Wednesday, July, 29,2026

1300 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में आज भी नहीं पहुंचती निजी बसें

जयपुर: राजस्थान में विकास, सड़क नेटवर्क और कनेक्टिविटी को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों के बावजूद आज भी प्रदेश की सैकड़ों ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां से तहसील मुख्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति न केवल ग्रामीण जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच में भी गंभीर बाधा बनी हुई है।

परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में कुल 11,226 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 1,326 ग्राम पंचायतों में निजी बस सेवा बिल्कुल नहीं पहुंचती, जबकि केवल 4,490 ग्राम पंचायतें ही राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की बस सेवाओं से जुड़ी हुई हैं। इसका अर्थ यह है कि हजारों गांवों के लोग आज भी निजी साधनों, महंगे वाहनों, जीपों या अनियमित परिवहन व्यवस्था पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

जिलेवार स्थिति पर नजर डालें तो कई जिलों में हालात बेहद चिंताजनक हैं। भरतपुर जिले की कुल 405 ग्राम पंचायतों में से 302 ग्राम पंचायतों में निजी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। इसी प्रकार दौसा जिले की 281 ग्राम पंचायतों में से 148 ग्राम पंचायतें निजी बस सेवाओं से वंचित हैं। वहीं, राजधानी जिला जयपुर में भी 65 ग्राम पंचायतों तक निजी बसें नहीं पहुंचतीं, जो शहरी-ग्रामीण असमानता को उजागर करता है।

हालांकि कुछ जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बेहतर है। सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर और जोधपुर ऐसे जिले हैं, जहां की सभी ग्राम पंचायतें निजी बस सेवाओं से जुड़ी हुई हैं। इन जिलों को ग्रामीण परिवहन के बेहतर मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।

357 ग्रामीण मार्गों पर बस योजना, 25 पर जारी हुआ LOA

ग्रामीण परिवहन की इस समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने बजट 2024-25 में नई पहल की घोषणा की गई थी। इसके तहत प्रदेश के 357 ग्रामीण मार्गों पर रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल के आधार पर बस संचालन की योजना बनाई जा रही है। इस मॉडल में निजी ऑपरेटरों को रोडवेज के साथ साझेदारी में बसें चलाने का अवसर दिया जाएगा। विभाग के अनुसार 25 मार्गों पर निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और संबंधित ऑपरेटरों को लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष मार्गो पर प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है। दूरस्थ, आदिवासी और कम आय वाले ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध, सस्ती और भरोसेमंद परिवहन सेवाएं शुरू करना बेहद जरूरी है। जब तक इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होता, तब तक राजस्थान में ग्रामीण परिवहन एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

छात्र, मरीज और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

परिवहन सुविधाओं की कमी का सबसे अधिक असर ग्रामीण छात्रों, मरीजों और किसानों पर पड़ता है। छात्रों को स्कूल और कॉलेज पहुंचने में परेशानी होती है, मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं मिल पाता, वहीं किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। कई बार ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों के लिए तहसील कार्यालय तक पहुंचने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

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