमारे बीच से न जाए, बल्कि पांच सालों तक सदस्य बने रहें। ये बदलाव सदन की गरिमा और सदस्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

'तुच्छ' शब्द पर विवादः लोकसभा से लिया गया, वर्षों से है प्रचलन में

विपक्ष की ओर से 'तुच्छ' शब्द को लेकर जताई गई आपत्ति पर देवनानी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह शब्द लोकसभा के निर्देशों से लिया गया है, जो 1952 से शामिल है। अन्य विधानसभाओं में भी 1956 से यह प्रचलन में है। देवनानी ने कहा कि इस शब्द पर राजनीति करना अनुचित है और इसका उद्देश्य सिर्फ सदन की गरिमा बनाए रखना है।

'लोकतंत्र का गला घोंटने' वाले आरोपों को बताया बेबुनियाद

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की ओर से बुलेटिन को 'लोकतंत्र का गला घोंटने वाला' बताने पर देवनानी ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि मैं गहलोत का सम्मान करता हूं, लेकिन लगता है उन्होंने बुलेटिन को ठीक से पढ़ा ही नहीं। लोकतंत्र का गला किसने घोंटा, यह गहलोत अधिक जानते हैं। देवनानी ने गहलोत के द्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे बयान वास्तविकता से परे हैं और जानबूझकर धारणा बनाई जा रही है कि पहली बार कुछ नया हो रहा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को प्रक्रिया निर्धारित करने का पूरा अधिकार है और सदन की जवाबदेही के लिए उन्होंने अपने कार्यकाल में जितनी कोशिश की, वह सबके सामने है।

2020 का बुलेटिन ही दोहराया गया

देवनानी ने बुलेटिन को लेकर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई नया नहीं है। उन्होंने बताया कि 2020 के बुलेटिन संख्या 26 में भी यही निर्देश थे, जिसमें यथासंभव लंबे प्रश्न न करने और पांच साल से ज्यादा पुरानी जानकारी ना मांगने की बात कही गई थी। देवनानी ने सवाल उठाया कि अगर यह व्यवस्था 2020 से लागू है तो 2026 में आकर इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? उन्होंने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय जूली सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, तब उन्हें इसमें कोई आपत्ति क्यों नहीं हुई?

पर्ची व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं, केवल प्रस्तावों के लिए ऑनलाइन सुविधा जोड़ी गई

देवनानी ने पर्ची व्यवस्था पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि 1995 में स्पीकर हरिशंकर भाभड़ा के निर्देश पर पर्ची पद्धति शुरू की गई थी, जो 2020 तक चली। 15 वीं विधानसभा के छठे सत्र में कार्य सलाहकार समिति की बैठक में 10 फरवरी, 2021 को स्पीकर डॉ. सी.पी. जोशी ने इसे बंद करने का निर्णय लिया था। वर्तमान व्यवस्था पूर्णतः पूर्ववत है, जिसमें केवल प्रस्तावों को ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत करने की सुविधा जोड़ी गई है। देवनानी ने कहा कि इसका उद्देश्य लोक विषयों को अधिक प्रभावी बनाना है।

सदन सुचारू चले, सर्वदलीय बैठक 27 को

विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के आगामी सत्र को लेकर अपनी अभिलाषा जताई। उन्होंने कहा कि सदन का भावी सत्र सामने है और यूट्यूब लाइव से जनता सब देखती है, इसलिए विधायकों को मर्यादित व्यवहार करना चाहिए। डोटासरा की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात पर देवनानी ने कहा कि सदन सुचारू चले, यही उनकी इच्छा है। उन्होंने 27 जनवरी को दोपहर 3 बजे अपने चेंबर में सर्वदलीय बैठक बुलाई है और सभी दलों से अपील की कि वे बैठक में आकर सदन को बेहतर चलाने के सुझाव दें। देवनानी ने गहलोत और नेता प्रतिपक्ष के द्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी आपत्तियों का जवाब दिया जा रहा है, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है।

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